
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने मंगलवार को स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का सीधा लाभ आम जनता तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में इलाज, जांच, दवाओं और इमरजेंसी सेवाओं की गुणवत्ता लगातार बेहतर बनाई जाए। साथ ही मेडिकल कॉलेजों, नर्सिंग संस्थानों और सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित मानव संसाधन और प्रभावी प्रबंधन के जरिए मजबूत किया जाए।
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में इस समय 108 जिला अस्पताल, 106 विशिष्ट चिकित्सालय, 976 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 3757 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 27,668 स्वास्थ्य उपकेंद्र संचालित हैं। वर्ष 2025-26 के दौरान सरकारी अस्पतालों में 26.41 करोड़ ओपीडी और 1.23 करोड़ आईपीडी सेवाएं दी गईं। इसके अलावा 24.33 करोड़ पैथोलॉजी जांचें भी की गईं।
सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2016-17 में प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 44 थी, जो अब बढ़कर 83 हो चुकी है। यानी करीब 88.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसी अवधि में पीजी सीटें 1344 से बढ़कर 5067 और एमबीबीएस सीटें 5390 से बढ़कर 12,800 तक पहुंच गई हैं। सुपर स्पेशियलिटी सीटों में भी लगभग 165 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा का मकसद केवल संस्थानों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रदेश को कुशल डॉक्टर, विशेषज्ञ और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध कराना है। उन्होंने मेडिकल संस्थानों में आधुनिक उपकरण, विशेषज्ञ फैकल्टी और रिसर्च गतिविधियों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए।
प्रदेश में इस समय 652 नर्सिंग संस्थान संचालित हैं। एएनएम, जीएनएम और बीएससी नर्सिंग पाठ्यक्रमों की सीटों में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई है। राज्य में लगभग 3.95 लाख पंजीकृत नर्सिंग स्टाफ उपलब्ध हैं। बैठक में ‘मिशन निरामया 1.0’ के तहत हुए सुधारों की जानकारी भी दी गई। बताया गया कि 17 हजार स्कूलों में काउंसलिंग सेशन आयोजित किए गए, जिससे 3.5 लाख से ज्यादा छात्रों तक पहुंच बनाई गई। साथ ही 10,570 नर्सिंग फैकल्टी सदस्यों को प्रशिक्षण दिया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुष्मान योजना गरीब परिवारों के लिए सबसे बड़ा सहारा बन रही है। उन्होंने निर्देश दिए कि क्लेम का निस्तारण तय समयसीमा में किया जाए ताकि अस्पतालों को समय पर भुगतान मिल सके और मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिलती रहें। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 6480 अस्पताल आयुष्मान योजना से जुड़े हैं और अब तक 96.75 लाख से ज्यादा मरीजों का मुफ्त इलाज किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना में आयुष पद्धतियों को भी शामिल करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी जैसी पद्धतियों की आईपीडी सेवाएं भी योजना का हिस्सा बननी चाहिए।
सीएम योगी ने निर्देश दिए कि कोविड काल में सेवाएं देने वाले स्वास्थ्यकर्मियों का नेशनल हेल्थ मिशन के तहत प्राथमिकता के आधार पर समायोजन किया जाए। उन्होंने कहा कि आशा वर्करों का भुगतान किसी भी हालत में लंबित नहीं रहना चाहिए। इसके साथ ही हेल्थ एटीएम सेवाओं के विस्तार और संचारी रोग नियंत्रण अभियान को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने जनजागरूकता, स्वच्छता और समय पर उपचार को अभियान की सफलता का आधार बताया।
मुख्यमंत्री ने मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर को और कम करने के लिए सुरक्षित और संस्थागत प्रसव व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हर गर्भवती महिला तक समय पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधा पहुंचनी चाहिए। बैठक में जानकारी दी गई कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत 15.28 करोड़ से अधिक आभा आईडी बनाई जा चुकी हैं। वहीं 15.14 करोड़ से ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड लिंक किए जा चुके हैं। हॉस्पिटल इंफॉर्मेशन सिस्टम और लैब इंफॉर्मेशन सिस्टम का विस्तार भी तेजी से किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने चिकित्सा अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि मेडिकल संस्थानों को रिसर्च आधारित स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जाए। बैठक में बताया गया कि ‘UP-IMRAS’ डिजिटल पहल, मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट, क्लिनिकल ट्रायल यूनिट और मेडटेक कार्यक्रमों पर तेजी से काम हो रहा है। स्वास्थ्य अनुसंधान और मेडटेक सेक्टर में करीब 1500 करोड़ रुपये निवेश के प्रस्ताव भी दाखिल किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य संस्थानों का काम तय समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। आगामी परियोजनाओं में गोरखपुर मेडिकल कॉलेज का बहुमंजिला गर्ल्स हॉस्टल, अयोध्या मेडिकल कॉलेज का 110 बेड ट्रॉमा सेंटर, सहारनपुर मेडिकल कॉलेज का बीएससी नर्सिंग कॉलेज और कानपुर मेडिकल कॉलेज में मानसिक रोग विभाग एवं डी-एडिक्शन वार्ड विस्तार शामिल हैं। बैठक में यह भी बताया गया कि पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज खोलने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। महाराजगंज, शामली और संभल में मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं जबकि कई अन्य जिलों में प्रक्रिया जारी है।
बैठक में बताया गया कि 108 एम्बुलेंस और एडवांस लाइफ सपोर्ट सेवाओं की प्रतिक्रिया अवधि में लगातार सुधार हुआ है। प्रदेश में इस समय 375 एएलएस एम्बुलेंस संचालित हैं और अब तक 9.38 लाख मरीजों को रेफर किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने एम्बुलेंस रिस्पॉन्स टाइम और कम करने तथा संचालकों का भुगतान समय से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने अस्पतालों में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर सख्त निर्देश देते हुए कहा कि तीन महीने से कम एक्सपायरी वाली दवाएं अस्पतालों में नहीं होनी चाहिए। बैठक में बताया गया कि प्रदेश के 75 जिलों में डायलिसिस और 74 जिलों में सीटी स्कैन सेवाएं उपलब्ध हैं। मार्च 2026 तक 35.69 लाख डायलिसिस सत्र और 45.35 लाख सीटी स्कैन किए जा चुके हैं। 227 सीएचसी पर टेली-रेडियोलॉजी सेवाएं भी संचालित हैं।
Dr. Ram Manohar Lohia Institute of Medical Sciences में अब तक 376 से ज्यादा रोबोटिक सर्जरी और 250 से अधिक किडनी ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं। यहां प्रदेश का पहला गामा नाइफ सेंटर भी स्थापित किया जा रहा है। वहीं Sanjay Gandhi Postgraduate Institute of Medical Sciences में 500 बेड के एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर पर काम तेजी से चल रहा है।
मुख्यमंत्री ने टीबी उन्मूलन अभियान को जनआंदोलन का रूप देने पर जोर दिया। उन्होंने स्कूलों, कॉलेजों और स्वयंसेवी संस्थाओं को इस अभियान से जोड़ने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए उत्तर प्रदेश को केंद्र सरकार की ओर से सम्मानित किया गया है।
मुख्यमंत्री ने संविदा एमबीबीएस चिकित्सकों का मानदेय बढ़ाने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक, जवाबदेही और संवेदनशीलता तीनों एक साथ दिखाई देनी चाहिए, तभी जनता का भरोसा मजबूत होगा।
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