
देहरादून। उत्तराखंड में मंत्र चिकित्सा (Mantra Therapy) पर वैज्ञानिक और क्रियात्मक अनुसंधान को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू हुई है। शुक्रवार को सचिवालय परिसर में उत्तराखंड संस्कृत संस्थानम् और श्री महंत इंदिरेश अस्पताल के संयुक्त तत्वावधान में एक विशेष संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें देश और प्रदेश के संस्कृत विद्वानों, चिकित्सा विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने मंत्र चिकित्सा के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। गोष्ठी में मंत्रों के सही प्रयोग, उच्चारण की शुद्धता, विधि-विधान और अनुसंधान की संभावनाओं को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए।
संगोष्ठी में मौजूद संस्कृत विद्वानों ने कहा कि मंत्र चिकित्सा पर होने वाले किसी भी अनुसंधान में मंत्रों के सही उच्चारण, नियमों के पालन और पारंपरिक विधि का विशेष ध्यान रखना होगा। विशेषज्ञों का मानना था कि इन सभी पहलुओं का व्यवस्थित अध्ययन ही इस क्षेत्र में आगे की शोध प्रक्रिया को मजबूत आधार दे सकता है।
संयुक्त निदेशक, चिकित्सा शिक्षा उत्तराखंड डॉ. रंगील सिंह रैना और महंत इंदिरेश चिकित्सा महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. उत्कर्ष शर्मा ने कहा कि यदि पहले से उपलब्ध साहित्य में किसी बीमारी के उपचार से जुड़े मंत्र चिकित्सा के प्रमाण मिलते हैं, तो उसी आधार पर अन्य बीमारियों में इसके प्रयोग की संभावना पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे किसी भी प्रयोगात्मक अनुसंधान को शुरू करने से पहले मरीज की सहमति लेना और एथिकल कमेटी की मंजूरी जरूरी होगी। इसके बाद ही अनुसंधान की औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
बैठक के दौरान संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने उपस्थित संस्कृत विद्वानों से आग्रह किया कि मंत्र चिकित्सा से संबंधित उपलब्ध साहित्य 10 दिनों के भीतर नोडल अधिकारी को उपलब्ध करा दिया जाए। उन्होंने कहा कि इससे अनुसंधान प्रक्रिया को जल्द शुरू करने में मदद मिलेगी और आगे की कार्ययोजना तय करना आसान होगा।
संगोष्ठी में उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाकांत पांडेय, श्रीलाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली के प्रो. रामानुज उपाध्याय, प्रो. सुंदरनारायण झा, प्रो. रामराज उपाध्याय और डॉ. अविन पाल सहित कई प्रतिष्ठित विद्वान शामिल हुए। इसके अलावा गुरु राम राय संस्कृत महाविद्यालय के प्रबंधक चंद्र मोहन पयाल, संस्कृत संस्थानम् के प्रो. विनय कुमार विद्यालंकार, संस्कृत शिक्षा निदेशक मंजू भारती, प्रो. बिंदुमती द्विवेदी, डॉ. मीनाक्षी सिंह, उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के डॉ. प्रदीप सेमवाल, ऋषिकेश के संस्कृत विद्वान डॉ. शांति प्रसाद मैठाणी और कमल डिमरी भी मौजूद रहे। बैठक में योजना के नोडल अधिकारी डॉ. रामभूषण विजल्वाण, संस्कृत शिक्षा अनुसचिव संजय कुमार, अनुभाग अधिकारी तरुण धंजीवाल सहित कई अधिकारी और शिक्षाविद भी शामिल हुए।
उत्तराखंड के तीर्थ-पर्यटन केंद्रों, पहाड़ी इलाकों, मौसम, सरकारी योजनाओं और स्थानीय प्रशासन से जुड़ी ताज़ा खबरें पढ़ें। देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार और पहाड़ी ज़िलों की रिपोर्ट्स के लिए Uttarakhand News in Hindi सेक्शन फॉलो करें — विश्वसनीय और विस्तृत राज्य कवरेज यहीं।