
देहरादून। प्रदेश के शहरों को ज्यादा व्यवस्थित, सुंदर और सुविधाजनक बनाने के लिए धामी सरकार ने विकास प्राधिकरणों की कार्यप्रणाली में बदलाव और तेजी लाने पर जोर दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के बाद मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने लंबित योजनाओं की समीक्षा शुरू कर दी है। साथ ही विकास कार्यों के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय करने और अधिकारियों की जिम्मेदारी निर्धारित करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। MDDA सभागार में हुई बैठक में मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देशों पर विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान अलग-अलग विकास योजनाओं की मौजूदा स्थिति, लंबित काम और आगे की कार्ययोजना पर अधिकारियों ने मंथन किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ किया है कि शहरों के विकास से जुड़ी योजनाएं सिर्फ फाइलों और कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उनका लाभ लोगों तक तय समय में पहुंचना चाहिए। इसी सोच के तहत लंबित मास्टर प्लान और दूसरी विकास परियोजनाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।
एमडीडीए अब लंबित कार्यों की नियमित समीक्षा और मॉनिटरिंग करेगा। प्रत्येक काम को पूरा करने की समय-सीमा तय करने के साथ यह भी निर्धारित किया जाएगा कि उसके लिए जिम्मेदार अधिकारी कौन होगा। इससे योजनाओं में अनावश्यक देरी रोकने और जवाबदेही तय करने में मदद मिलेगी।
शहरों के सौंदर्यीकरण को लेकर भी सरकार ने समयबद्ध अभियान चलाने का फैसला किया है। आगामी 15 अक्टूबर तक प्राधिकरण क्षेत्र में सड़क सुधार, सिटी पार्क और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़े कई कामों को प्राथमिकता दी जाएगी। महिलाओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पिंक टॉयलेट की संख्या और उपलब्धता बढ़ाने पर भी जोर रहेगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सौंदर्यीकरण से जुड़े कामों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए और उनका असर जमीन पर दिखाई दे।
प्रमुख मार्गों और महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थलों को G-20 आयोजन की तर्ज पर विकसित और आकर्षक बनाने की योजना है। इसके तहत सड़कों, डिवाइडरों, चौराहों और दूसरे सार्वजनिक स्थानों के स्वरूप में सुधार किया जाएगा। सिर्फ सजावट ही नहीं, बल्कि हरियाली, बेहतर प्रकाश व्यवस्था और स्वच्छता पर भी ध्यान दिया जाएगा। एमडीडीए की कोशिश शहरों को आधुनिक और व्यवस्थित स्वरूप देने की है। साथ ही स्थानीय संस्कृति और शहर की अपनी पहचान को भी सौंदर्यीकरण की योजनाओं में जगह दी जाएगी। इसका मकसद स्थानीय लोगों के लिए सुविधाएं बढ़ाने के साथ पर्यटकों को भी बेहतर अनुभव देना है।
बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के बीच शहरों में पार्किंग की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। बैठक में इस मुद्दे पर भी विशेष चर्चा हुई। अधिकारियों को अस्थायी इंतजामों के बजाय पार्किंग के स्थायी और व्यावहारिक समाधान तलाशने को कहा गया है। इसके लिए उपलब्ध जमीन, मौजूदा यातायात दबाव और आने वाले वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर योजनाएं तैयार की जाएंगी। यानी पार्किंग की समस्या को सिर्फ तत्काल राहत के तौर पर नहीं, बल्कि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए हल करने की तैयारी है।
शहरों में अवैध निर्माण पर रोक लगाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा। एमडीडीए और अन्य विकास प्राधिकरणों के क्षेत्रों में जीआईएस, ड्रोन और सैटेलाइट तकनीक के जरिए निगरानी व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया गया है। इस तकनीक से निर्माण गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा सकेगी। अनधिकृत निर्माण की शुरुआती स्तर पर पहचान होने से समय रहते कार्रवाई करना भी आसान होगा। प्रत्येक विकास प्राधिकरण में जियो-इन्फॉर्मेशन आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने की दिशा में भी काम किया जाएगा। इससे जमीन पर होने वाले बदलावों और निर्माण गतिविधियों की निगरानी ज्यादा प्रभावी तरीके से की जा सकेगी।
बैठक में यह बात भी सामने आई कि विकास प्राधिकरणों की भूमिका केवल नक्शे पास करने या निर्माण संबंधी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। शहर के समग्र विकास में इन संस्थाओं की सक्रिय भूमिका जरूरी है। सड़क, पार्किंग, हरियाली, सार्वजनिक सुविधाएं और शहर का नियोजित विस्तार—इन सभी को एक साथ देखते हुए विकास की योजनाएं तैयार करने पर जोर दिया गया है। उद्देश्य ऐसा शहरी विकास मॉडल तैयार करना है, जिसमें अलग-अलग योजनाएं एक-दूसरे से जुड़ी हों और शहर की भविष्य की जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाए।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद एमडीडीए में पारदर्शिता, तकनीक और समयबद्ध कार्यप्रणाली को प्राथमिकता दी जा रही है। लंबित योजनाओं की निगरानी बढ़ाने के साथ विकास कार्यों की प्रगति की नियमित समीक्षा की जा रही है। प्राधिकरण की कोशिश है कि योजनाओं में होने वाली अनावश्यक देरी को कम किया जाए और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इसी दिशा में तकनीक के इस्तेमाल और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के शहरों को सुनियोजित तरीके से विकसित करने और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। एमडीडीए इन्हीं अपेक्षाओं के अनुरूप काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि लंबित योजनाओं को गति देने के साथ सड़क, पार्किंग, सिटी पार्क और सार्वजनिक सुविधाओं को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। 15 अक्टूबर तक सौंदर्यीकरण से जुड़े कामों को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने की तैयारी है। तिवारी के मुताबिक अवैध निर्माण की निगरानी के लिए ड्रोन, जीआईएस और सैटेलाइट तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ाया जाएगा। उनका कहना है कि पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ लोगों को बेहतर नागरिक सुविधाएं देना एमडीडीए की प्राथमिकता है।
एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुपालन में प्राधिकरण स्तर पर कार्ययोजना बनाकर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। सभी लंबित कामों की समीक्षा की जा रही है और उनके लिए समय-सीमा के साथ जिम्मेदारी भी तय की जा रही है।
उन्होंने कहा कि सड़क सुधार, शहर का सौंदर्यीकरण, पार्किंग, सिटी पार्क और पिंक टॉयलेट जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। अवैध निर्माण पर नियंत्रण के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। बर्निया के अनुसार कोशिश यही है कि विकास योजनाओं का लाभ लोगों तक समय पर पहुंचे और शहरों का विस्तार और विकास बिना अव्यवस्था के, एक नियोजित तरीके से आगे बढ़े।
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