
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश निर्यात के क्षेत्र में लगातार तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार की उद्योग और निर्यात प्रोत्साहन नीतियों के कारण प्रदेश का निर्यात दोगुना हुआ है और वैश्विक बाजार में ‘मेड इन यूपी’ की मजबूत पहचान बनी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अप्रैल से नवंबर तक उत्तर प्रदेश का कुल निर्यात ₹1,31,328 करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के ₹1,18,223.91 करोड़ की तुलना में 11.08 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।
अगर पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2016-17 में प्रदेश का निर्यात करीब ₹86 हजार करोड़ था, जो बढ़कर 2024-25 में ₹1.86 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। मौजूदा रफ्तार को देखते हुए 2025-26 में इस रिकॉर्ड को भी पार करने की उम्मीद जताई जा रही है।
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार की दूरदर्शी नीतियों, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश के अनुकूल माहौल और निर्यातकों को दी जा रही सुविधाओं ने राज्य को नई पहचान दी है। प्रदेश ‘लोकल टू ग्लोबल’ की सोच पर तेजी से काम कर रहा है, जिससे यहां के उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी अलग जगह बना रहे हैं।
आईटी और आईटीईएस सेक्टर में भी उत्तर प्रदेश ने बड़ी प्रगति की है। वर्ष 2015 में जहां यह निर्यात ₹15 हजार करोड़ था, वहीं 2024-25 में बढ़कर ₹82 हजार करोड़ से अधिक हो गया है। यह वृद्धि सेवा क्षेत्र में निवेश और बेहतर नीतियों का परिणाम है।
प्रदेश सरकार ‘लोकल टू ग्लोबल’ अभियान के तहत स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दे रही है। अब तक उत्तर प्रदेश के 77 उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है, जबकि 152 अन्य उत्पाद इस प्रक्रिया में हैं। इससे पारंपरिक उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान और बेहतर मूल्य मिल रहा है।
निर्यात को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत किया गया है। लखनऊ और ग्रेटर नोएडा में बने आधुनिक एक्सपो मार्ट निर्यातकों को वैश्विक बाजार से जोड़ रहे हैं। ये केंद्र अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए उत्तर प्रदेश को एक प्रमुख ट्रेड हब के रूप में स्थापित कर रहे हैं।
भदोही में विकसित ‘भदोही कार्पेट बाजार (एक्सपो मार्ट)’ कालीन उद्योग के लिए एक बड़ा मंच बनकर उभरा है। यह पहल स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को वैश्विक बाजार से जोड़ रही है और उत्तर प्रदेश के हस्तशिल्प को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिला रही है।
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