
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में नदियों को साफ और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए योगी सरकार ने पिछले 9 वर्षों में तेज गति से काम किया है। गंदे पानी के शोधन (ट्रीटमेंट) के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की संख्या और क्षमता में कई गुना बढ़ोतरी की गई है।
2017 से पहले नमामि गंगे योजना के तहत केवल 5 STP ही स्थापित हो पाए थे। वहीं, योगी सरकार के कार्यकाल में 50 से अधिक नए STP लगाए गए हैं। इससे साफ होता है कि पिछले 9 वर्षों में STP की संख्या और क्षमता लगभग 10 गुना बढ़ी है।
इस समय उत्तर प्रदेश में करीब 160 STP संचालित हैं। इनकी मदद से हर दिन लगभग 5000 मिलियन लीटर (MLD) गंदे पानी को साफ किया जा रहा है, जिससे नदियों में जाने वाले प्रदूषण को रोका जा रहा है। यह उपलब्धि पहले की सरकारों की तुलना में काफी बड़ी मानी जा रही है।
राजधानी लखनऊ में इस समय 9 STP काम कर रहे हैं, जिनकी कुल क्षमता 624.50 MLD है। ये प्लांट गोमती नदी और उसकी सहायक नदियों में जाने वाले पानी को पहले ही शुद्ध कर देते हैं। ये STP भरवारा, दौलतगंज (शहरी और ग्रामीण), हाथी पार्क, जीएच कैनाल, वृंदावन, यूपी आवास विकास परिषद क्षेत्र और CG सिटी जैसे स्थानों पर स्थित हैं। इनसे निकलने वाले ट्रीटेड पानी के पुनः उपयोग (रीयूज) की योजना भी बनाई जा रही है।
लखनऊ में नमामि गंगे परियोजना के तहत 3 नए STP का निर्माण चल रहा है, जिनकी कुल क्षमता 153.50 MLD होगी। ये प्लांट बारिकल, लोनियांपुरवा और बिजनौर में बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा 4 नए STP बसंत कुंज, वजीरगंज, जियामऊ और मस्तेमऊ में प्रस्तावित हैं, जिनकी कुल क्षमता 342 MLD होगी।
इन सभी नए और प्रस्तावित STP के पूरा होने के बाद लखनऊ की कुल सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता 1000 MLD से अधिक हो जाएगी। इससे राजधानी की नदियों को और अधिक साफ रखने में मदद मिलेगी।
2017 से पहले नदियों की सफाई से जुड़ी योजनाएं अधिकतर कागजों तक ही सीमित थीं और STP निर्माण की रफ्तार बहुत धीमी थी। लेकिन वर्तमान सरकार ने नए प्लांट लगाने के साथ-साथ पुराने STP को अपग्रेड करने पर भी विशेष ध्यान दिया है।
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