चतुर्थी तिथि दो दिन लेकिन व्रत 21 मार्च को करना श्रेष्ठ, बन रहा है शुभ योग, व्रत करते समय ध्यान रखें ये बातें

Published : Mar 21, 2022, 09:34 AM ISTUpdated : Mar 21, 2022, 09:36 AM IST
चतुर्थी तिथि दो दिन लेकिन व्रत 21 मार्च को करना श्रेष्ठ, बन रहा है शुभ योग, व्रत करते समय ध्यान रखें ये बातें

सार

आज (21 मार्च, सोमवार) चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि (Ganesh Chaturthi 2022) है। ये तिथि 22 मार्च की सुबह तक रहेगी, लेकिन चंद्रोदय सोमवार को होने से इसी दिन भगवान श्रीगणेश के निमित्त व्रत और पूजा की जाएगी। चैत्र मास में किए जाने वाले चतुर्थी व्रत बहुत ही खास माने गए हैं। इसके बाद आने वाली चतुर्थी 5 अप्रैल, मंगलवार को रहेगी, इसलिए अंगारक चतुर्थी ( Angarak Ganesh Chaturthi) कहलाएगी।

उज्जैन. स्कंद और ब्रह्मवैवर्त पुराण के मुताबिक चैत्र मास की दोनों तिथियों पर भगवान श्रीगणेश की विशेष पूजा के साथ व्रत रखने से परेशानियां दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूरी होती है। चैत्र मास में भगवान श्रीगणेश की पूज विशेष रूप करने का विधान है। उज्जैन के चिंतामण गणेश मंदिर में चैत्र मास के बुधवार को बड़ी संख्या में दर्शन के लिए आते हैं। इसे चिंतामण जत्रा भी कहते हैं।

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क्यों खास है भालचंद्र संकष्टी व्रत? 
पुरी के ज्योतिषाचार्य पं. गणेश मिश्र के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी का व्रत सभी परेशानियों को दूर करने वाला है। इस दिन भगवान श्रीगणेश की पूजा से महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। अगर कुंवारी कन्याएं ये व्रत करें तो मनचाहा पति मिलता है। चतुर्थी तिथि का आरंभ 21 मार्च, सोमवार लगभग 8.30 से होगा जो अगले दिन सुबह 06.25 तक रहेगी। 

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चतुर्थी व्रत में इन बातों का रखें खास ख्यान…
1.
सूर्योदय से पहले उठकर नहाएं और सूर्य के जल चढ़ाने के बाद भगवान श्रीगणेश के दर्शन करें। 
2. गणेश जी की मूर्ति के सामने बैठकर दिनभर व्रत और पूजा का संकल्प लेना चाहिए।
3. इस व्रत में पूरे दिन फल और दूध ही लिया जाना चाहिए। अन्न नहीं खाना चाहिए। 
4. भगवान गणेश की पूजा सुबह और शाम यानी दोनों वक्त की जानी चाहिए। 
5. शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत पूरा करें।

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बन रहा है शुभ योग
21 मार्च, सोमवार को स्वाति नक्षत्र होने से छत्र नाम का शुभ योग बन रहा है। इस तिथि पर गणेश जी के लिए व्रत-उपवास किया जाता है। सोमवार को चतुर्थी होने से इसका महत्व और अधिक बढ़ गया है, इस वजह से गणेश जी के साथ ही शिव-पार्वती की भी विशेष पूजा जरूर करें। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार चतुर्थी तिथि के स्वामी गणेश जी हैं और सोमवार के स्वामी शिव जी हैं। ज्योतिष में सोमवार का कारक ग्रह चंद्र को माना गया है। शिवलिंग पूजा से चंद्र ग्रह से संबंधित दोषों से भी मुक्ति मिल जाती है।

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