उत्तराखण्ड में नर्सिंग शिक्षा का विस्तार, धामी सरकार का शिक्षकों की भर्ती पर भी जोर

Published : Oct 17, 2026, 06:57 PM IST
uttarakhand nursing education

सार

उत्तराखण्ड में नर्सिंग की 10,616 सीटें, नए सरकारी कॉलेज और शिक्षकों की भर्ती से बढ़े अवसर। जापान और जर्मनी में भी युवाओं को मिली नौकरी।

उत्तराखण्ड में नर्सिंग की पढ़ाई करने वाले युवाओं के लिए अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। धामी सरकार ने सरकारी नर्सिंग कॉलेजों की संख्या और सीटें बढ़ाने के साथ निजी संस्थानों में भी नर्सिंग शिक्षा का दायरा बढ़ाने पर जोर दिया है। जुलाई 2021 के बाद प्रदेश में तीन नए राजकीय नर्सिंग कॉलेज स्थापित किए गए, जिससे विभिन्न पाठ्यक्रमों में 321 अतिरिक्त सीटें बढ़ीं। अब राजकीय नर्सिंग कॉलेजों में कुल सीटों की संख्या 879 हो गई है, जबकि निजी नर्सिंग संस्थानों में यह आंकड़ा 10,616 तक पहुंच चुका है।

सरकार का फोकस केवल कॉलेजों में सीटें बढ़ाने तक सीमित नहीं है। युवाओं को बेहतर शिक्षा देने, शिक्षकों की नियुक्ति करने और उन्हें देश-विदेश में रोजगार के अवसरों से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इसी पहल के तहत कुछ प्रशिक्षित युवाओं को जापान और जर्मनी में भी नौकरी मिली है।

Uttarakhand Nursing Education: सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में बढ़ीं 321 सीटें

उत्तराखण्ड में नर्सिंग शिक्षा को मजबूत करने के लिए जुलाई 2021 के बाद तीन राजकीय नर्सिंग कॉलेज स्थापित किए गए। इन संस्थानों के शुरू होने से प्रदेश में नर्सिंग के अलग-अलग पाठ्यक्रमों में 321 सीटों की बढ़ोतरी हुई। इसके साथ ही सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में कुल सीटों की संख्या बढ़कर 879 हो गई है।

इन नए संस्थानों में बीएससी नर्सिंग की 151, एमएससी नर्सिंग की 120, एनपीसीसी की 20 और एनपीएम की 30 सीटें शामिल हैं। इन पाठ्यक्रमों के जरिए विद्यार्थियों को नर्सिंग और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े अलग-अलग क्षेत्रों में प्रशिक्षण लेने का अवसर मिल रहा है।

प्रदेश के नर्सिंग संस्थानों में एएनएम, जीएनएम, बीएससी नर्सिंग, पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग, एमएससी नर्सिंग, एनपीसीसी और एनपीएम सहित कई पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इससे विद्यार्थियों को अपनी योग्यता और रुचि के अनुसार कोर्स चुनने के विकल्प मिल रहे हैं।

CM पुष्कर सिंह धामी का फोकस, युवाओं को मिले गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि राज्य सरकार का उद्देश्य उत्तराखण्ड के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के साथ रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। नर्सिंग शिक्षा का विस्तार और राजकीय संस्थानों में पढ़ाई से जुड़ी सुविधाओं को मजबूत करना इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं।

सरकार चाहती है कि प्रदेश के युवा अपनी प्रतिभा और कौशल के दम पर आगे बढ़ें। साथ ही, वे स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में भी अहम भूमिका निभाएं। नर्सिंग शिक्षा के विस्तार से एक ओर युवाओं को प्रशिक्षण के अधिक अवसर मिल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने में भी मदद मिल सकती है। सरकार की कोशिश है कि नर्सिंग की पढ़ाई पूरी करने वाले विद्यार्थियों को रोजगार के लिए बेहतर विकल्प मिलें और वे देश के साथ विदेशों में भी अपनी योग्यता के अनुरूप काम कर सकें।

Nursing Jobs Abroad: उत्तराखण्ड के युवाओं को जापान और जर्मनी में नौकरी

उत्तराखण्ड सरकार नर्सिंग विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा के साथ विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण भी दे रही है। इसका मकसद युवाओं को विदेशों में रोजगार के अवसरों के लिए तैयार करना है। इसके तहत जापानी, जर्मन और स्पेनिश जैसी भाषाओं में दक्षता विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

सरकारी प्रयासों के तहत प्रशिक्षित युवाओं को विदेशों में नौकरी भी मिली है। वर्ष 2023 में दो बैचों के कुल 60 अभ्यर्थियों को जापान में रोजगार मिला। वहीं, वर्ष 2025 में 13 अभ्यर्थियों को जर्मनी में नौकरी मिली। विदेशी भाषा और व्यावसायिक कौशल का प्रशिक्षण युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खोल सकता है। सरकार की कोशिश है कि नर्सिंग की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध अवसरों का भी लाभ उठा सकें।

Private Nursing Colleges: निजी संस्थानों में 10,616 हुईं नर्सिंग की सीटें

प्रदेश में नर्सिंग शिक्षा का विस्तार केवल सरकारी कॉलेजों तक सीमित नहीं है। जुलाई 2021 के बाद 76 निजी नर्सिंग संस्थानों को विभिन्न पाठ्यक्रम संचालित करने के लिए अनिवार्यता प्रमाणपत्र जारी किए गए। इन संस्थानों में अलग-अलग पाठ्यक्रमों के लिए 5,138 सीटों को मंजूरी दी गई।

इसके बाद राज्य के निजी नर्सिंग संस्थानों में विभिन्न पाठ्यक्रमों की कुल सीटों की संख्या बढ़कर 10,616 हो गई है। इन संस्थानों में उत्तराखण्ड के अलावा उत्तर प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, बिहार और पूर्वोत्तर राज्यों के विद्यार्थी भी प्रवेश ले रहे हैं।

इससे प्रदेश में नर्सिंग शिक्षा का दायरा बढ़ा है। साथ ही, निजी नर्सिंग कॉलेजों और अस्पतालों में रोजगार की संभावनाएं मजबूत होने की उम्मीद है। दूसरे राज्यों से विद्यार्थियों के आने से उत्तराखण्ड नर्सिंग शिक्षा के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में भी उभर रहा है।

Nursing Faculty Recruitment: नर्सिंग कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति पर जोर

चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर नर्सिंग संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए शिक्षकों की नियुक्ति और नए पदों के सृजन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। दिसंबर 2021 में 40 ट्यूटरों की नियुक्ति की गई थी। इसके बाद जून 2025 तक 26 और ट्यूटर नियुक्त किए गए। इस तरह नियमित नर्सिंग ट्यूटरों की कुल संख्या 66 हो गई।

शिक्षकों की नियुक्ति के साथ संकाय सदस्यों की संख्या बढ़ाने के लिए भी कदम उठाए गए हैं। अक्टूबर 2022 में आठ असिस्टेंट प्रोफेसर और एक एसोसिएट प्रोफेसर सहित कुल नौ संकाय सदस्यों की नियुक्ति की गई। इसके अलावा ट्यूटर, असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, प्रोफेसर और उप प्रधानाचार्य के पद भी सृजित किए गए। नवंबर 2025 में सात संकाय सदस्यों की नियुक्ति की गई। इन कदमों का उद्देश्य नर्सिंग कॉलेजों में शिक्षण व्यवस्था को मजबूत करना और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराना है।

Nursing Recruitment Update: 16 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ी

नर्सिंग शिक्षा से जुड़े संस्थानों में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए भर्ती प्रक्रिया भी जारी है। चिकित्सा शिक्षा निदेशालय की ओर से 16 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों की अंतिम परीक्षा का परिणाम जारी होने के बाद नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया है। इसके अतिरिक्त, बीते सितंबर महीने में 30 ट्यूटरों की भर्ती के लिए अधियाचन उत्तराखण्ड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड को भेजा गया। इससे आने वाले समय में नर्सिंग संस्थानों में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। शिक्षकों की पर्याप्त संख्या किसी भी व्यावसायिक पाठ्यक्रम की गुणवत्ता के लिए जरूरी है। नर्सिंग जैसे स्वास्थ्य सेवा से जुड़े क्षेत्र में इसका महत्व और बढ़ जाता है, क्योंकि विद्यार्थियों को सैद्धांतिक पढ़ाई के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण भी हासिल करना होता है।

Nursing Admission: हर साल 12 से 15 हजार अभ्यर्थी करते हैं आवेदन

उत्तराखण्ड में नर्सिंग की पढ़ाई को लेकर युवाओं की दिलचस्पी भी लगातार दिखाई दे रही है। हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय की ओर से नर्सिंग पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित परीक्षा में हर साल लगभग 12,000 से 15,000 अभ्यर्थी आवेदन करते हैं।

आवेदकों की यह संख्या बताती है कि युवाओं के बीच नर्सिंग शिक्षा की मांग बनी हुई है। सरकारी और निजी संस्थानों में सीटों का विस्तार, शिक्षकों की नियुक्ति और विदेशों में रोजगार के अवसर इस क्षेत्र को और व्यापक बना सकते हैं। कुल मिलाकर, उत्तराखण्ड में नर्सिंग शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कॉलेजों में सीटें बढ़ाने से लेकर शिक्षकों की नियुक्ति और विदेशी भाषा प्रशिक्षण तक कई स्तरों पर काम किया जा रहा है। आने वाले समय में इन प्रयासों का असर शिक्षा की गुणवत्ता, स्वास्थ्य सेवाओं और युवाओं के रोजगार के अवसरों पर पड़ सकता है।

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