उत्तराखंड भूमि संशोधन विधेयक पारित, धामी ने बताया ऐतिहासिक

Published : Feb 22, 2025, 07:58 AM IST
Uttarakhand Chief Minister Pushkar Singh Dhami (Photo/ANI)

सार

उत्तराखंड विधानसभा ने शुक्रवार को उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश और भूमि सुधार अधिनियम, 1950) (संशोधन) विधेयक, 2025 पारित कर दिया।

देहरादून (एएनआई): उत्तराखंड विधानसभा ने शुक्रवार को उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश और भूमि सुधार अधिनियम, 1950) (संशोधन) विधेयक, 2025 पारित कर दिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधेयक के पारित होने का स्वागत करते हुए इसे राज्य को 'नवाचार' की ओर ले जाने के लिए अपनी सरकार द्वारा लिए गए 'ऐतिहासिक फैसलों' की श्रृंखला का हिस्सा बताया।

"हमने समान नागरिक संहिता के कार्यान्वयन सहित राज्य में ऐतिहासिक फैसले लिए हैं। हम युवाओं के लिए देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लाए हैं... हमने धर्मांतरण और दंगों को रोकने के लिए कानून बनाए हैं... हम राज्य को नवाचार की ओर ले जा रहे हैं। हम जो कहते हैं उसे पूरा करने की कोशिश करते हैं, और भूमि सुधार कानून भी उसी दिशा में उठाया गया एक कदम है," धामी ने संवाददाताओं से कहा।

शुक्रवार को विधानसभा में विधेयक पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह संशोधन अंत नहीं बल्कि भूमि सुधारों की शुरुआत है। राज्य सरकार ने जनभावनाओं के अनुरूप भूमि सुधारों की नींव रखी है, और भविष्य में भूमि प्रबंधन और सुधारों पर काम जारी रहेगा, धामी ने कहा। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने जनता की अपेक्षाओं और भावनाओं के अनुरूप काम किया है। सरकार कई नए महत्वपूर्ण मामलों पर ऐतिहासिक फैसले ले रही है। उन्होंने कहा कि सरकार उत्तराखंड के संसाधनों और भूमि को भू-माफियाओं से बचाने के लिए प्रतिबद्ध है। जिस उद्देश्य के लिए लोगों ने जमीन खरीदी थी, उसका इस्तेमाल नहीं बल्कि दुरुपयोग किया गया, यह चिंता हमेशा मन में रही।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में पहाड़ी क्षेत्रों के साथ-साथ मैदानी क्षेत्र भी हैं। जिनकी भौगोलिक परिस्थितियाँ और चुनौतियाँ अलग-अलग हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बड़ी संख्या में औद्योगीकरण की ओर बढ़ रही है। ऐसे में राज्य में आने वाले असली निवेशकों को कोई परेशानी न हो और निवेश भी न रुके।

"हम लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास करते हैं। पिछले कुछ वर्षों में देखा गया है कि राज्य में लोग विभिन्न उपक्रमों के माध्यम से स्थानीय लोगों को रोजगार देने के नाम पर जमीन खरीद रहे थे। भूमि प्रबंधन और भूमि सुधार अधिनियम के गठन के बाद, इस पर पूरी तरह से अंकुश लग जाएगा," मुख्यमंत्री ने कहा। 

राज्य सरकार ने पिछले वर्षों में बड़े पैमाने पर राज्य से अतिक्रमण हटाया है। वन भूमि और सरकारी भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाया गया है। 3461.74 एकड़ वन भूमि से कब्जा हटाया गया है। यह काम हमारी सरकार ने इतिहास में पहली बार किया है। इससे पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था दोनों की रक्षा हुई है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में कृषि और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए खरीद की अनुमति कलेक्टर स्तर पर दी जाती थी। इसे अब 11 जिलों में समाप्त कर दिया गया है और हरिद्वार और उधम सिंह नगर में ही राज्य सरकार के स्तर पर निर्णय लेने का प्रावधान किया गया है।

किसी भी व्यक्ति के पक्ष में स्वीकृत सीमा में 12.5 एकड़ से अधिक की भूमि का हस्तांतरण 11 जिलों में समाप्त कर दिया गया है और हरिद्वार और उधम सिंह नगर जिलों में ही राज्य सरकार के स्तर पर निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि आवासीय परियोजनाओं के लिए 250 वर्ग मीटर जमीन खरीदने के लिए हलफनामा अनिवार्य कर दिया गया है। यदि हलफनामा झूठा पाया जाता है, तो भूमि राज्य सरकार में निहित होगी। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के तहत थ्रस्ट सेक्टर और अधिसूचित खसरा नंबर भूमि खरीदने की अनुमति, जो कलेक्टर स्तर पर दी जाती थी, अब राज्य सरकार के स्तर पर दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नए कानून में कई बड़े बदलाव किए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने गैरसैंण में हितधारकों से भी विचार-विमर्श किया था। इन नए प्रावधानों में राज्य के लोगों के विचारों को लिया गया है, और सभी से सुझाव भी लिए गए हैं। सभी जिलों के जिलाधिकारियों और तहसील स्तर पर लोगों से उनके जिलों में भी सुझाव लिए गए। यह कानून सभी से सुझावों के अनुरोध पर बनाया गया है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य के मूल स्वरूप को बनाए रखा जाना चाहिए, और मूल अस्तित्व को बचाया जाना चाहिए। इसके लिए भूमि सुधार किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य की जनसांख्यिकी को बचाने के लिए विशेष ध्यान रखा गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में औद्योगिक, पर्यटन, शैक्षणिक, स्वास्थ्य, कृषि और बागवानी उद्देश्यों आदि के लिए राज्य सरकार और कलेक्टर द्वारा कुल 1883 भूमि की खरीद की अनुमति दी गई थी। उपरोक्त उद्देश्यों / आवासीय उद्देश्यों के लिए खरीदी गई भूमि के संबंध में, भूमि उपयोग उल्लंघन के कुल 599 मामले सामने आए हैं, जिनमें से 572 मामलों में उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश और भूमि प्रबंधन अधिनियम, 1950) (अनुकूलन और रूपांतरण आदेश-2001) की धारा 166/167 के तहत मुकदमे दायर किए गए हैं और 16 मामलों में मुकदमे का निपटारा करते हुए 9.4760 हेक्टेयर भूमि राज्य सरकार में निहित कर दी गई है। शेष मामलों में कार्रवाई की जा रही है। (एएनआई)

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