चला गया आडवाणी का चहेता IPS जिसके लिए गृह मंत्रालय ने बदले थे नियम, पुलिस महकमा में कई किस्से हैं मशहूर

सार

Ajay Raj Sharma death ग्रेटर नोएडा के एक अस्पताल में अजय राज शर्मा ने 80 साल की उम्र में दम तोड़ दिया। वह काफी दिनों से बीमार थे।

Ex IPS Ajay Raj Sharma death: जब भी यूपी में माफियाराज या चंबल के डाकूओं के खौफ की बात होगी तो एक जांबाज पुलिस अफसर का नाम हमेशा जेहन में जरूर आएगा। वह अफसर जिसके लिए तत्कालीन गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने नियमों को बदलकर दिल्ली का पुलिस कमिश्नर बनाया। वह पुलिस अफसर जिसने क्रिकेट पर लगे फिक्सिंग के दाग को धोने के लिए नेक्सस का पर्दाफाश किया। जमींदार परिवार से ताल्लुक रखने वाले इस अफसर के लिए पुलिस सेवा (Police Service) सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि एक मिशन (Mission) था। हम बात कर रहे हैं आईपीएस अफसर अजय राज शर्मा की। रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी अजय राज शर्मा का 80 साल की उम्र में सोमवार को देर रात को ग्रेटर नोएडा के एक अस्पताल में निधन हो गया। शर्मा के निधन से पुलिस महकमा में शोक की लहर है।

एक जमींदार खानदान का बेटा, जिसने वर्दी को अपनी पहचान बना लिया

मिर्जापुर (Mirzapur) के एक जमींदार (Landlord) परिवार में जन्मे अजय राज शर्मा का बचपन ऐशो-आराम में बीता लेकिन उनका मन हमेशा उन कहानियों में उलझा रहता, जहां पुलिस (Police) अपराधियों (Criminals) को पकड़ती थी, न्याय (Justice) की लड़ाई लड़ी जाती थी। घर में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का आना-जाना था, उन अफसरों को देख वह भी उनकी तरह सिस्टम का हिस्सा बनने की मन में ठान लिए। उन्होंने देहरादून (Dehradun) के सेंट जोसेफ एकेडमी (St. Joseph's Academy) से शुरुआती पढ़ाई की, फिर अपने सपनों को पंख देने पहुंच गए इलाहाबाद। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (Allahabad University) से एमए (MA) किया। फिर यूपीएससी परीक्षा (UPSC Exam) दी। पहले ही प्रयास (First Attempt) में पुलिस अधिकारी बन गए।

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चंबल (Chambal) के बीहड़ों में जब पुलिस बनी अपराधियों का खौफ

साल था 1970, जब चंबल (Chambal) के बीहड़ डाकुओं (Dacoits) की दहशत से क्षेत्र कांपता था। उस वक्त डाकू गुल्लो (Dacoit Gullo) ने एक सब-इंस्पेक्टर की हत्या कर दी। पुलिस (Police) के लिए यह एक चुनौती थी। अजय शर्मा, अभी ट्रेनी थे। लेकिन मन में ठान लिए कि अगर मौका मिलेगा तो वह क्षेत्र से डाकुओं के अंत की कहानी जरूर लिखने की कोशिश करेंगे। चार साल बाद वह मौका आया।

चंबल (Chambal) क्षेत्र में वह वापस ट्रांसफर किए गए। इस बार उन्होंने चंबल से आतंक का खात्मा करने का मन बनाया। उन्होंने लज्जाराम पंडित (Lajjaram Pandit) और कुंवरजी गड़रिया (Kunwarji Gadariya) जैसे कुख्यात डकैतों को पकड़ने के लिए एक 22 घंटे लंबी मुठभेड़ (22-Hour Encounter) की अगुवाई की। यह एनकाउंटर यूपी (Uttar Pradesh) का पहला सबसे बड़ा एनकाउंटर था। इस ऑपरेशन ने अजय राज शर्मा को प्रदेश में फेमस तो किया ही, यूपी के अपराधियों में एक खौफनाक संदेश भी गया। संदेश यह कि पुलिस (Police) सिर्फ कागजों (Documents) पर नहीं है बल्कि बंदूकों (Guns) के साथ मैदान में उतर चुकी है।

जब मुख्यमंत्री की हत्या की सुपारी से महकमा दहशत में आया

90 के दशक के अंत तक उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में माफिया राज (Mafia Rule) अपने चरम पर था। शाही और तिवारी हाता के वर्चस्व को एक और नाम चुनौती दे रहा था। यह नाम था—श्रीप्रकाश शुक्ला (Shriprakash Shukla)। वो कई प्रदेशों में दहशत का दूसरा नाम बन चुका था। सरेआम पूर्वांचल के माफिया पूर्व विधायक वीरेंद्र प्रताप शाही को लखनऊ में गोलियों से भून चुका था। अधिकतर बड़े माफियाओं को चुनौती देकर मार चुका था। पुलिस के लिए सिरदर्द बन रहे श्रीप्रकाश शुक्ला को लेकर पुलिस महकमा उस समय और परेशान हो उठा जब यह खबर सामने आई कि यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की हत्या की सुपारी छह करोड़ रुपये में वह ले चुका था। पुलिस तक यह बात पहुंची तो अधिकारियों के होश उड़ गए।

और फिर पड़ी एसटीएफ की नींव...

यूपी (UP) के तत्कालीन मुख्यमंत्री (Chief Minister) कल्याण सिंह (Kalyan Singh) की हत्या (Murder) की सुपारी (Contract Killing) से सरकार हिल गई। किसी को कुछ सूझ नहीं रहा था। इसी बीच एक स्पेशल फोर्स के गठन का सुझाव आया। इसको लीड कौन करता? यह सवाल जब आया तो तत्कालीन डीजीपी ने अजय राज शर्मा को बुलाया। उन्होंने STF (Special Task Force) बनाया और इसकी कमान अजय राज शर्मा (Ajay Raj Sharma) को दे दी। STF को पहला टारगेट मिला-श्रीप्रकाश शुक्ला (Shriprakash Shukla। यूपी एसटीएफ ने वह कमाल कर दिया और कुछ ही समय में श्रीप्रकाश शुक्ला को एनकाउंटर में ढेर कर दिया गया। इस एनकाउंटर से सफेदपोशों के अलावा खाकी ने भी चैन की सांस ली।

जब आडवाणी ने नियम बदलकर बनाया दिल्ली पुलिस कमिश्नर

देश की सरकार को राजधानी दिल्ली के पुलिस प्रमुख की कुर्सी पर एक ऐसे चेहरे की तलाश थी जो कानून व्यवस्था तो संभाले ही कई गंभीर मामलों में भी साफ-सफाई कर सके। यूपी के अजय राज शर्मा के चर्चे केंद्र की सरकार के पास भी पहुंच रहे थे। यह वही समय था जब क्रिकेट में फिक्सिंग का दाग लग रहा था। इस दाग को धोने के लिए एक बड़ी कार्रवाई की दरकार थी। केंद्र की सत्ता में अटल-आडवाणी की जोड़ी थी। तत्कालीन गृहमंत्री (Home Minister) लालकृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) ने यूपी कैडर के अजय राज शर्मा को प्रतिनियुक्ति पर बुलाया। उन्हें दिल्ली पुलिस कमिश्नर (Delhi Police Commissioner) बना दिया गया। यह पहली बार था जब दिल्ली पुलिस कमिश्नर किसी दूसरे कैडर का था। अजय राज शर्मा की नियुक्ति के लिए गृह मंत्रालय ने नियमों में कई बदलाव किए।

मैच फिक्सिंग स्कैम का किया पर्दाफाश

दिल्ली (Delhi) में रहते हुए अजय राज शर्मा ने मैच फिक्सिंग स्कैंडल (Match-Fixing Scandal) को उजागर किया। इस खुलासा ने भारतीय क्रिकेट (Indian Cricket) जगत को हिलाकर रख दिया। यह केवल खिलाड़ियों पर कार्रवाई करने का मामला नहीं था, बल्कि यह उस भरोसे को बचाने की लड़ाई थी, जिसे करोड़ों भारतीय क्रिकेट प्रेमी जीते थे।

अंतिम सलाम (Final Tribute): अजय राज शर्मा का जाना एक युग (Era) का अंत

ग्रेटर नोएडा के एक अस्पताल में अजय राज शर्मा ने 80 साल की उम्र में दम तोड़ दिया। वह काफी दिनों से बीमार थे। पूर्व आईपीएस अधिकारी अजय राज शर्मा को उनके काम से लोग याद करेंगे। उन्होंने सिर्फ अपराधियों को नहीं, बल्कि भ्रष्ट सिस्टम , संगठित अपराध (Organized Crime) को खत्म करने का प्रयास किया।

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