
लखनऊ। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार के 9 वर्षों का कार्यकाल महिला सशक्तीकरण के व्यापक और प्रभावशाली उदाहरण के रूप में सामने आया है। सुरक्षा, सम्मान, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता—इन चार स्तंभों पर आधारित नीतियों ने महिलाओं को विकास की मुख्यधारा में लाकर खड़ा किया है। मिशन शक्ति, स्वयं सहायता समूहों और महिला उद्यमिता से जुड़ी योजनाओं के जरिए महिलाएं अब 'लाभार्थी' से 'लीडर' की भूमिका में आ गई हैं।
उत्तर प्रदेश में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी में बड़ी बढ़ोतरी हुई है। State Rural Livelihood Mission के तहत 9.43 लाख स्वयं सहायता समूहों से 1.06 करोड़ से अधिक महिलाओं को जोड़ा गया है। ये महिलाएं अब गांव-गांव में आर्थिक गतिविधियों की मुख्य शक्ति बन रही हैं। वहीं, लखपति दीदी योजना के तहत 35 लाख महिलाओं की पहचान की गई, जिनमें से 18.55 लाख महिलाएं लखपति बन चुकी हैं। यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़े बदलाव का संकेत है।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई गई है। 2,682 उचित मूल्य की दुकानों का संचालन स्वयं सहायता समूहों को दिया गया है। इन समूहों की महिलाएं अब राशन वितरण का काम संभाल रही हैं। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि महिलाओं की आय में भी सुधार हुआ है।
वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में BC सखी मॉडल ने नई पहचान बनाई है। इन महिलाओं ने ग्रामीण क्षेत्रों में अब तक 45,000 करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन किया है और लगभग 120 करोड़ रुपये का कमीशन कमाया है। यह आंकड़ा जल्द ही 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। प्रयागराज, बरेली और शाहजहांपुर जैसे जिले इस मॉडल में अग्रणी बनकर उभरे हैं।
महिलाओं ने दुग्ध व्यवसाय में भी बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। प्रदेश की 3.5 लाख से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से डेयरी से जुड़कर आत्मनिर्भर बनी हैं। इससे न केवल उनकी आय बढ़ी है, बल्कि सामाजिक स्थिति में भी सुधार हुआ है।
सरकार ने महिलाओं और बच्चों के लिए कई योजनाएं लागू की हैं, जिससे सामाजिक सुरक्षा को मजबूत किया गया है।
Mission Vatsalya के तहत एक लाख से अधिक बच्चों को उनके परिवारों से जोड़कर सामाजिक पुनर्वास सुनिश्चित किया गया है। वहीं मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत 5.20 लाख से अधिक बेटियों के विवाह कराए गए, जिससे गरीब परिवारों को आर्थिक राहत मिली।
योगी सरकार के प्रयासों का असर अब जमीनी स्तर पर साफ दिखाई दे रहा है। महिला सशक्तीकरण अब केवल एक योजना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक आंदोलन बन चुका है। सुरक्षा से लेकर स्वरोजगार तक, हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिली है। पिछले नौ वर्षों में नीतियों, तकनीक और प्रभावी क्रियान्वयन ने महिलाओं के जीवन को आसान बनाया है। आज नारी शक्ति ही उत्तर प्रदेश के “नव निर्माण” की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है और यही विकसित राज्य की मजबूत नींव है।
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