International Day of Forests: वन दिवस पर CM योगी का संदेश, यूपी में बढ़ा वनाच्छादन, डॉल्फिन और ग्रीन एनर्जी पर फोकस

Published : Mar 21, 2026, 07:33 PM IST
Yogi Adityanath message van diwas 2026

सार

वन दिवस पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने वनों के महत्व, पौधरोपण अभियान, डॉल्फिन संरक्षण और ग्रीन एनर्जी योजनाओं पर जोर दिया। यूपी में वनाच्छादन बढ़ाने, रामसर साइट्स और इको-टूरिज्म के जरिए पर्यावरण और विकास को संतुलित करने का लक्ष्य है।

लखनऊ। अंतरराष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित राष्ट्रीय वानिकी संवाद के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पर्यावरण संरक्षण और वनों के महत्व पर विस्तृत विचार रखे। इस दौरान उन्होंने कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया, विभिन्न लोगों को सम्मानित किया और वन विभाग की प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।

जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संकट के बीच वनों का बढ़ता महत्व

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण असंतुलन जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में वनों का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। उन्होंने भारतीय वैदिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारे ऋषियों ने प्रकृति को सर्वोच्च स्थान दिया है। “माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः” का संदेश हमें धरती को माता मानकर उसकी रक्षा करने की प्रेरणा देता है।

‘फॉरेस्ट एंड इकोनॉमिक्स’ थीम: पर्यावरण और विकास का संतुलन

सीएम योगी ने कहा कि इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय वन दिवस की थीम ‘फॉरेस्ट एंड इकोनॉमिक्स’ रखी गई है, जो यह बताती है कि हमें वनों के संरक्षण के साथ आर्थिक विकास और मानव कल्याण के लिए संतुलित रणनीति बनानी होगी। उन्होंने श्लोक “दशकूपसमा वापी…” का उल्लेख करते हुए कहा कि एक वृक्ष का महत्व अत्यंत बड़ा है और प्रकृति का संतुलन बनाए रखने में इसकी अहम भूमिका है।

जन आंदोलन से बढ़ा वनाच्छादन, करोड़ों पौधरोपण का रिकॉर्ड

मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश में वनाच्छादन बढ़ाने में बड़ी सफलता मिली है।

  • 242 करोड़ पौधरोपण किया गया
  • वनाच्छादन लगभग 10% तक पहुंचा
  • लक्ष्य 16-17% तक बढ़ाने का

उन्होंने कहा कि जब अभियान जन आंदोलन बनता है, तभी सफलता मिलती है।

रामसर साइट्स में बढ़ोतरी, जल संरक्षण और टूरिज्म को बढ़ावा

सीएम योगी ने बताया कि वर्ष 2017 में प्रदेश में केवल 1 रामसर साइट थी, जो अब बढ़कर 11 हो गई हैं। लक्ष्य इसे 100 तक ले जाने का है। रामसर साइट्स जल संरक्षण, वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इससे भू-माफियाओं से भी भूमि सुरक्षित रहती है।

नदी पुनरोद्धार और बड़े स्तर पर पौधरोपण अभियान

गंगा, यमुना और सरयू नदियों के किनारे बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया जा रहा है। एक्सप्रेस-वे और राजमार्गों के दोनों किनारों पर भी उपयुक्त पौधों का रोपण किया गया है। हर जिले में एक नदी के पुनरोद्धार का अभियान भी चलाया गया है।

इको-टूरिज्म और ग्रीन इकोनॉमी को बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि दुधवा नेशनल पार्क में इको-टूरिज्म को बढ़ावा दिया गया है और कनेक्टिविटी बेहतर की गई है। प्रदेश में 2,467 वन आधारित ग्रीन इकोनॉमी मॉडल उद्योग स्थापित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि बाघों का संरक्षण हमारी जिम्मेदारी है और मानव-वन्यजीव संघर्ष को आपदा की श्रेणी में रखा गया है।

डॉल्फिन संरक्षण में बड़ी सफलता, बढ़ी संख्या

सीएम योगी ने बताया कि नमामि गंगे परियोजना के बाद गांगेय डॉल्फिन की संख्या में बड़ा इजाफा हुआ है।

  • पहले केवल 23 डॉल्फिन थीं
  • अब देश में 6,327 डॉल्फिन हैं
  • इनमें से 2,397 अकेले उत्तर प्रदेश में हैं

गोरखपुर में जटायु संरक्षण केंद्र भी स्थापित किया गया है।

वन संरक्षण के लिए बजट और योजनाओं में वृद्धि

सरकार ने वन एवं पर्यावरण क्षेत्र के लिए बजट में वृद्धि की है:

  • सामाजिक वानिकी के लिए 800 करोड़ रुपये
  • गौशाला प्रबंधन के लिए 220 करोड़
  • वन आधुनिकीकरण के लिए 10 करोड़
  • रानीपुर टाइगर रिजर्व के लिए 50 करोड़ कॉर्पस फंड
  • क्लीन एयर मैनेजमेंट के लिए 194 करोड़

सोलर, इलेक्ट्रिक व्हीकल और ग्रीन एनर्जी पर फोकस

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कार्बन नेट जीरो लक्ष्य के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं:

  • इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी लागू
  • 7 शहरों में मेट्रो संचालन
  • 700+ इलेक्ट्रिक बसें
  • अयोध्या को सोलर सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है

पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत 4 लाख रूफटॉप सोलर लगाए जा चुके हैं, जिनसे 1400 मेगावाट से अधिक बिजली उत्पादन क्षमता तैयार हुई है। आने वाले 5 वर्षों में 22,000 मेगावाट रिन्यूएबल एनर्जी विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।

विरासत वृक्ष और जनभागीदारी पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि 100 वर्ष पुराने पेड़ों को विरासत वृक्ष घोषित किया गया है और इनके संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कॉफी टेबल बुक को अधिक से अधिक संस्थानों तक पहुंचाया जाए और किसानों से कार्बन क्रेडिट को लेकर संवाद बढ़ाया जाए।

कार्यक्रम में कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी रहे मौजूद

इस अवसर पर वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना, राज्य मंत्री केपी मलिक, प्रमुख सचिव वी हेकाली झिमोमी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुनील चौधरी, अनुराधा वेमुरी सहित कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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