
काशीपुर। भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) काशीपुर ने 5 सितंबर 2026 को अपने प्रमुख सेक्टर कॉन्क्लेव ‘नवयुग 2026: रीइन्वेंटिंग BFSI’ का आयोजन किया। बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा यानी BFSI सेक्टर से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों, रिस्क स्ट्रैटेजिस्ट, HR प्रमुखों और मैनेजमेंट एक्सपर्ट्स ने इसमें हिस्सा लिया।
कॉन्क्लेव में BFSI सेक्टर में तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों के साथ संगठनों में आ रहे बदलावों पर विस्तार से चर्चा हुई। खासतौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल, भविष्य की प्रतिभा रणनीति और जोखिम प्रबंधन जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहे।
‘नवयुग 2026’ में दो बड़े रणनीतिक मुद्दों को प्रमुखता दी गई। पहला था स्किल-बेस्ड और AI-सक्षम वर्कफोर्स तैयार करना, जबकि दूसरा एंटरप्राइज स्तर पर AI को इस तरह लागू करना था कि मानवीय विवेक और मजबूत रिस्क गवर्नेंस की भूमिका कमजोर न हो।
कॉन्क्लेव की शुरुआत ‘द फाइनेंशियल प्रोफेशनल रीइमेजिन्ड’ विषय पर सत्र के साथ हुई। इसमें ऑटोमेशन और तकनीकी बदलावों के बीच नेतृत्व, HR रणनीति और संगठनात्मक संस्कृति में हो रहे बदलावों पर चर्चा की गई। सत्र का संचालन IIM काशीपुर के एसोसिएट प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस (स्ट्रैटेजी) डॉ. गुरवीर सिंह जसवाल ने किया।
विशेषज्ञों ने माना कि AI वित्तीय क्षेत्र में विश्लेषण से जुड़े काम को काफी तेज कर रहा है। उदाहरण के तौर पर, करीब आठ घंटे में होने वाले डेटा एनालिसिस जैसे काम को AI लगभग 15 मिनट में पूरा कर सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इंसानी भूमिका खत्म हो जाएगी। विशेषज्ञों के मुताबिक व्यक्तिगत विश्लेषण क्षमता, आलोचनात्मक सोच, निर्णय लेने का विवेक और मानवीय निगरानी वित्तीय फैसलों में आगे भी बेहद जरूरी रहेंगे।
कॉन्क्लेव में HR और क्षमता विकास से जुड़े विशेषज्ञों ने BFSI सेक्टर में बदलती भर्ती रणनीति पर भी बात की। एक्सिस बैंक, आनंद राठी वेल्थ, क्रेडिट सेज़न, एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस और RBL बैंक के विशेषज्ञों ने बताया कि कंपनियां अब सिर्फ पारंपरिक डिग्री आधारित नियुक्तियों से आगे बढ़कर स्किल-बेस्ड टैलेंट मॉडल की तरफ जा रही हैं। ट्रेजरी, एक्चुरियल और अंडरराइटिंग जैसे क्षेत्रों की विशेषज्ञता के साथ अब क्रिटिकल थिंकिंग, टीम के साथ काम करने की क्षमता, सहयोग और रिलेशनशिप मैनेजमेंट जैसी स्किल्स को भी काफी महत्व दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना था कि जब AI की मदद से नौकरी के आवेदन और भर्ती प्रक्रिया तेजी से बदल रही है, तब भविष्य में ऐसी मानवीय क्षमताओं की मांग बढ़ेगी जिन्हें मशीन आसानी से दोहरा नहीं सकती। इनमें मौलिक सोच, भरोसा कायम करना, प्रामाणिकता और वास्तविक संबंध बनाना प्रमुख हैं।
कॉन्क्लेव के दूसरे सत्र ‘द इंटेलिजेंट फाइनेंशियल एंटरप्राइज’ में संस्थागत बदलाव, कॉरपोरेट रणनीति, क्रेडिट रिस्क और डिजिटल स्केलेबिलिटी जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। इस सत्र का संचालन एक्सिस बैंक के लीड प्रोडक्ट मैनेजर (कॉरपोरेट सर्विसिंग) विजय चंदोला ने किया। लेंडिंगकार्ट, एको इंश्योरेंस, बजाज फिनसर्व, अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट और DBS बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों ने सत्र में अपने विचार रखे।
वक्ताओं ने AI मॉडल और डेटा सेट के एक जैसे होने पर अत्यधिक निर्भरता के खतरे को भी सामने रखा। उनका कहना था कि अगर AI सिस्टम ऐतिहासिक डेटा और पुराने पैटर्न पर जरूरत से ज्यादा निर्भर करते हैं, तो पुराने पूर्वाग्रह आगे भी दोहराए जा सकते हैं। इसका असर वित्तीय समावेशन पर भी पड़ सकता है।
कॉन्क्लेव में यह बात भी सामने आई कि अगले दो से तीन वर्षों में AI वित्तीय संस्थानों की परिचालन लागत कम करने और राजस्व बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। हालांकि, मौजूदा समय में कंपनियों के सामने एक बड़ी चुनौती बड़ी मात्रा में मौजूद Unstructured Data को उपयोगी और व्यवस्थित जानकारी में बदलने की है। वित्तीय संस्थानों के लिए यह सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि रणनीतिक चुनौती भी बन चुकी है।
विशेषज्ञों ने इस चुनौती से निपटने के लिए हाइब्रिड ऑपरेटिंग मॉडल अपनाने की सलाह दी। इसके तहत नियमित और दोहराए जाने वाले कामों के लिए AI और Large Language Models (LLMs) का इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं, जोखिम से जुड़े अंतिम फैसले, मंजूरी और फ्रॉड प्रिवेंशन जैसे संवेदनशील मामलों में इंसानी निर्णय क्षमता को केंद्रीय भूमिका में रखने पर जोर दिया गया। यानी AI को इंसान के विकल्प के बजाय उसके सहयोगी के तौर पर इस्तेमाल करने की जरूरत बताई गई।
IIM काशीपुर के एसोसिएट प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस (स्ट्रैटेजी) डॉ. गुरवीर सिंह जसवाल ने कहा कि बड़ी टेक कंपनियां AI इंफ्रास्ट्रक्चर में अरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं, लेकिन AI बुनियादी प्रबंधन सिद्धांतों की जगह नहीं ले सकता। उन्होंने कहा कि लोगों को AI के साथ काम करना, उसके जवाबों पर सवाल उठाना और उसका सही इस्तेमाल सीखना होगा।
एक्सिस बैंक के रीजनल हेड (ट्रेजरी) अनुज सहाय ने कहा कि संवेदनशील और अनुपालन आधारित कारोबार में AI ने आठ घंटे के विश्लेषण वाले काम को 15 मिनट तक सीमित करने की क्षमता दिखाई है। हालांकि, उनके मुताबिक निर्णय लेने से पहले अपनी विश्लेषण क्षमता का इस्तेमाल करना और AI के निष्कर्षों पर सवाल करना जरूरी है।
आनंद राठी वेल्थ लिमिटेड के असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट (HR) नवीन आर. गंगारमानी ने कहा कि AI खुद किसी व्यक्ति की जगह नहीं ले सकता, लेकिन AI को सीखने और अपनाने के लिए तैयार नहीं रहने वाला व्यक्ति प्रतिस्थापित हो सकता है।
बजाज फिनसर्व के वाइस प्रेसिडेंट (कॉरपोरेट स्ट्रैटेजी) निखिल जैन ने कहा कि रिस्क से जुड़े मामलों में अंतिम निर्णय की जिम्मेदारी इंसान के पास ही रहेगी। उनके अनुसार AI लागत कम करने और राजस्व बढ़ाने में मदद कर सकता है, लेकिन असंरचित डेटा को उपयोगी जानकारी में बदलना अभी बड़ी चुनौती है।
कॉन्क्लेव के अंत में छात्रों और शोधार्थियों के लिए इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया। इसमें उन्हें BFSI सेक्टर के वरिष्ठ अधिकारियों से सीधे सवाल करने और उद्योग में आ रहे बदलावों को समझने का मौका मिला। कार्यक्रम में एक्सिस बैंक, आनंद राठी वेल्थ, क्रेडिट सेज़न, एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस, RBL बैंक, लेंडिंगकार्ट, एको इंश्योरेंस, बजाज फिनसर्व, अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट और DBS बैंक के प्रतिनिधियों की भागीदारी रही। कॉन्क्लेव ने IIM काशीपुर और BFSI इंडस्ट्री के बीच मजबूत होते संबंधों को भी सामने रखा। साथ ही यह दिखाया कि संस्थान अकादमिक शिक्षा और वास्तविक उद्योग जरूरतों के बीच एक प्रभावी कड़ी के रूप में काम कर रहा है।
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