चीन के न्यूक्लियर पावर प्लांट में लीकेज: फ्रांस की कंपनी ने पहले ही दी थी रेडियाेलॉजिकल खतरे की चेतावनी

Published : Jun 15, 2021, 09:22 AM IST
चीन के न्यूक्लियर पावर प्लांट में लीकेज: फ्रांस की कंपनी ने पहले ही दी थी रेडियाेलॉजिकल खतरे की चेतावनी

सार

चीन के न्यूक्लियर पावर प्लांट में हुए लीकेज का मामला अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनता जा रहा है। इस मामले में अब नया खुलासा हुआ है कि फ्रांस की बिजली कंपनी (EDF) ने लीकेज के बाद संभावित रेडियोलॉजिकल खतरे की चेतावनी दी थी। इस संबंध में मीडिया समूह CNN ने एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट प्रकाशित की है।

बीजिंग. दुनियाभर में कोरोना संक्रमण फैलाने का दोषी माना जा रहा चीन अब एक नये विवाद में घिर गया है। चीन के न्यूक्लियर पावर प्लांट में हुए लीकेज का मामला उजागर होने के बाद एक नया खुलासा हुआ है। इस परमाणु संयंत्र के निर्माण में चीनी कंपनी जनरल न्यूक्लियर पावर ग्रुप (सीजीएन) के साथ हिस्‍सेदार फ्रांस की बिजली कंपनी ईडीएफ ने सोमवार को खुलासा किया कि उसे इस प्लांट में अक्रिय गैसों((Inert gas) की जानकारी मिली थी। उसने संभावित रेडियोलॉजिकल खतरे की चेतावनी भी दी थी। लीकेज के बाद कंपनी ने प्लांट पर ही डेटा की समीक्षा के लिए सीजीएन के साथ बैठक बुलाई थी। बता दें कि फ्रांस की कंपनी के आग्रह पर इस मामले की अमेरिका भी जांच कर रहा है।

फ्रांस की कंपनी ने दी थी चेतावनी
बता दें कि यह प्लांट चीन के ग्वांगडोंग प्रांत में ताइशन में है। रिसाव के बाद दोनों कंपनियों की समीक्षा बैठक के बाद फ्रांस की बिजली कंपनी ईडीएफ ने लीकेज से संभावित रेडियोलॉजिकल खतरे को लेकर चेतावनी दी थी। इस संबंध में मीडिया समूह CNN ने एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट प्रकाशित की है।

चीन की कंपनी नहीं मानती कोई गलती
लीकेज के बावजूद चीनी कंपनी सीजीएन सभी आरोपों को नकारती है। उसका दावा है कि वो न्यूक्लियर पावर प्लांट पर सभी सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन करती है। इस कंपनी की नींव 2009 में रखी गई थी। 2018 और 2019 में इसमें बिजली का प्रोडक्शन शुरू हुआ था।

अमेरिका कर रहा जांच
इस न्यूक्लियर पावर प्लांट में फ्रांस की कंपनी की 30 प्रतिशत की भागीदारी है। फ्रांस की कंपनी के प्रवक्ता ने बताया कि संभावित रिसाव को लेकर अक्टूबर 2020 में पहली बार शंका जाहिर करते हुए चर्चा हुई थी। हालांकि प्रवक्ता ने यह भी कहा है कि रिसाव को देखते हुए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि पूरे प्लांट को बंद करने की आवश्यकता है। चूंकि दोनों कंपनियों के दावे अलग-अलग हैं, इसलिए इस मामले की जांच अमेरिका पूरी गंभीरता से कर रहा है। पहले भी अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल इस मसले पर बैठकें करता रहा है। दरअसल, चीन ने परमाणु ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया है। चीन में 5 प्रतिशत बिजली का उत्पादन न्यूक्लियर पावर प्लांट से ही हो रहा है।

CNN ने अमेरिका को मिले दस्तावेजों के आधार पर किया खुलासा
इस मामले में फ्रांस की कंपनी ने अमेरिका से जांच की मदद मांगी थी। अमेरिका को मिले दस्तावेजों के आधार पर मीडिया हाउस CNN ने इस मामले में यह खुलासा किया है। फ्रांस की कंपनी Framatome ने यूएस डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी को चिट्ठी लिखी है। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति यह मानते हैं कि स्थिति अभी नियंत्रण में है। इस मामले में अमेरिका लगातार चीन के संपर्क में है। G7 सम्मिट के दौरान भी चीन को लेकर चर्चा हुई थी।

 

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