
लखनऊ। कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के किसानों की आय में बड़ा सुधार हुआ है। उन्होंने बताया कि किसानों की औसत आय 52 हजार रुपये से बढ़कर करीब 1 लाख 20 हजार रुपये तक पहुंच गई है। वहीं उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव की सरकार के दौरान किसान परेशान थे और उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जाता था।
कृषि मंत्री ने कहा कि अखिलेश यादव के समय में गन्ना किसानों को भुगतान समय पर नहीं मिलता था। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय मिल मालिकों से सांठगांठ के कारण किसानों का भुगतान वर्षों तक अटका रहता था। कई मामलों में 34 महीने तक गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं हो पाता था।
उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार में गन्ना किसानों को 8 से 10 दिनों के भीतर भुगतान किया जा रहा है। आज देश के कुल गन्ना उत्पादन में उत्तर प्रदेश का योगदान लगभग 55 प्रतिशत है, जो राज्य की कृषि प्रगति को दर्शाता है।
कृषि मंत्री के अनुसार, पहले गन्ना मूल्य 300 रुपये प्रति क्विंटल मिलता था और वह भी किस्तों में दिया जाता था। अब योगी सरकार ने इसे बढ़ाकर 400 रुपये प्रति क्विंटल तक कर दिया है। साथ ही किसानों को 3 लाख 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक का रिकॉर्ड भुगतान किया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने 16 लाख से अधिक किसानों के बिजली बिल माफ किए हैं। इसके अलावा सिंचाई के लिए नलकूप और सोलर पैनल की सुविधा दी जा रही है। वर्षों से लंबित सरयू परियोजना को भी पूरा किया गया, जिससे करीब 14 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा बढ़ी है।
कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद कर रही है, जिससे किसानों को उनकी फसलों का उचित दाम मिल रहा है। उत्तर प्रदेश में कृषि उत्पादन भी लगातार बढ़ रहा है—करीब 425 लाख मीट्रिक टन गेहूं, 211 लाख मीट्रिक टन चावल और 245 लाख मीट्रिक टन आलू का उत्पादन हो रहा है। तिलहन में 48 लाख मीट्रिक टन का रिकॉर्ड उत्पादन दर्ज किया गया है।
उन्होंने कहा कि गन्ने से एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा दिया गया है, जिससे चीनी मिलें आर्थिक रूप से मजबूत हुई हैं और किसानों का भुगतान आसान हो गया है।
कृषि मंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार की नीतियों के कारण किसानों का भरोसा बढ़ा है और प्रदेश कृषि क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्व सरकार के दौरान विकास कार्यों पर ध्यान नहीं दिया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश सरकार के दौरान बिजली आपूर्ति असमान थी। कुछ जिलों में 24 घंटे बिजली मिलती थी, जबकि अन्य क्षेत्रों में कटौती रहती थी। साथ ही उस समय बिजली दरों में लगभग 60 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई थी।
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