
लखनऊ में लेखपाल मुख्य परीक्षा को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही अफवाहों पर अब सख्त कार्रवाई शुरू हो गई है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की शिकायत पर विभूतिखंड थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और इसे गंभीरता से लिया जा रहा है। आयोग का कहना है कि कुछ अराजक तत्वों ने परीक्षा को लेकर सोशल मीडिया पर भ्रामक और असत्य सूचनाएं फैलाकर अभ्यर्थियों को गुमराह करने की कोशिश की। आयोग ने साफ किया है कि परीक्षा पूरी निष्पक्षता, पारदर्शिता और शुचितापूर्ण तरीके से संपन्न कराई गई थी।
इस मामले की जांच अब तीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की निगरानी में कराई जाएगी। इसमें पूर्वी क्षेत्र के पुलिस उपायुक्त, अपर पुलिस उपायुक्त और सहायक पुलिस आयुक्त विभूतिखंड शामिल हैं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, सोशल मीडिया पर वायरल किए गए पोस्ट और संदेशों की जांच की जा रही है। यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि अफवाह फैलाने के पीछे कौन लोग शामिल थे और उनका उद्देश्य क्या था।
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आयोग के अनुसार, लेखपाल पद पर चयन के लिए आयोजित मुख्य परीक्षा प्रदेश के 44 जिलों में 861 परीक्षा केंद्रों पर कराई गई थी। परीक्षा को शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से कराने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए थे। आयोग ने अपने बयान में कहा कि परीक्षा प्रक्रिया के दौरान सभी मानकों का पालन किया गया और किसी भी तरह की अनियमितता नहीं होने दी गई। इसके बावजूद कुछ लोगों ने सोशल मीडिया के जरिए गलत सूचनाएं फैलाकर भ्रम का माहौल बनाने की कोशिश की।
आयोग का आरोप है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे पोस्ट शेयर किए गए, जिनका उद्देश्य अभ्यर्थियों के बीच भ्रम पैदा करना था। आयोग के मुताबिक, इससे न सिर्फ भर्ती प्रक्रिया की साख प्रभावित करने की कोशिश हुई, बल्कि सरकारी कार्य में भी बाधा डालने का प्रयास किया गया।
इससे पहले आयोग ने अभ्यर्थियों से अपील की थी कि वे किसी भी अपुष्ट सूचना या सोशल मीडिया पर वायरल हो रही अफवाहों पर भरोसा न करें। केवल आयोग की आधिकारिक वेबसाइट और आधिकारिक नोटिस को ही सही सूचना मानें। आयोग ने भरोसा दिलाया कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
हाल के वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर सोशल मीडिया पर फर्जी खबरें और भ्रामक दावे तेजी से वायरल होने लगे हैं। कभी पेपर लीक की अफवाह, तो कभी रिजल्ट या परीक्षा रद्द होने की झूठी जानकारी अभ्यर्थियों के बीच चिंता बढ़ा देती है। ऐसे मामलों में विशेषज्ञ लगातार सलाह देते रहे हैं कि छात्र सिर्फ आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी लें और किसी भी वायरल मैसेज को बिना पुष्टि शेयर न करें। लेखपाल मुख्य परीक्षा को लेकर दर्ज हुआ यह मुकदमा इसी दिशा में एक बड़ा संदेश माना जा रहा है कि परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश करने वालों पर अब सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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