वीडियो डेस्क। कोरोना वायरस अभी पता नहीं कैसे कैसे दिन दिखाएगा। जहां लॉकडाउन ने मजदूरों की कमर तोड़ी वहीं रोटी के अभाव में अब अपने भी पराए जैसा व्यवहार कर रहे हैं. ये वाकया है सफीपुर तहसील क्षेत्र का जहां एक महिला को एक साल पहले उसके पति ने घर से बाहर निकाल दिया। महिला अपने मायके में अपने भाई के साथ रह रही थी अब भाई ने भी बचपन के खून के रिश्ते को तार तार कर दिया और अपनी बहन को दर दर की ठोकरें खाने के लिए घर से बाहर निकाल दिया।
वीडियो डेस्क। कोरोना वायरस अभी पता नहीं कैसे कैसे दिन दिखाएगा। जहां लॉकडाउन ने मजदूरों की कमर तोड़ी वहीं रोटी के अभाव में अब अपने भी पराए जैसा व्यवहार कर रहे हैं. ये वाकया है सफीपुर तहसील क्षेत्र का जहां एक महिला को एक साल पहले उसके पति ने घर से बाहर निकाल दिया। महिला अपने मायके में अपने भाई के साथ रह रही थी अब भाई ने भी बचपन के खून के रिश्ते को तार तार कर दिया और अपनी बहन को दर दर की ठोकरें खाने के लिए घर से बाहर निकाल दिया।
महिला अपने तीन बच्चों के साथ रिक्शे पर समान रख कर निकल गई। 2 किमी ही चली की सांस फूल गई। पेड़ की छांव के नीचे बैठकर थोड़ा सुस्ताई। उन्नाव जिले के सफीपुर में लोगों ने महिला को देखा तो उसे भोजन और पानी दिया। तपती धूप, नंगे पांव और भूखा पेट ऊपर से गरीबी। ये तस्वीरें देखने के लिए मजबूत सीना चाहिए।