
ट्रेंडिंग डेस्क। Serial Killer Story: ये रिपोर्ट है उस सनकी सीरियल किलर की, जो सिर्फ किसानों को निशाना बनाता था। वो भी झुंड वाले किसानों को नहीं बल्कि, बिल्कुल अकेले और आखिरी किसान को। उसने इस काम को अंजाम देने के लिए एक खास जगह चुन रखी थी। ये जगह थी एक पुल, जो शहर को गांव से जोड़ता था। सीरियल किलर का नाम था डिएगो एल्विस और वह पुर्तगाल में रहता था। उसका जन्म वैसे तो स्पेन के गेसेलिया में 1819 में हुआ था, मगर जब बड़ा हुआ तो रोजी-रोटी कमाने के लिए पुर्तगाल आ गया।
पुर्तगाल में उसने रोजगार के लिए जो जरिया चुना, उसमें बहुत सी मौतें हुईं। यही डिएगो एल्विस की मौत की भी वजह बना। स्पेन में जन्में डिएगो को पुर्तगाल में उसकी निर्दयता व क्रूरता के लिए उसी तरह की जो क्रूर सजा दी गई, वो फांसी थी। इसके बाद पुर्तगाल ने कभी किसी को फांसी नहीं दी। डिएगो को फांसी देने के बाद उसके सिर को काटकर केमिकल से भरे एक जार में रख दिया गया, जो आज भी सुरक्षित है।
दरअसल, डिएगो काम की तलाश में पुर्तगाल के लिस्बन शहर पहुंचा। तब रोजगारी खूब थी। किस्मत वालों को ही काम मिलता था। डिएगो ने काम की तलाश की, मगर नहीं मिला तो परेशान हो गया। इस बीच उसने देखा कि कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो नौकरी नहीं करते थे, मगर ऐश-ओ-आराम की जिंदगी गुजर-बसर कर रहे थे। पूछताछ में पता चला कि वे छोटे-मोटे लूटपाट करते थे। डिएगो ने भी अपराध की राह पकड़ ली। पहले छोटा-मोटा अपराध किया। भीड़ में जाता और एक या दो लोगों को लूटकर चला जाता। जिंदगी चैन से कटने लगी।
मगर कहा जाता है न कि लालच बुरी बला। यही हुआ डिएगो के साथ। उसके मन में लालच आया तथा इच्छा जागी कि और ज्यादा पैसा कमाना है। उसने पुरानी भीड़ वाली जगह छोड़कर नए निशाने तलाश किए। कुछ दन की मेहनत के बाद उसे एक पुल दिखा, जो शहर को गांव से जोड़ता था। यह सुनसान इलाके में था। गांव के किसान अपनी फसल बेचने के लिए शहर आते और शाम को वापस लौटते। तब उनकी जेब में पैसा भी होता था। डिएगो ने यह काम अकेले करने की सोची। वह रोज पुल पर चला जाता और जो किसान अंत में अकेले आता, उसे निशाना बनाता।
बात बस लूटपाट तक रहती तो भी ठीक था। असल में डिएगो के मन में क्रूरता समा गई थी। वह किसान को लूटने के बाद उसे पुल के नीचे फेंककर मार डालता। पुल की ऊंचाई 200 फुट से अधिक थी। ऐसे में उसे भरोसा था कि यहां से गिरने के बाद कोई भी जिंदा नहीं बचेगा। वह अपने साथ चाकू भी रखता था। अगर कोई किसान लूटपाट के दौरान विरोध करता, तो उसे पहले चाकू मारकर घायल करता और फिर नीचे फेंक देता। वह कुछ दिन लूटपाट और हत्या करता और फिर कुछ दिन के लिए शांत बैठ जाता और लूटे हुए पैसों से ऐश करता।
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