राम की नगरी में देर रात निकली शिव की बारात, बाबा के भजनों पर जमकर थिरके भक्त

राम की नगरी में देर रात निकली शिव की बारात, बाबा के भजनों पर जमकर थिरके भक्त

Published : Mar 02, 2022, 11:21 AM IST

राम नगरी अयोध्या में महाशिवरात्रि पर्व को लेकर बड़े उल्लास रहा दिनभर लाखों श्रद्धालुओं ने भोलेनाथ की आराधना किया और अभिषेक भी किया। वहीं शाम होते ही भगवान भोलेनाथ के विवाह उत्सव श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। भगवान शिव दूल्हा बनकर नंदी पर सवार होकर बैंड बाजे के साथ निकले। 

अयोध्या: राम नगरी अयोध्या में महाशिवरात्रि पर्व को लेकर बड़े उल्लास रहा दिनभर लाखों श्रद्धालुओं ने भोलेनाथ की आराधना किया और अभिषेक भी किया। वहीं शाम होते ही भगवान भोलेनाथ के विवाह उत्सव श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। भगवान शिव दूल्हा बनकर नंदी पर सवार होकर बैंड बाजे के साथ निकले। तो वहीं उनके पीछे भगवान राम व अन्य देवी देवता भी बाराती बनकर उनके साथ दिखाई दिए इस दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालु भी संगीत धुनों में मग्न होकर नाचते गाते हुए इस बारात में शामिल हुए।

भगवान शिव की बारात में उड़े रे गुलाल नाचते रहे बाराती
राम नगरी अयोध्या में भगवान श्री राम विवाह उत्सव की तरह भगवान भोलेनाथ के विवाह उत्सव का भी आयोजन बड़े ही भव्यता के साथ किया जाता है अयोध्या के दर्जनों शिव मंदिर पर झांकी का आयोजन किया गया तो वहीं देर शाम सरयू तट स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक नागेश्वर नाथ मंदिर से भगवान शिव की प्रतीकात्मक स्वरूप के साथ विवाह बारात निकाला गया। जो कि नयाघाट, देवकाली, श्रृंगारहाट के रास्ते क्षीरेश्वरनाथ महादेव मंदिर तक पहुंचा । जहां इस बारात का मुख्य द्वार पर स्वागत आरती के बाद यह बारात पुनः वापस होकर नागेश्वरनाथ मंदिर समाप्त हुआ। इस दौरान बारात में शामिल भक्त संगीत धुनों पर अबीर गुलाल उड़ाते हुए नाचते हुए शामिल रहे।

भगवान के विवाह में शामिल होते हैं देवी देवता और निशाचर
भगवान शिव का विवाह उत्सव का समय बहुत ही पवित्र माना जाता है अयोध्या में निकाली गई भगवान शिव बारात के बाद नागेश्वर नाथ मंदिर पर भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती का प्रतीकात्मक विवाह का आयोजन किया गया जिसमें पंडितों के द्वारा प्राचीन रिती रिवाज और मंत्रोच्चारण के साथ इस विवाह को संपन्न कराया गया। शास्त्रों में ऐसी मान्यता है कि इस दौरान पूरी दुनिया में रहने वाले भूत, प्रेत, निशाचर और देवी देवता सभी उनके विवाह उत्सव को देखने के लिए पहुंचते हैं शास्त्रों की मानें तो इस दौरान भोलेनाथ का अभिषेक करने पर बहुत बड़ा पुण्य मिलता है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

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