लव जिहाद से अपनी बेटी को कैसे बचाएं? संघ प्रमुख मोहन भागवत ने बताए ये 3 आसान उपाय

Published : Jan 04, 2026, 12:26 PM ISTUpdated : Jan 04, 2026, 12:28 PM IST

Love Jihad Prevention: क्या आपकी बेटी भी अपरिचित के बहकावे में फंस सकती है? संघ प्रमुख मोहन भागवत ने ‘स्त्री शक्ति संवाद’ में लव जिहाद रोकने के 3 असरदार उपाय बताए। जानिए घर में संवाद, आत्मरक्षा और अपराधियों से निपटने का कारगर तरीका। 

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भोपाल। स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने हाल ही में भोपाल स्थित संघ कार्यालय में आयोजित स्त्री शक्ति संवाद कार्यक्रम में महिलाओं से खुलकर बात की। इस दौरान उन्होंने ज्वलंत मुद्दा लव जिहाद उठाया और कहा कि बेटियों की सुरक्षा में सबसे जरूरी है परिवार में आपसी संवाद। भागवत ने स्पष्ट किया कि लव जिहाद केवल कानून से नहीं रोका जा सकता। इसके लिए परिवार, समाज और महिलाएं खुद सक्रिय हों। उन्होंने 3 आसान और कारगर उपाय बताए, जो हर माता-पिता को अपनाने चाहिए। आईए जानते हैं वो उपाय क्या हैं…?

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1. परिवार में संवाद बनाए रखना क्यों जरूरी है?

संघ प्रमुख ने कहा कि बेटियों के बहकावे में आने की सबसे बड़ी वजह परिवार के भीतर संवाद की कमी है। माता-पिता को चाहिए कि वे रोज़ाना अपने बच्चों के साथ खुलकर बातचीत करें। यह केवल बेटी की सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि परिवार और समाज में सद्भावना और एकता बनाए रखने के लिए भी महत्वपूर्ण है।

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2. बेटी को सावधानी और आत्मरक्षा कैसे सिखाएं?

भागवत ने कहा कि बेटियों को सावधानी और आत्मरक्षा का संस्कार देना बेहद जरूरी है। उन्हें यह समझाना चाहिए कि अपरिचितों के साथ संबंध बनाने में सतर्क रहना चाहिए। इससे न केवल उनकी सुरक्षा बढ़ती है, बल्कि बेटियों में आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास भी आता है।

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3. अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई क्यों जरूरी है?

संघ प्रमुख ने स्पष्ट किया कि लव जिहाद के मामलों में सख्त और प्रभावी कार्रवाई जरूरी है। केवल रोकथाम ही नहीं, बल्कि अपराधियों को कानूनी तौर पर सजा दिलाना भी आवश्यक है। इससे समाज में संदेश जाएगा कि किसी के भी द्वारा बेटियों के अधिकार और सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं है।

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 सद्भावना और समाज की मजबूती

भागवत ने कहा कि समाज को चलाने की असली शक्ति सद्भावना है। यह केवल कानून या नियमों से नहीं बनती। उन्होंने जोर दिया कि परिवार और समाज मिलकर बेटियों की सुरक्षा और संस्कृति की रक्षा कर सकते हैं। इस मौके पर मध्यभारत प्रांत के संघचालक डॉ. अशोक पांडेय और कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि समाज की भलाई के लिए काम करने वाले लोग अपने हित से ऊपर उठकर राष्ट्र और संस्कृति के लिए सोचते हैं।

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