
लखनऊ। CM Yogi Adityanath के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में सड़क और कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर को लगातार मजबूत किया जा रहा है। एक्सप्रेस-वे और राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार के बाद अब राज्य सरकार प्रदेश में “नार्थ-साउथ कॉरिडोर” परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है। इस महत्वाकांक्षी योजना का मकसद नेपाल सीमा से लेकर दक्षिण भारत की ओर तक बेहतर सड़क संपर्क तैयार करना है, ताकि प्रदेश के आर्थिक, औद्योगिक और सामाजिक विकास को नई गति मिल सके।
हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में “नार्थ-साउथ कॉरिडोर” परियोजना को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना से औद्योगिक गतिविधियों, कृषि कारोबार और पर्यटन क्षेत्र को बड़ा फायदा मिलेगा।
सरकार का मानना है कि नेपाल सीमा से जुड़े जिलों में व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी और किसानों को अपने उत्पाद बड़े बाजारों तक पहुंचाने में आसानी होगी। इसके अलावा धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक यात्रा पहले की तुलना में ज्यादा सुगम हो जाएगी।
अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को जानकारी दी कि वर्तमान समय में प्रदेश के अधिकांश एक्सप्रेस-वे और राष्ट्रीय राजमार्ग पूर्व से पश्चिम दिशा में विकसित हैं। ऐसे में संतुलित विकास के लिए अब उत्तर से दक्षिण दिशा में मजबूत सड़क नेटवर्क तैयार करने की योजना बनाई जा रही है। इसके तहत नेपाल बॉर्डर से जुड़े जिलों को प्रयागराज, चित्रकूट और बुंदेलखंड के जरिए मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों से जोड़ने की रणनीति तैयार की गई है।
'नार्थ-साउथ कॉरिडोर' परियोजना के तहत कई अहम सड़कों के चौड़ीकरण, सुदृढ़ीकरण और नए निर्माण की कार्ययोजना तैयार की गई है। राज्य सरकार ने चार बड़े नार्थ-साउथ कॉरिडोर चिह्नित किए हैं, जिनकी कुल लंबाई करीब 1531 किलोमीटर बताई जा रही है। इनमें लगभग 1232.60 किलोमीटर हिस्सा पहले से एक्सप्रेस-वे या राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जुड़ा हुआ है, जबकि बाकी हिस्सों को विकसित किया जाएगा।
पहले कॉरिडोर में कुशीनगर, देवरिया, नोएडा, गाजीपुर और जमानिया को जोड़ने वाले मार्ग को शामिल किया गया है। इसकी कुल लंबाई करीब 220 किलोमीटर है। इसमें 53.25 किलोमीटर हिस्से को मंजूरी मिल चुकी है और लगभग 464 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है।
दूसरा बड़ा कॉरिडोर पीपरी (भारत-नेपाल सीमा) से बांसी और सिद्धार्थनगर होते हुए प्रयागराज तक प्रस्तावित किया गया है। इस मार्ग की कुल लंबाई करीब 295 किलोमीटर होगी। इस परियोजना के जरिए कई नए सड़क मार्ग विकसित किए जाएंगे, जिससे पूर्वांचल और मध्य उत्तर प्रदेश के बीच कनेक्टिविटी और मजबूत होगी। सरकार को उम्मीद है कि इससे व्यापार, परिवहन और पर्यटन गतिविधियों में तेजी आएगी।
तीसरे नार्थ-साउथ कॉरिडोर में लखीमपुर, सीतापुर, लखनऊ, नवाबगंज और बांदा को जोड़ने वाले 502 किलोमीटर लंबे मार्ग को शामिल किया गया है। इसके अलावा चौथे कॉरिडोर के तहत मुरादाबाद, शाहजहांपुर, उरई और हमीरपुर को जोड़ने वाली 514 किलोमीटर लंबी सड़क परियोजना पर काम किया जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि मजबूत अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर कनेक्टिविटी बेहद जरूरी है। यही वजह है कि राज्य सरकार एक्सप्रेस-वे, रिंग रोड, फ्लाईओवर, एयरपोर्ट और नई सड़क परियोजनाओं पर बड़े स्तर पर निवेश कर रही है।
पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे और गंगा एक्सप्रेस-वे जैसी परियोजनाएं पहले ही प्रदेश की कनेक्टिविटी को नई पहचान दे चुकी हैं। अब “नार्थ-साउथ कॉरिडोर” के जरिए दूरदराज के जिलों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की तैयारी की जा रही है।
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