
नई दिल्ली। जलवायु परिवर्तन दुनियाभर के लिए चिंता का विषय है। वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों का मानना है कि गाय की गैस और उनकी डकार वायुमंडल के लिए चिंताजनक है। विशेषज्ञों का मानना है कि वायुमंडल में जो हानिकारक गैस मीथेन है, इसकी मात्रा बढ़ रही है और इसके लिए गाय-भैंस की डकार और उनके पेट से निकलने वाली गैस गंभीर रूप से जिम्मेदार है।
हालांकि, विशेषज्ञ इसका हल निकालने में भी जुटे हैं। मीथेन का उत्सर्जन रोकने के लिए वैज्ञानिक गाय-भैंस के खाने में सुधार की लगातार कोशिश कर रहे हैं। गाय और भैंस की गैस तथा डकार कम हानिकारक कैसे हो, इसके लिए तमाम शोध हो रहे हैं। यही नहीं, भोजन के साथ और उसके बाद लहसुन, ओरगैनो, जाफरान और कुछ अन्य सब्जियां खिलाकर देखा जा रहा है कि इसके असर में बदलाव हो रहा है या नहीं।
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रिसर्च में सकारात्मक नतीजे आए
कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की टीम इस रिसर्च में जुटी है। हालांकि, शुरुआत में कुछ सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं। रिसर्च टीम का कहना है कि गाय-भैंस को समुद्री शैवाल खिलाने से उनकी पेट की गैस और डकार में मीथेन की मात्रा को कम किया जा सकता है। इस कदम से वायुमंडल सुरक्षित हो सकता है, क्योंकि दूध देने वाली करीब एक दर्जन गायों को समुद्री शैवाल खिलाया गया। इससे उनकी डकार और गैस के माध्यम से बाहर आने वाले मीथेन गैस में लगभग 30 प्रतिशत की कमी आई है।
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संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट भी इस ओर इशारा कर रही
बहरहाल, संयुक्त राष्ट्र की 2014 की एक रिपोर्ट भी इस बारे में इशारा करती है। रिपोर्ट के मुताबिक, जुगाली करने वाले जानवर जैसे गाय, भैंस, बकरी, भेड़ और ऊंट आदि जानवर जुगाली करते हैं और डकार मारते हैं। इनके पेट में लाखों की संख्या में जीवाणु होते हैं, जो घास और पत्तियों जैसे फाइबर युक्त खाने को छोटे टुकड़ों में तोड़कर उन्हें पचाने की प्रक्रिया में आसान बनाते हैं। इससे उनके पेट से मीथेन उत्सर्जित होती है।
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गायों की डकार ग्लोबल वार्मिंग का बड़ा कारण
वैज्ञानिकों का मानना है कि वाहनों से कार्बन डाई आक्साइड गैस उत्सर्जित होती है, जबकि गाय-भैंस जैसे चौपायों से मीथेन गैस। कार्बन डाई आक्साइड गैस की तुलना में मीथेन गैस वायुमंडल के लिए ज्यादा खतरनाक है और ग्लोबल वार्मिंग का बड़ा कारण भी। मनुष्य की तरह गाय-भैंस को भी पेट में गैस की समस्या होती है। उनकी डकार धरती के लिए जितनी खतरनाक होती है उतनी कार भी नहीं।
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