
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘विकसित उत्तराखण्ड-यात्रा जारी है’ संवाद कार्यक्रम में प्रदेश के उद्यमियों, किसानों, नवाचारकर्ताओं और स्वरोजगार से जुड़े लोगों से बातचीत की। इस दौरान किसी ने सौर ऊर्जा से चलने वाली कार बनाने की जानकारी दी, तो किसी ने एक गाय से डेयरी कारोबार शुरू कर उसे आगे बढ़ाया। वहीं, कुछ लोग हर्बल उत्पादों, मशरूम उत्पादन और स्टार्टअप के जरिए रोजगार के नए अवसर तैयार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने सभी के अनुभव सुने और उनके काम की सराहना की।
कार्यक्रम में सीएम धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में उत्तराखंड भी लगातार आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार प्रदेश के हर क्षेत्र में विकास को गति देने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि युवाओं की प्रतिभा, नए विचार और स्वरोजगार के प्रयास राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित इस कार्यक्रम का आयोजन नियोजन विभाग और देवभूमि डायलॉग ने संयुक्त रूप से किया। इसमें प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए उद्यमियों, प्रगतिशील किसानों और नवाचार करने वाले लोगों ने अपने काम, उपलब्धियों और चुनौतियों के बारे में बताया। मुख्यमंत्री ने उनके सुझाव भी सुने।
सीएम धामी ने कहा कि उत्तराखंड के गठन के समय पर्यटन और ऊर्जा को राज्य के विकास के प्रमुख आधार के रूप में देखा गया था। आज पर्यटन के क्षेत्र में प्रदेश ने काफी प्रगति की है, लेकिन इस क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाएं अभी भी बहुत अधिक हैं। स्थानीय स्तर पर पर्यटन से जुड़े व्यवसाय युवाओं और ग्रामीण परिवारों के लिए आय के नए रास्ते खोल सकते हैं।
ऊर्जा क्षेत्र का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में राज्य ने इस दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। कई ऊर्जा परियोजनाओं पर काम चल रहा है। जलविद्युत उत्पादन की संभावनाओं का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में स्टार्टअप और उद्यमिता को बढ़ावा देने के प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। पिछले पांच वर्षों में उत्तराखंड में स्टार्टअप की संख्या करीब 700 से बढ़कर 1700 से अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि राज्य के युवाओं में प्रतिभा और क्षमता की कोई कमी नहीं है। युवा कृषि, तकनीक, उद्योग और दूसरे क्षेत्रों में नए प्रयोग कर रहे हैं। इनमें से कई लोग अपने काम के जरिए पहचान बनाने के साथ दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर रहे हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक, स्वरोजगार को बढ़ावा देना स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का एक अहम तरीका है। सरकार इसी दिशा में लगातार प्रयास कर रही है, ताकि प्रदेश के लोग अपने क्षेत्र में ही कारोबार शुरू कर सकें और रोजगार के नए अवसर तैयार हों।
संवाद कार्यक्रम में उत्तरकाशी के जयप्रकाश ने अपनी डेयरी व्यवसाय की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि उन्होंने एक गाय से अपना काम शुरू किया था। राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेकर उन्होंने अपने कारोबार को आगे बढ़ाया। अब उनके पास पांच बद्री गाय और आठ देशी गाय हैं। चम्पावत के राहुल नरियाल ने मुख्यमंत्री को बताया कि उन्होंने सौर ऊर्जा और बैटरी से चलने वाली कार तैयार की है। उनका यह प्रयोग स्थानीय स्तर पर नवाचार की संभावनाओं को सामने लाता है।
पौड़ी जिले के नवीन पटवाल ने गुच्छी मशरूम के व्यावसायिक उत्पादन में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस काम से दूसरे लोगों को भी रोजगार मिल रहा है। इस तरह खेती और उससे जुड़े नए व्यवसाय ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के विकल्प तैयार कर रहे हैं।
ऊधमसिंह नगर के विकास कुमार शाह ने बताया कि वह अपनी पत्नी के साथ स्टार्टअप के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उनके कारोबार का टर्नओवर 10 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। उनकी कहानी कार्यक्रम में शामिल उन उदाहरणों में रही, जिनमें स्थानीय स्तर से शुरू हुआ प्रयास बड़े कारोबार का रूप ले चुका है।
चमोली जिले के राजेश ने गांव लौटकर रिवर्स पलायन की मिसाल पेश की है। वह रोजमेरी और दूसरे हर्बल उत्पादों के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार भी उपलब्ध करा रहे हैं। उनका प्रयास बताता है कि गांव लौटकर भी स्थानीय संसाधनों के आधार पर व्यवसाय खड़ा किया जा सकता है।
नैनीताल की कमला देवी ने बताया कि वह वाहनों के टायरों की मरम्मत का काम करती हैं और इससे अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। कार्यक्रम में उनकी भागीदारी ने यह भी दिखाया कि स्वरोजगार के लिए केवल बड़े निवेश या आधुनिक स्टार्टअप की ही जरूरत नहीं होती। पारंपरिक सेवाओं से जुड़े काम भी आय का अच्छा साधन बन सकते हैं।
चमोली जिले के डॉ. हरपाल नेगी ने औषधीय वनस्पतियों के उत्पादन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि घेस क्षेत्र में कुटकी जैसी औषधीय वनस्पतियों की खेती के लिए स्थानीय लोगों को प्रोत्साहित किया गया है। डॉ. नेगी के अनुसार, वर्तमान में 300 से अधिक लोग इस काम से जुड़े हैं। सभी मिलकर सालाना करीब डेढ़ से दो करोड़ रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। औषधीय पौधों का उत्पादन स्थानीय संसाधनों के इस्तेमाल और ग्रामीण आय बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर सामने आया है।
कार्यक्रम में चम्पावत जिले के टनकपुर मूल निवासी शैलेश सिंगापुर से वर्चुअल माध्यम से जुड़े। उन्होंने बताया कि वह सिंगापुर में सीवरेज जल शोधन के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने चम्पावत के एक गांव को गोद लेकर उसके विकास में सहयोग देने की इच्छा भी जताई।
वहीं, सोमेश्वर के ललित खाती ने एकीकृत कृषि प्रणाली के जरिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस पद्धति के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर तैयार करने के प्रयास किए जा रहे हैं। एकीकृत कृषि प्रणाली में खेती के साथ कृषि से जुड़े दूसरे कार्यों को भी जोड़ा जा सकता है। इससे किसानों को आय के अलग-अलग स्रोत विकसित करने में मदद मिल सकती है।
कार्यक्रम में वर्चुअल माध्यम से जुड़ीं अनीता शर्मा थपलियाल ने ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों के लिए समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने देहरादून में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए अपने प्रयासों को आगे बढ़ाने की बात कही। ‘विकसित उत्तराखण्ड–यात्रा जारी है’ संवाद कार्यक्रम में सामने आई इन कहानियों में खेती, तकनीक, ऊर्जा, डेयरी, हर्बल उत्पाद, स्टार्टअप और समावेशी शिक्षा जैसे अलग-अलग क्षेत्र शामिल रहे। मुख्यमंत्री ने प्रतिभागियों के अनुभवों और सुझावों को सुना तथा उनके काम की सराहना की। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रदेश में हो रहे प्रयासों और उपलब्धियों को सामने लाना तथा विकसित उत्तराखंड के लक्ष्य की दिशा में काम कर रहे लोगों के अनुभव साझा करना रहा।
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