
लखनऊ। योगी आदित्यनाथ सरकार में महिला और बाल सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता पर है। महिला कल्याण विभाग के अंतर्गत प्रदेशभर के बाल गृहों और महिला शरणालयों की 24×7 निगरानी के लिए स्टेट डेटा मैनेजमेंट सेंटर (SDMC) को और अधिक प्रभावी व तकनीक-सक्षम बनाया गया है। यह पहल केवल निगरानी तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, गरिमा, देखरेख और अधिकारों की रक्षा की दिशा में सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को जमीन पर उतारने का मजबूत कदम है।
लखनऊ के महिला कल्याण निगम, बंगला बाजार स्थित भवन में अप्रैल 2025 से एसडीएमसी निरंतर कार्यरत है। यह सेंटर पूरे प्रदेश में संचालित संस्थाओं की चौबीसों घंटे निगरानी कर रहा है। तकनीक के माध्यम से पारदर्शिता और जवाबदेही को महिला एवं बाल संरक्षण व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनाया गया है।
प्रदेश में महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित 60 बाल गृह और 10 महिला शरणालय, यानी कुल 70 संस्थाओं में सीसीटीवी कैमरे लगाए जा चुके हैं। इन कैमरों से न केवल गतिविधियों की निगरानी की जा रही है, बल्कि व्यवस्थाओं की गुणवत्ता, अनुशासन और सुरक्षा मानकों का भी निरंतर मूल्यांकन हो रहा है।
निगरानी को और मजबूत बनाने के लिए मंडल और जिला स्तर पर भी मॉनिटरिंग डिस्प्ले लगाए गए हैं। प्रदेश के 17 मंडलों में से 15 मंडलीय कार्यालयों और 31 जनपदों में से 28 जनपदीय कार्यालयों में यह व्यवस्था शुरू हो चुकी है। शेष चित्रकूट और अयोध्या मंडल, तथा चित्रकूट, अयोध्या और सहारनपुर जनपद में यह कार्य प्रक्रियाधीन है, जिसे एक सप्ताह के भीतर पूरा किया जाएगा। इससे मंडल और जिला स्तर के अधिकारी भी संस्थाओं की स्थिति का प्रत्यक्ष और त्वरित अवलोकन कर सकेंगे।
मुख्यालय स्थित एसडीएमसी अत्याधुनिक तकनीकी सुविधाओं से लैस है। यहां 6 प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती की गई है, जो तीन शिफ्टों में 24×7 काम करते हैं। इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी भी समय निगरानी व्यवस्था बाधित न हो।
एसडीएमसी द्वारा नियमित रूप से निम्न बिंदुओं पर निगरानी की जा रही है-
यदि एसडीएमसी की निगरानी में किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनियमितता या मानकों के उल्लंघन की स्थिति सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों को तत्काल सूचना दी जाती है। इससे समय पर सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित होती है और जिम्मेदारी तय की जाती है।
महिला कल्याण विभाग की यह पहल उत्तर प्रदेश को महिला और बाल संरक्षण के क्षेत्र में एक नई पहचान दे रही है। तकनीक, संवेदनशीलता और सख्त निगरानी पर आधारित यह मॉडल न केवल सुरक्षा को मजबूत करता है, बल्कि यह स्पष्ट संदेश भी देता है कि प्रदेश में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। यह व्यवस्था भविष्य में सुशासन और मानवीय प्रशासन की मजबूत मिसाल बनने की पूरी क्षमता रखती है।
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