
उत्तर प्रदेश के वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने जनपद अलीगढ़ स्थित शेखा पक्षी विहार को प्रदेश का 12वां रामसर स्थल घोषित किए जाने पर खुशी जताई है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त किया और प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि नए रामसर स्थलों की घोषणा से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
आर्द्रभूमियों (Wetlands) का संरक्षण जैव विविधता, जल संसाधनों और पर्यावरण संतुलन के लिए बेहद जरूरी है। इन्हीं उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों की पहचान और संरक्षण के लिए रामसर अभिसमय के तहत प्रयास किए जाते हैं। यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाती है।
राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण द्वारा शासन की अनुमति के बाद महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों की पहचान कर उनकी Ramsar Information Sheet (RIS) तैयार की गई। इसी प्रक्रिया के तहत रामसर सचिवालय ने 21 अप्रैल 2026 को शेखा पक्षी विहार को रामसर साइट के रूप में अधिसूचित किया। इस घोषणा के साथ ही देश में कुल 99 रामसर स्थल हो गए हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश 12 स्थलों के साथ दूसरे स्थान पर पहुंच गया है।
गौरतलब है कि फरवरी 2026 में एटा जिले के पटना पक्षी विहार को भी रामसर साइट घोषित किया गया था। इस तरह केवल दो महीनों में उत्तर प्रदेश को दो नए रामसर स्थल मिले हैं, जो राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
उत्तर प्रदेश के प्रमुख रामसर स्थलों में अपर गंगा रिवर (हापुड़, बुलंदशहर, संभल, अमरोहा), नवाबगंज पक्षी विहार (उन्नाव), सरसई नावर झील (इटावा), समसपुर पक्षी विहार (रायबरेली), सांडी पक्षी विहार (हरदोई), समान पक्षी विहार (मैनपुरी), पार्वती अरगा पक्षी विहार (गोंडा), सूर सरोवर (आगरा), हैदरपुर आर्द्रभूमि (मुजफ्फरनगर), बखीरा पक्षी विहार (संत कबीर नगर), पटना पक्षी विहार (एटा) और अब शेखा पक्षी विहार (अलीगढ़) शामिल हैं। इन सभी रामसर स्थलों का कुल क्षेत्रफल 39,914.27 हेक्टेयर है, जो प्रदेश के कुल आर्द्रभूमि क्षेत्रफल (12,42,530 हेक्टेयर) का लगभग 3.21 प्रतिशत है।
रामसर अभिसमय एक अंतरराष्ट्रीय संधि है, जिसकी शुरुआत 1971 में ईरान के रामसर शहर में हुई थी। इसका उद्देश्य दुनिया भर की महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों की पहचान करना और उन्हें संरक्षित करना है। इसके तहत नामित क्षेत्रों को रामसर साइट कहा जाता है, जहां संरक्षण और सतत उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
राज्य सरकार की यह पहल जैव विविधता के संरक्षण को मजबूत करेगी। इसके साथ ही प्रवासी पक्षियों के संरक्षण, जल सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, पर्यटन बढ़ने से स्थानीय समुदायों की आय में वृद्धि होगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। सरकार आर्द्रभूमियों के बेहतर प्रबंधन और संरक्षण के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
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