लेखपाल परीक्षा में Paper Leak का दावा निकला फर्जी! योगी सरकार का बड़ा एक्शन

Published : May 24, 2026, 05:14 PM IST
UP Lekhpal Exam 2025 Paper Leak Rumours Found Fake Amid AI Based High Security Monitoring

सार

UP Lekhpal Exam 2025: यूपी लेखपाल मुख्य परीक्षा 2025 में पेपर लीक की अफवाह जांच में पूरी तरह फर्जी निकली। योगी सरकार की हाईटेक निगरानी, एआई, बायोमैट्रिक और कड़ी सुरक्षा के बीच 44 जिलों में परीक्षा शांतिपूर्वक संपन्न हुई।

उत्तर प्रदेश में सरकारी भर्ती परीक्षाओं का नाम आते ही कभी पेपर लीक, सॉल्वर गैंग और नकल माफियाओं की खबरें सुर्खियों में रहती थीं। अभ्यर्थियों के मन में डर रहता था कि मेहनत के बावजूद परीक्षा की पारदर्शिता सवालों में घिर सकती है। लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदलती दिखाई दे रही है। लेखपाल मुख्य परीक्षा-2025 ने इस बदलाव की एक बड़ी मिसाल पेश की है।\

लखनऊ में परीक्षा के दौरान सोशल मीडिया पर पेपर लीक की अफवाह जरूर फैलाई गई, लेकिन प्रशासन और आयोग की त्वरित कार्रवाई में यह दावा पूरी तरह झूठा साबित हुआ। जांच में साफ हुआ कि प्रश्नपत्र और ओएमआर शीट पूरी तरह सुरक्षित और सीलबंद थीं। यही वजह रही कि अफवाह फैलाने वालों की कोशिश नाकाम हो गई और परीक्षा शांतिपूर्वक संपन्न हुई।

सोशल मीडिया पर फैली अफवाह, लेकिन जांच में निकली फर्जी

लेखपाल मुख्य परीक्षा के दौरान लखनऊ के ऐशबाग स्थित गोपीनाथ लक्ष्मणदास रस्तोगी इंटर कॉलेज को लेकर कुछ सोशल मीडिया पोस्ट वायरल होने लगे। दावा किया गया कि परीक्षा का पेपर लीक हो गया है। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, यूपीएसएसएससी और निगरानी टीमों ने तुरंत जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि प्रश्नपत्र पूरी तरह सीलबंद थे, ओएमआर शीट सुरक्षित थीं, किसी तरह की लीक या गड़बड़ी नहीं हुई थी. दरअसल, एक परीक्षा कक्ष के कुछ अभ्यर्थी भ्रम की स्थिति में बाहर आ गए थे। इसी घटना को कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया और पेपर लीक की अफवाह फैला दी। हालांकि अधिकारियों ने मौके पर स्थिति स्पष्ट की, जिसके बाद अभ्यर्थी वापस परीक्षा कक्ष में पहुंचे और परीक्षा सामान्य रूप से जारी रही।

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44 जिलों में शांतिपूर्वक हुई परीक्षा

उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) द्वारा आयोजित लेखपाल मुख्य परीक्षा प्रदेश के 44 जिलों के 861 परीक्षा केंद्रों पर कराई गई। आंकड़ों के अनुसार: कुल पंजीकृत अभ्यर्थी: 3,66,712, परीक्षा में शामिल अभ्यर्थी: 3,01,756, उपस्थिति प्रतिशत: 82.29%. विशेषज्ञ मानते हैं कि इतनी बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि अब भर्ती परीक्षाओं को लेकर युवाओं का भरोसा पहले से मजबूत हुआ है।

हाईटेक निगरानी बना सबसे बड़ा हथियार

इस बार परीक्षा व्यवस्था पूरी तरह तकनीक आधारित रही। आयोग मुख्यालय से लेकर हर परीक्षा केंद्र तक लाइव मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई थी। परीक्षा में इस्तेमाल की गई प्रमुख व्यवस्थाएं: 18,883 सीसीटीवी कैमरे, 7,683 बायोमैट्रिक ऑपरेटर, 6,297 फ्रिस्किंग गार्ड, एआई आधारित पहचान प्रणाली, कंट्रोल कमांड रूम से लाइव निगरानी यही वजह रही कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई संभव हो सकी। बुलंदशहर में एक संदिग्ध अभ्यर्थी को एआई और बायोमैट्रिक जांच के दौरान पकड़ लिया गया, जिसके बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया।

नकल माफियाओं पर लगातार सख्ती

उत्तर प्रदेश में एक समय भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और सॉल्वर गैंग की घटनाएं आम मानी जाती थीं। कई परीक्षाएं रद्द होती थीं और लाखों युवाओं की मेहनत पर सवाल खड़े हो जाते थे। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में योगी सरकार ने परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव किए हैं। सरकार ने बायोमैट्रिक सत्यापन, डिजिटल ट्रैकिंग, एआई मॉनिटरिंग, केंद्रों पर लाइव निगरानी, प्रशासनिक जवाबदेही जैसी व्यवस्थाओं को मजबूती से लागू किया है। सरकार का दावा है कि इन कदमों से नकल और पेपर लीक नेटवर्क पर बड़ी चोट पहुंची है।

अभ्यर्थियों के भरोसे की बड़ी परीक्षा थी लेखपाल भर्ती

लेखपाल भर्ती परीक्षा सिर्फ एक सरकारी नौकरी की परीक्षा नहीं थी, बल्कि यह उस भरोसे की भी परीक्षा थी, जो लाखों युवाओं ने नई भर्ती व्यवस्था पर जताया है। परीक्षा के दौरान फैलाई गई अफवाहों के बावजूद जिस तरह प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई कर स्थिति स्पष्ट की, उसने यह संकेत दिया कि अब परीक्षा व्यवस्था पहले की तुलना में कहीं अधिक सतर्क और तकनीकी रूप से मजबूत हो चुकी है।

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