
लखनऊ। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण के उद्घाटन के साथ उत्तर प्रदेश ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। अब राज्य में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट की संख्या बढ़कर 5 हो गई है। जेवर एयरपोर्ट के शुरू होते ही उत्तर प्रदेश ने इस मामले में केरल, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। अगर कुल एयरपोर्ट की बात करें, तो अब उत्तर प्रदेश में 17 एयरपोर्ट संचालित हो रहे हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार ने एयर कनेक्टिविटी को मजबूत बनाने के लिए बजट में कई गुना बढ़ोतरी की है। वर्ष 2017-18 से 2025-26 के बीच नागरिक उड्डयन बजट लगातार बढ़ा है। हालिया बजट में योगी सरकार ने नागरिक उड्डयन के लिए 2111 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी को और मजबूती मिलेगी।
उत्तर प्रदेश तेजी से 24 एयरपोर्ट वाले राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
म्योरपुर (सोनभद्र), ललितपुर, मेरठ, पलिया (लखीमपुर), फुरसतगंज (अमेठी), गाजीपुर और झांसी
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अब सिर्फ यात्री सेवाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह देश का बड़ा कार्गो और लॉजिस्टिक्स हब बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। डेडिकेटेड कार्गो टर्मिनल, मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और विशेष कार्गो रूट इसे ग्लोबल ट्रेड गेटवे बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
एयरपोर्ट परिसर में अत्याधुनिक कार्गो टर्मिनल विकसित किया गया है, जिसकी शुरुआती क्षमता लगभग 20 लाख मीट्रिक टन है। भविष्य में इसे बढ़ाकर 80 लाख मीट्रिक टन तक करने का लक्ष्य रखा गया है। शुरुआती चरण में करीब 2.5 लाख टन प्रति वर्ष कार्गो संचालन की क्षमता है, जिसे आगे बढ़ाकर 15 लाख टन प्रति वर्ष तक किया जाएगा। लगभग 80 हजार वर्गमीटर में फैले इस टर्मिनल को आधुनिक तकनीक से लैस किया जा रहा है।
एयरपोर्ट को मल्टीमॉडल कार्गो हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां सड़क, हवाई मार्ग और भविष्य में रेल कनेक्टिविटी से माल परिवहन आसान होगा। डेडिकेटेड कार्गो रूट के जरिए उद्योगों से सीधे एयरपोर्ट तक तेज और सुगम पहुंच सुनिश्चित की जाएगी।
यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में विकसित हो रहे इलेक्ट्रॉनिक्स, मैन्युफैक्चरिंग, ई-कॉमर्स, वेयरहाउसिंग और फार्मा सेक्टर को इस कार्गो हब से बड़ा फायदा मिलेगा। यहां बने उत्पाद अब तेजी से अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच सकेंगे, जिससे निर्यात बढ़ेगा और लागत कम होगी।
डेडिकेटेड कार्गो टर्मिनल और विशेष रूट से लॉजिस्टिक्स प्रक्रिया तेज और आसान होगी। इससे सप्लाई चेन मजबूत होगी और समय पर डिलीवरी सुनिश्चित हो सकेगी। उत्तर प्रदेश “जस्ट-इन-टाइम” सप्लाई मॉडल की ओर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे वैश्विक कंपनियों का भरोसा बढ़ेगा।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश को ‘लैंडलॉक्ड’ स्थिति से बाहर निकालकर सीधे वैश्विक व्यापार नेटवर्क से जोड़ेगा। इससे राज्य में निर्यात-आयात को बढ़ावा मिलेगा और यूपी एक बड़ा लॉजिस्टिक्स और ट्रेड हब बनकर उभरेगा।
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