
लखनऊ से रविवार को एक ऐसी यात्रा की शुरुआत हुई, जिसने हजारों श्रद्धालुओं की वर्षों पुरानी इच्छा को साकार कर दिया। धार्मिक उत्साह, शंखनाद और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच ‘सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी ने इस यात्रा का शुभारंभ किया, जिसे लेकर प्रदेश भर से आए श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला।
इस विशेष यात्रा के जरिए अब ऐसे श्रद्धालु भी सोमनाथ धाम पहुंच सकेंगे, जो आर्थिक या अन्य कारणों से अब तक यह सपना पूरा नहीं कर पाए थे। श्रद्धालुओं का कहना है कि यह पहल केवल यात्रा नहीं, बल्कि आस्था और संस्कृति को जोड़ने का एक माध्यम है.
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मुजफ्फरनगर के बंती खेड़ा निवासी सतीश कुमार इस मौके पर भावुक नजर आए। उन्होंने बताया कि वह कई वर्षों से सोमनाथ मंदिर के दर्शन करना चाहते थे, लेकिन अवसर नहीं मिल पाया। उन्होंने कहा कि सरकार की इस पहल से उनका सपना पूरा हो गया है और इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया। वहीं बरेली की बिंदु इशिका सिंघानिया ने इस यात्रा को सनातन संस्कृति को मजबूत करने वाली पहल बताया। उनके अनुसार, इससे अलग-अलग राज्यों के लोगों को एक-दूसरे की परंपराओं को समझने का मौका मिलेगा।
आजमगढ़ के अनंत तिवारी ने इस पहल को गरीब और मध्यम वर्ग के लिए “वरदान” बताया। उन्होंने कहा कि कई लोग श्रद्धा तो रखते हैं, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण तीर्थ यात्रा नहीं कर पाते। अब इस योजना के जरिए उन्हें भी समान अवसर मिलेगा। मेरठ के अनंत राणा ने बताया कि वह पहली बार सोमनाथ दर्शन के लिए जा रहे हैं और इस यात्रा से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को विशेष लाभ मिलेगा।
यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना करते हुए कहा कि सरकार आम लोगों की भावनाओं को समझते हुए काम कर रही है। इस यात्रा का एक बड़ा उद्देश्य केवल धार्मिक दर्शन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देना भी है।
‘सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा’ के जरिए सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि विकास के साथ-साथ धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को भी प्राथमिकता दी जा रही है। यह पहल न केवल श्रद्धालुओं की भावनाओं को सम्मान देती है, बल्कि राज्य और देश के बीच सांस्कृतिक संबंधों को भी मजबूत करती है।
लखनऊ से शुरू हुई यह यात्रा सिर्फ एक ट्रेन नहीं, बल्कि हजारों लोगों की आस्था, उम्मीद और सपनों को लेकर आगे बढ़ रही है। आने वाले समय में अगर ऐसी पहलें लगातार होती रहीं, तो धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ सामाजिक जुड़ाव भी और मजबूत होगा।
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