
उत्तराखंड में युवाओं के लिए स्टार्टअप और उद्यमिता का माहौल लगातार मजबूत हो रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि राज्य सरकार Innovation, Talent और Entrepreneurship को बढ़ावा देकर उत्तराखंड के Startup Ecosystem को लगातार मजबूत कर रही है।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया कि राज्य में फिलहाल भारत सरकार से मान्यता प्राप्त 1,300 से अधिक स्टार्टअप्स काम कर रहे हैं। इसके अलावा 200 से ज्यादा स्टार्टअप्स को राज्य सरकार से मान्यता मिली हुई है। युवाओं के नए आइडिया और कारोबार को शुरुआती स्तर पर वित्तीय मदद मिल सके, इसके लिए सरकार ने ₹200 करोड़ का Venture Fund भी स्थापित किया है।
हमारी सरकार प्रदेश के युवाओं के नवाचार, प्रतिभा और उद्यमशीलता को प्रोत्साहित करते हुए उत्तराखंड के स्टार्टअप इकोसिस्टम को निरंतर मजबूत कर रही है।
वर्तमान में प्रदेश में भारत सरकार से मान्यता प्राप्त 1,300 से अधिक तथा राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त 200 से अधिक स्टार्टअप संचालित… pic.twitter.com/WeReM075L6— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) August 18, 2026
उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में स्टार्टअप संस्कृति का विस्तार सिर्फ नए कारोबार तक सीमित नहीं है। इसका सीधा संबंध स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार, नए बाजार और राज्य में प्रतिभा को रोकने से भी है। मुख्यमंत्री धामी के मुताबिक, 1,300 से अधिक ऐसे स्टार्टअप्स राज्य में सक्रिय हैं जिन्हें भारत सरकार की मान्यता प्राप्त है। वहीं, 200 से ज्यादा उद्यमों को राज्य सरकार ने भी मान्यता दी है। यह आंकड़ा बताता है कि उत्तराखंड में पारंपरिक रोजगार के साथ-साथ युवा अब अपना कारोबार खड़ा करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं।
Startup India की 2026 की राज्य रिपोर्ट भी बताती है कि उत्तराखंड में स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए फंडिंग, इनक्यूबेशन, मेंटरशिप और मार्केट एक्सेस जैसे क्षेत्रों पर काम किया जा रहा है।
स्टार्टअप शुरू करने में सिर्फ अच्छा आइडिया काफी नहीं होता। शुरुआती दौर में सबसे बड़ी चुनौती अक्सर फंडिंग की होती है। सरकार इसी समस्या को कम करने की कोशिश कर रही है। उत्तराखंड Venture Fund का कॉर्पस ₹200 करोड़ है। इसका उद्देश्य राज्य के स्टार्टअप्स के लिए ग्रोथ कैपिटल की कमी को दूर करना और निजी निवेश को आकर्षित करना है। Startup India की जानकारी के अनुसार, यह फंड SEBI-पंजीकृत Alternative Investment Funds यानी AIFs में Limited Partner के तौर पर निवेश करने के मॉडल पर काम करता है।
राज्य की निवेश संबंधी जानकारी में भी ₹200 करोड़ के Uttarakhand Venture Fund को Startup Uttarakhand की प्रमुख पहल के रूप में शामिल किया गया है। यानी सरकार की कोशिश केवल सीधे आर्थिक सहायता देने तक नहीं है। लक्ष्य ऐसा सिस्टम तैयार करना है, जिसमें निजी निवेशक, फंड, मेंटर और इनक्यूबेटर भी राज्य के युवा उद्यमियों से जुड़ सकें।
उत्तराखंड की Startup Uttarakhand Policy 2023 में स्टार्टअप्स के लिए कई तरह के वित्तीय और गैर-वित्तीय प्रोत्साहन दिए गए हैं। इनमें मासिक भत्ता, पेटेंट लागत की प्रतिपूर्ति, स्टांप ड्यूटी में राहत, SGST reimbursement और इनक्यूबेशन सपोर्ट जैसे प्रावधान शामिल हैं। पॉलिसी के तहत पात्र स्टार्टअप्स को सामान्य श्रेणी में अधिकतम एक साल तक ₹10,000 का मासिक भत्ता दिया जा सकता है। वहीं SC/ST, महिला, दिव्यांग उद्यमियों या कुछ विशेष क्षेत्रों में संचालित स्टार्टअप्स के लिए यह राशि ₹15,000 तक हो सकती है।
इसके अलावा इनोवेशन के लिए जरूरी कच्चे माल या उपकरणों पर जरूरत आधारित सहायता और इनक्यूबेटर्स को पूंजीगत सहायता जैसे प्रावधान भी किए गए हैं। सरकार ने शुरुआती स्तर की फंडिंग के लिए Angel Network और Social Impact Investor Groups को बढ़ावा देने की व्यवस्था भी नीति में रखी है।
उत्तराखंड में स्टार्टअप्स के लिए फोकस केवल टेक्नोलॉजी कंपनियों तक सीमित नहीं है। राज्य के स्टार्टअप इकोसिस्टम में पर्यटन, बायोटेक्नोलॉजी, शिक्षा, फूड प्रोसेसिंग और कृषि जैसे क्षेत्रों को भी महत्वपूर्ण माना गया है। इसका महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान को नए बिजनेस मॉडल से जोड़ा जा सकता है। पर्यटन, ऑर्गेनिक और एग्री-प्रोडक्ट्स, हेल्थटेक, ड्रोन, पर्यावरण और स्थानीय हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में नए उद्यम रोजगार के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति दे सकते हैं।
धामी सरकार का जोर युवाओं को केवल नौकरी तलाशने तक सीमित रखने के बजाय उन्हें Job Creator बनाने पर है। इसके लिए स्टार्टअप इकोसिस्टम में फंडिंग के साथ-साथ मेंटरशिप, इनक्यूबेशन और बाजार तक पहुंच को मजबूत करना जरूरी है। राज्य की मौजूदा नीति में इनक्यूबेटर्स, एंजल नेटवर्क और स्टार्टअप्स के लिए अलग-अलग सहायता प्रावधान हैं। वहीं 2026 की राज्य रिपोर्ट के मुताबिक, Startup Uttarakhand Portal के जरिए स्टार्टअप्स को निवेशकों, मेंटर्स और इकोसिस्टम पार्टनर्स से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
ऐसे में आने वाले समय में चुनौती सिर्फ स्टार्टअप्स की संख्या बढ़ाने की नहीं होगी। असली परीक्षा यह होगी कि इनमें से कितने उद्यम टिकाऊ कारोबार बनते हैं, कितने नए रोजगार पैदा करते हैं और कितने उत्तराखंड के स्थानीय बाजार से निकलकर राष्ट्रीय या वैश्विक स्तर तक पहुंचते हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देशभर में स्टार्टअप इकोसिस्टम अब केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रह गया है। छोटे शहरों और राज्यों के युवा भी टेक्नोलॉजी, कृषि, पर्यटन और स्थानीय समस्याओं पर आधारित नए बिजनेस मॉडल लेकर सामने आ रहे हैं।
उत्तराखंड में 1,300 से अधिक DPIIT-recognized startups और 200 से अधिक राज्य-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स का आंकड़ा इसी बदलाव की ओर इशारा करता है। ₹200 करोड़ का Venture Fund और Startup Uttarakhand Policy जैसे कदम इस इकोसिस्टम को पूंजी और संस्थागत समर्थन देने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार की ये पहलें जमीन पर कितने नए उद्यमियों को आगे लाती हैं और उत्तराखंड को एक मजबूत, आत्मनिर्भर और निवेश-अनुकूल Startup Hub के रूप में कितनी तेजी से स्थापित करती हैं।
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