अपने गांव पहुंचे राष्ट्रपति Ramnath Kovind ने धरती को किया नमन, दिल को छू गई ये तस्वीर

अपने गांव पहुंचे राष्ट्रपति Ramnath Kovind ने धरती को किया नमन, दिल को छू गई ये तस्वीर

Published : Jun 27, 2021, 05:58 PM IST

वीडियो डेस्क।  राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद रविवार को यूपी के कानपुर देहात स्थित अपने पैतृक गांव परौंख पहुंचे। यहां आने के बाद वे भावुक नजर आए। हेलीपैड पर उतरकर उन्होंने अपनी जन्मभूमि पर नतमस्तक होकर मिट्टी को स्पर्श किया और उसे माथे से लगाया। उन्होंने कहा कि मैंने सपने में भी कभी कल्पना नहीं की थी कि गांव के मेरे जैसे एक सामान्य बालक को देश के सर्वोच्च पद के दायित्व-निर्वहन का सौभाग्य मिलेगा, लेकिन हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था ने यह कर के दिखा दिया। राष्ट्रपति भवन की ओर से किए गए ट्वीट में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा, मैं कहीं भी रहूं, मेरे गांव की मिट्टी की खुशबू और मेरे गांव के निवासियों की यादें सदैव मेरे हृदय में विद्यमान रहती हैं।  मेरे लिए परौंख केवल एक गांव नहीं है, यह मेरी मातृभूमि है, जहां से मुझे, आगे बढ़कर, देश-सेवा की सदैव प्रेरणा मिलती रही। राष्ट्रपति भवन ने ट्वीट किया, जन्मभूमि से जुड़े ऐसे ही आनंद और गौरव को व्यक्त करने के लिए संस्कृत काव्य में कहा गया है। जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी' अर्थात जन्म देने वाली माता और जन्मभूमि का गौरव स्वर्ग से भी बढ़कर होता है। 
 

वीडियो डेस्क।  राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद रविवार को यूपी के कानपुर देहात स्थित अपने पैतृक गांव परौंख पहुंचे। यहां आने के बाद वे भावुक नजर आए। हेलीपैड पर उतरकर उन्होंने अपनी जन्मभूमि पर नतमस्तक होकर मिट्टी को स्पर्श किया और उसे माथे से लगाया। उन्होंने कहा कि मैंने सपने में भी कभी कल्पना नहीं की थी कि गांव के मेरे जैसे एक सामान्य बालक को देश के सर्वोच्च पद के दायित्व-निर्वहन का सौभाग्य मिलेगा, लेकिन हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था ने यह कर के दिखा दिया। राष्ट्रपति भवन की ओर से किए गए ट्वीट में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा, मैं कहीं भी रहूं, मेरे गांव की मिट्टी की खुशबू और मेरे गांव के निवासियों की यादें सदैव मेरे हृदय में विद्यमान रहती हैं।  मेरे लिए परौंख केवल एक गांव नहीं है, यह मेरी मातृभूमि है, जहां से मुझे, आगे बढ़कर, देश-सेवा की सदैव प्रेरणा मिलती रही। राष्ट्रपति भवन ने ट्वीट किया, जन्मभूमि से जुड़े ऐसे ही आनंद और गौरव को व्यक्त करने के लिए संस्कृत काव्य में कहा गया है। जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी' अर्थात जन्म देने वाली माता और जन्मभूमि का गौरव स्वर्ग से भी बढ़कर होता है। 
 

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