उत्तर प्रदेश में वक्फ बिल को लेकर हाई अलर्ट जारी! पुलिसकर्मियों की छुट्टियां रद्द, संवेदनशील इलाकों में बढ़ाई गई सुरक्षा। शुक्रवार की नमाज को देखते हुए पुलिस गश्त बढ़ाई गई। जानें पूरी खबर!

Protest Against Waqf Bill: उत्तर प्रदेश में वक्फ बिल (Waqf Bill 2024) को लेकर माहौल गर्माया हुआ है। संभावित विरोध और प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने पुलिसकर्मियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं। अवकाश पर गए पुलिसकर्मियों को तत्काल ड्यूटी पर लौटने का आदेश दिया गया है। संवेदनशील और मिश्रित आबादी वाले इलाकों में विशेष गश्त करने के निर्देश दिए गए हैं। सोशल मीडिया मॉनिटरिंग को भी कड़ा किया गया है।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

Waqf Bill पर यूपी पुलिस का अलर्ट 

प्रदेश के डीजीपी प्रशांत कुमार ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि किसी भी प्रकार की अराजकता या तनावपूर्ण स्थिति को रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई की जाए। सार्वजनिक स्थानों पर पुलिस गश्त बढ़ाई गई। संवेदनशील जिलों में पुलिस अधिकारी खुद तैनात रहेंगे। सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी नजर रहेगी। ADG जोन, IG रेंज और SP मुख्यालय से सीधी निगरानी की जा रही है।

वक्फ बिल पर संसद में गरमागरम बहस, मुस्लिम संगठन कर रहे विरोध

लोकसभा में बुधवार को वक्फ संशोधन विधेयक (Waqf Amendment Bill 2024) पारित हो गया है। अब यह बिल राज्यसभा में पेश होगा, जहां इसके पास होने की पूरी संभावना है। इस बिल के खिलाफ कई मुस्लिम संगठन और विपक्षी दल खुलकर विरोध जता रहे हैं। कई शहरों में प्रदर्शन हुए, जहां लोगों ने काली पट्टी बांधकर वक्फ बिल का विरोध किया।

4 अप्रैल को शुक्रवार की नमाज पर विशेष सुरक्षा

शुक्रवार, 4 मार्च को नमाज के दौरान संभावित प्रदर्शन और विरोध को देखते हुए सुरक्षा को बेहद सख्त कर दिया गया है। संवेदनशील मस्जिदों और इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। हर जिले में पुलिस अधिकारियों को खुद फील्ड में मौजूद रहने का आदेश दिया गया है। किसी भी तरह की अफवाह और हिंसा पर तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए गए है।

क्या है वक्फ बिल और क्यों हो रहा है विरोध?

वक्फ संशोधन बिल 2024 का उद्देश्य अवैध रूप से वक्फ बोर्ड में दर्ज की गई संपत्तियों की जांच करना और प्रशासनिक नियंत्रण को मजबूत बनाना है। मगर, विपक्षी दलों और कुछ धार्मिक संगठनों का कहना है कि इससे मुस्लिम समुदाय के धार्मिक और सामाजिक अधिकारों पर असर पड़ेगा।