“हमने पिछली सरकारों के गड्ढे भरे, अब UP को बुलेट ट्रेन की स्पीड से आगे बढ़ाना है”-CM योगी

Published : May 11, 2026, 10:03 PM IST
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सार

दिल्ली में CII बिजनेस समिट 2026 के दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उनकी सरकार ने पिछली सरकारों के “गड्ढे” भरे हैं और अब उत्तर प्रदेश को बुलेट ट्रेन की रफ्तार से आगे बढ़ाने का समय है। जानिए भाषण की बड़ी बातें।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी ने सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित Confederation of Indian Industry की वार्षिक बिजनेस समिट-2026 में प्रदेश के विकास मॉडल, कानून व्यवस्था और औद्योगिक बदलाव को लेकर बड़ा संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में “पिछली सरकारों के पाप के गड्ढों को भरने” का काम किया है और अब उत्तर प्रदेश को “बुलेट ट्रेन की स्पीड” से आगे बढ़ाने का समय आ गया है। दिल्ली में उद्योगपतियों और निवेशकों के बीच दिए गए इस संबोधन में सीएम योगी ने उत्तर प्रदेश की पुरानी छवि, माफिया राज, कानून व्यवस्था और निवेश के माहौल पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश की पहचान दंगों, गुंडा टैक्स और पलायन से जुड़ी थी, लेकिन आज यूपी देश की अर्थव्यवस्था का “ग्रोथ इंजन” बनकर उभर रहा है।

“2017 से पहले गड्ढों से पहचान लेते थे यूपी का बॉर्डर”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में पुराने उत्तर प्रदेश की तस्वीर पेश करते हुए कहा कि एक समय ऐसा था जब शाम होते ही सड़क पर गड्ढे देखकर लोग समझ जाते थे कि यूपी की सीमा शुरू हो गई है। उन्होंने कहा, “प्रदेश के नाम के आगे उत्तर तो था, लेकिन उसके ऊपर कई प्रश्नचिह्न लगे हुए थे। हर साल 300 से ज्यादा दंगे होते थे, उद्यमी पलायन कर रहे थे और कानून व्यवस्था बदहाल थी।” सीएम योगी ने कहा कि राज्य में सबसे पहले सुरक्षा और कानून के राज को स्थापित करना जरूरी था, क्योंकि किसी भी निवेश और औद्योगिक विकास की पहली शर्त सुरक्षित माहौल होता है।

“जिसके पास शक्ति होगी, वही करुणा का मार्ग प्रशस्त करेगा”

अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने भारत की आर्थिक और सामरिक ताकत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया में सम्मान उसी देश को मिलता है जो मजबूत और आत्मनिर्भर होता है। उन्होंने कहा, “जिसके पास शक्ति होगी, वही करुणा और मैत्री का मार्ग भी प्रशस्त कर पाएगा। केवल हाथ फैलाने से दुनिया हमें गंभीरता से नहीं लेगी।” सीएम योगी ने इस दौरान सोमनाथ मंदिर पुनर्प्रतिष्ठा और पोखरण परमाणु परीक्षण का भी उल्लेख किया और कहा कि भारत की शक्ति वैश्विक मानवता और कल्याण के लिए जरूरी है।

“मठ चलाने का अनुभव प्रदेश चलाने में काम आया”

मुख्यमंत्री ने अपने शुरुआती प्रशासनिक अनुभव को याद करते हुए कहा कि जब उन्हें 2017 में उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी मिली, तब उनके पास सरकारी प्रशासन चलाने का अनुभव नहीं था। हालांकि गोरखनाथ मठ के प्रबंधन से मिली अनुशासन की सीख ने उन्हें प्रदेश संचालन में मदद की। उन्होंने कहा कि मठ में समय, वित्त और सुरक्षा का अनुशासन होता है और उसी मॉडल को उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था में लागू करने की कोशिश की।

माफिया राज से निवेश मॉडल तक का सफर

सीएम योगी ने प्रयागराज का उदाहरण देते हुए कहा कि एक दौर ऐसा भी था जब एक माफिया ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के काफिले तक को रुकवा दिया था। लेकिन आज प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है और कारोबारी माहौल बेहतर हुआ है। उन्होंने पश्चिमी यूपी के कैराना पलायन का जिक्र करते हुए कहा कि अब हालात बदल चुके हैं और कई परिवार वापस लौट रहे हैं।

ओडीओपी और MSME मॉडल पर खास जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 96 लाख से अधिक MSME इकाइयां काम कर रही हैं, जो करीब 3 करोड़ युवाओं को रोजगार दे रही हैं। उन्होंने “वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट” योजना को प्रदेश की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है। उन्होंने कहा कि सरकार उद्योगों को बेहतर सुरक्षा, कनेक्टिविटी और मजबूत सप्लाई चेन उपलब्ध कराने पर लगातार काम कर रही है।

धार्मिक पर्यटन बना यूपी की नई ताकत

सीएम योगी ने दावा किया कि पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश में 156 करोड़ पर्यटक पहुंचे, जिनमें महाकुंभ के दौरान आए करोड़ों श्रद्धालु भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि अयोध्या, काशी, मथुरा-वृंदावन, विंध्याचल और बौद्ध सर्किट जैसे धार्मिक स्थलों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।

निवेशकों को दिया भरोसा

सीआईआई बिजनेस समिट में मौजूद उद्योगपतियों और कॉरपोरेट प्रतिनिधियों के बीच मुख्यमंत्री ने यह संदेश देने की कोशिश की कि उत्तर प्रदेश अब केवल आबादी वाला राज्य नहीं, बल्कि निवेश, उद्योग और रोजगार का बड़ा केंद्र बन चुका है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह संबोधन केवल निवेशकों को आकर्षित करने तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें आगामी वर्षों के लिए उत्तर प्रदेश की आर्थिक और राजनीतिक दिशा का भी स्पष्ट संकेत देखने को मिला।

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