
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस वर्ष एक ही दिन में 35 करोड़ पौधे लगाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में जनभागीदारी से प्रदेश ने वृक्षारोपण में बड़ी सफलता हासिल की है और अब इसे जनआंदोलन के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा।
रविवार को वृहद पौधरोपण अभियान-2026 की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत हर आंगनबाड़ी केंद्र में कम से कम 5 सहजन के पौधे लगाने और स्कूल-कॉलेजों में प्रत्येक छात्र द्वारा एक पौधा लगाने का आह्वान किया। साथ ही गंगा एक्सप्रेस-वे के दोनों किनारों पर बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि इसे केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि निरंतर चलने वाला जन-अभियान बनाया जाए।
बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश में वृक्षारोपण के क्षेत्र में लगातार प्रगति हुई है। वर्ष 2009 से 2016 के बीच जहां 51.48 करोड़ पौधे लगाए गए थे, वहीं 2017 से 2025 के बीच यह संख्या बढ़कर 242.13 करोड़ हो गई। इसी अवधि में प्रदेश के वन एवं वृक्ष आवरण में 3 लाख 38 हजार एकड़ की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है और हरित आवरण लगभग 9.96 प्रतिशत तक पहुंच गया है। कार्बन स्टॉक में वृद्धि भी राष्ट्रीय औसत 1.13 प्रतिशत से अधिक 2.46 प्रतिशत दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री ने लक्ष्य रखा कि वर्ष 2030 तक 15 प्रतिशत और 2047 तक 20 प्रतिशत हरित आवरण हासिल किया जाए।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि वर्ष 2026 का वृक्षारोपण अभियान पूरी तरह वैज्ञानिक, योजनाबद्ध और परिणाम आधारित होना चाहिए। उन्होंने माइक्रो प्लानिंग को अभियान की नींव बताते हुए ग्रामीण और शहरी स्तर पर तैयार योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया।
पौधों की गुणवत्ता और उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए सभी विभागों को वन विभाग की नर्सरियों से मुफ्त और उच्च गुणवत्ता वाले पौधे उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। प्रदेश में 1935 विभागीय नर्सरियां संचालित हैं और 50 करोड़ से अधिक पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। इसके लिए 34 नई नर्सरियों की स्थापना भी की गई है। इसके अलावा उद्यान, रेशम और निजी क्षेत्र की नर्सरियों को भी इस अभियान से जोड़ा गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वृक्षारोपण के साथ पौधों की सुरक्षा और उनकी जीवितता सुनिश्चित करना सबसे जरूरी है। इसके लिए आधुनिक तकनीक के उपयोग के निर्देश दिए गए हैं। ‘हरीतिमा’ ऐप, GIS मैपिंग, QR कोड ट्रैकिंग, प्लांटेशन मॉनिटरिंग सिस्टम (PMS) और नर्सरी मैनेजमेंट सिस्टम (NMS) के माध्यम से पौधरोपण की निगरानी की जा रही है। वर्ष 2025 के सर्वे में लगाए गए पौधों की जीवितता दर 80 प्रतिशत दर्ज की गई।
मुख्यमंत्री ने शहीदों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम पर वन और वाटिका विकसित करने पर जोर दिया। नदियों और हाईवे किनारे भी बड़े पैमाने पर पौधरोपण के निर्देश दिए गए। इस वर्ष अयोध्या में रामायणकालीन पौधे लगाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को निर्देश दिया कि 30 मई तक अपनी विस्तृत कार्ययोजना तैयार करें और तय समय के अनुसार वृक्षारोपण अभियान पूरा करें। उन्होंने कहा कि इस अभियान की सफलता के लिए जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।
बैठक के दौरान वन एवं पर्यावरण विभाग ने मुख्यमंत्री को शेखा झील पक्षी विहार को रामसर साइट घोषित किए जाने का प्रमाण पत्र सौंपा। प्रदेश में अब कुल 12 रामसर स्थल हैं, जो 38,992.25 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले हुए हैं। शेखा झील 40.309 हेक्टेयर क्षेत्रफल के साथ प्रदेश का सबसे छोटा रामसर स्थल है, जिसे 2016 में पक्षी विहार घोषित किया गया था।
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