
मलेशिया: मां तो मां होती है। जब उसे लगता है कि मुसीबत उसके बच्चों पर आने वाली है, तो वो ढाल बनकर उनके सामने खड़ी हो जाती है। ऐसे ही अपने बच्चों की सलामती के लिए घर की चारदीवारी से निकलकर दुनिया के सामने आई मलेशिया के रनटाउ पंजांग में रहने वाली रहिमह।
काफी नहीं थी पति की कमाई
रहिमह अपने पति और तीन बच्चों के साथ मुश्किल से जिंदगी बिता रही थीं। दिनभर उसका पति कमाता था। लेकिन उसकी इतनी कमाई नहीं थी कि वो अपने बच्चों का पेट भर पाए। कम पैसों में घर का गुजारा नहीं चल रहा था। कई बार उसके घर में चुल्हा नहीं जल पाता था।
पति की मौत से टूट गई
मुसीबतों के बीच रहिमह का घर चल रहा था। इसी बीच 2003 में उसके ऊपर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। रहिमह के पति की मौत कैंसर से हो गई। वो घर का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। तीनों बच्चे भी काफी छोटे थे। ऐसे में रहिमह ने हिम्मत हारने की जगह मेहनत कर मुसीबतों से पार पाने का फैसला किया। इसके लिए उसने कचरा बीनना शुरू किया। कचरा बेचकर उसे जो पैसे मिलते थे, उससे वो अपने बच्चों को खिला-पिला पाई। साथ ही उनकी पढ़ाई करवाई।
तीनों बच्चों ने रखी मां की लाज
रहिमह के तीनों बच्चों को अपनी मां की तकलीफ का एहसास है। तीनों ने खूब मन लगाकर पढ़ाई की। आज रहिमह के तीनों बच्चे, जिसमें दो बेटे और एक बेटी है, ने अपनी मां की मेहनत जाया नहीं जाने दी। उसके तीनो बच्चे अपने सब्जेक्ट्स में टॉपर हैं। बच्चों की कामयाबी से गदगद रहिमह बस उनकी नौकरी लगने के इंतजार में है। साथ ही रहिमह के बच्चों ने भी कभी अपनी मां की इज्जत कम नहीं होने दी। छुट्टियों में बच्चे भी मां की मदद करते हैं।
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