Iran US Nuclear Deal: परमाणु समझौता (Nuclear Deal) को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बहुत अधिक बढ़ गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान परमाणु समझौता स्वीकार नहीं करता है तो उसपर बमबारी होगी। इसके जवाब में ईरान ने कहा है कि उसके मिसाइल लॉन्च होने के लिए तैयार हैं। अगर जरूरत हुई तो वह "अमेरिका से संबंधित ठिकानों" पर हमला करने से पीछे नहीं हटेगा।
ईरान पर लंबे समय से चोरी छिपे परमाणु बम बनाने का आरोप है। घोषित रूप से ईरान अभी परमाणु हथियार की क्षमता से लैस नहीं है, लेकिन जानकारों को संदेह है कि ईरान ने ऐसे हथियार बना रखे हैं। ईरान के परमाणु हथियार से सबसे अधिक खतरा इजरायल को है। ईरान जिस तरह आतंकी संगठनों की मदद कर रहा है अगर वह परमाणु शक्ति संपन्न देश बन गया तो इसका असर पूरी दुनिया पर होगा। आइए जानते हैं ईरान की परमाणु और मिसाइल क्षमता कितनी है।
ईरान के पास अभी तक घोषित रूप से परमाणु हथियार नहीं है। वह लंबे समय से गुप्त रूप से परमाणु हथियार बनाने में जुटा है। पश्चिमी विश्लेषकों के अनुसार अगर ईरान के नेता परमाणु हथियार तैयार करने का फैसला करते हैं तो इस देश के पास काफी कम समय में परमाणु हथियार बनाने के लिए जानकारी और बुनियादी ढांचा है।
ईरान के पास 50 साल से ज्यादा से असैन्य परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम (civilian nuclear energy program) है। ईरान का कहना है कि वह परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल गैर-सैन्य उद्देश्यों के लिए कर रहा है। लेकिन 2000 के दशक की शुरुआत में ईरान के गुप्त परमाणु स्थलों और अनुसंधान के बारे में खुलासे ने दुनिया भर में चिंता पैदा कर दी थी। उस समय से ईरान का परमाणु कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय बहस और कूटनीति का विषय रहा है। इस क्रम में 2015 के परमाणु समझौता हुआ था।
अमेरिका ने 2018 में एकतरफा रूप से समझौते से खुद को अलग कर लिया। इसके बाद ईरान ने अपनी परमाणु गतिविधियों का बहुत विस्तार किया है। इससे ईरान द्वारा फिर से परमाणु हथियार विकसित करने को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। अक्टूबर 2024 में इजराइल ने ईरान पर अपना अब तक का सबसे बड़ा सीधा हमला किया था। इसमें ईरान के हवाई सुरक्षा और मिसाइल उत्पादन सुविधाओं को निशाना बनाया गया था। कुछ रिपोर्टों में बताया गया था कि इजराइल ने तेहरान के बाहर परचिन सैन्य परिसर में एक इमारत को नष्ट किया था। यहां वैज्ञानिक गुप्त परमाणु हथियारों से संबंधित रिसर्च कर रहे थे।
विश्लेषकों ने कहा है कि ईरान तय करे तो कुछ महीनों में परमाणु हथियार बना सकता है। 2018 के बाद से ईरान ने अपनी न्यूक्लियर इनरिचमेंट क्षमता बढ़ाई है। जून 2024 में अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा था कि ईरान “एक या दो सप्ताह” में परमाणु हथियार के लिए जरूरी विखंडनीय सामग्री (यूरेनियम या प्लूटोनियम जिनसे परमाणु बम बनता है) का उत्पादन कर सकता है।
ईरान में एक दर्जन से ज्यादा जगहों पर परमाणु ऊर्जा संबंधी फैसिलिटी हैं। इसकी सबसे बड़ी परमाणु ऊर्जा फैसिलिटी नतांज में है। ईरान का एकमात्र परमाणु ऊर्जा संयंत्र फारस की खाड़ी के तट पर बुशहर में है।
ईरान के पास क्रूज से लेकर बैलिस्टिक तक, कई तरह के मिसाइल हैं। मिसाइल क्षमता के मामले में यह मध्य पूर्व का ताकतवर देश है। यू.एस. खुफिया विश्लेषकों का कहना है कि ईरान के पास मध्य पूर्व में सबसे बड़ी बैलिस्टिक मिसाइल लिस्ट है। ईरान की सबसे लंबी दूरी की मिसाइलें 2,000km तक मार कर सकती हैं। ये पूरे मध्य पूर्व और यूरोप के कुछ हिस्सों को कवर करती हैं। ईरान के पास इस समय इंटरकॉन्टिनेंटल मिसाइल नहीं हैं। इसके मिसाइलों का रेंज इतना अधिक नहीं है कि ईरान से लॉन्च होकर अमेरिका तक पहुंच सके।
कई विदेश नीति विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि परमाणु हथियार संपन्न ईरान इजरायल के लिए गंभीर खतरा होगा। यह मध्य पूर्व में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए बड़ी चुनौती पेश करेगा। ईरान रूस और चीन के साथ सैन्य और आर्थिक साझेदारी बढ़ाकर अमेरिका के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। ईरान ने हाल ही में रूस को यूक्रेन के खिलाफ जंग लड़ने के लिए अपने ड्रोन दिए हैं।