
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पेपर लीक से जुड़े मामलों के जल्द निपटारे के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने के फैसले का स्वागत किया है। मुख्यमंत्री धामी ने इसे छात्रों के हित में उठाया गया ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम बताया। उनका कहना है कि इस फैसले से पेपर लीक जैसे संगठित अपराधों पर प्रभावी रोक लगेगी। साथ ही, दोषियों को समय पर कड़ी सजा मिलने का रास्ता साफ होगा और भर्ती व प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता भी मजबूत होगी।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि लाखों छात्र वर्षों तक मेहनत करके प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में पेपर लीक जैसी घटनाएं उनके सपनों और भविष्य पर सीधा असर डालती हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनने से ऐसे मामलों का तेजी से फैसला होगा। इससे छात्रों का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा और मजबूत होगा तथा उनकी मेहनत के साथ किसी तरह का अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संदेश का भी समर्थन किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। धामी ने उत्तराखंड की जनता की ओर से प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह फैसला देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में बड़ा कदम है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर जानकारी देते हुए कहा था कि देश के युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक के मामलों में शामिल लोगों को जल्द और कड़ी सजा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने का फैसला किया गया है। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को सभी जरूरी प्रक्रियाएं शुरू करने के निर्देश भी दिए जा चुके हैं। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि छात्रों के हितों की रक्षा के लिए सरकार लगातार ठोस कदम उठा रही है और जो लोग युवाओं का भविष्य खराब करने की कोशिश करेंगे, उन्हें किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।
इधर, विजयवाड़ा में CPI(M) नेता चिगुरुपति बाबू राव ने NEET परीक्षा विवाद को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से नहीं ले रही है। राव ने सवाल उठाया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अब तक इस्तीफा क्यों नहीं दिया। उनका कहना था कि सरकार आंदोलन कर रहे छात्रों से संवाद करने के बजाय उनकी आवाज को नजरअंदाज कर रही है।
CPI(M) नेता ने दावा किया कि सरकार ने अब तक इस पूरे विवाद के समाधान के लिए ईमानदार प्रयास नहीं किए हैं। उनके मुताबिक, सरकार छात्रों की समस्याओं से ज्यादा सत्ता में बने रहने पर ध्यान दे रही है। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि शिक्षा मंत्री परीक्षाओं के निष्पक्ष और सुचारु आयोजन को सुनिश्चित करने में विफल रहे हैं।
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