कोविड अस्पताल में कार्यरत कर्मचारी बिना नोटिस के किए गए बाहर, नारेबाजी के साथ डीएम आवास के बाहर दिया धरना

कोविड अस्पताल में कार्यरत कर्मचारी बिना नोटिस के किए गए बाहर, नारेबाजी के साथ डीएम आवास के बाहर दिया धरना

Published : Jun 27, 2022, 11:59 PM IST

उन्नाव जिला स्थित कोविड अस्पतालों में आउट सोर्सिंग कंपनी के द्वारा कोविड काल मे स्वास्थ्य कर्मियों की जॉइनिंग हुई थी। कोविड काल मे अस्पतालों में काम कर दूसरों की मददगार बने स्वास्थ्य कर्मियों को बिना नोटिस सेवा समाप्त कर दिया गया है। 

उन्नाव: यूपी के उन्नाव जिला स्थित कोविड अस्पतालों में आउट सोर्सिंग कंपनी के द्वारा कोविड काल मे स्वास्थ्य कर्मियों की जॉइनिंग हुई थी। कोविड काल मे अस्पतालों में काम कर दूसरों की मददगार बने स्वास्थ्य कर्मियों को बिना नोटिस सेवा समाप्त कर दिया गया है। स्वास्थ्य कर्मियों को सेवाकाल का 6 माह का मानदेय भी नहीं दिया गया है। स्वास्थ्य कर्मी DM कार्यालय के बगल में अनिश्चित कालीन धरना व भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। स्वास्थ्य कर्मियों ने सेवा विस्तार व बकाया मानदेय दिए जाने का CM को प्रेषित ज्ञापन DM के माध्यम से भेजा है। 

कोरोना काल मे जिले मे L - 1 , L - 2 , 4 CHC को कोविड अस्पताल बनाया गया था । एक आउट सोर्सिंग कंपनी के माध्यम से इन कोविड अस्पतालों में वार्ड बॉय , लैब टेक्नीशियन , स्टाफ नर्स , टेक्नीशियन पदों पर 54 स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती हुई थी । स्वास्थ्य कर्मियों को बिना नोटिस दिए ही 6 मई 2022 को हटा दिया गया है । जबकि प्रदेश के कई जिलों में सेवा विस्तार कर सेवायें ली जा रही हैं। स्वास्थ्य कर्मी लागातर सेवा विस्तर व 6 माह का मानदेय न दिए जाने की शिकायत CMO व DM उन्नाव से की लेकिन समस्या का अंत नहीं हो सका है ।  हटाये गए स्वास्थ्य कर्मियों ने बिना नोटिस सेवा विस्तार समाप्त करने व 6 माह का मानदेय न देने का आरोप लगाए हुए । DM कार्यालय के बगल में अनिश्चित कालीन धरना व भूख हड़ताल पर बैठ गए । स्वास्थ्य कर्मियों ने CM को प्रेषित ज्ञापन DM के माध्यम से भेजा है । मीडिया से बातचीत में स्वास्थ्य कर्मी संजय कुमार ने बताया कि 59 जनपदों में कोविड-19 के समय रखे गए । 5 मई को हमें सेवा से निकाल दिया गया और पिछले 6 महीने से लगभग हम लोगों को मानदेय भी नहीं दिया गया और उसके बाद सेवा से निकाल दिया गया और हम लोग दो-तीन दिनों के बाद सीएमओ कार्यालय जाकर वहां पर ज्ञापन देते हैं उसकी कोई भी सुनवाई नहीं होती है उसके बाद डीएम को भी दिया उसमें भी कुछ नहीं हुआ । विधायक के लेटर पैड पर उप मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा उसमें भी कुछ नहीं हुआ । उसके बाद जनता दरबार में मुख्यमंत्री के पास गए उसके बाद भी हम लोगों के पक्ष में कोई निर्णय नहीं आया सिर्फ आश्वासन मिला है  यह भूख हड़ताल तब तक चलेगी जब तक हम लोगों की मांगे पूरी नहीं हो जाएंगी ।

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