सऊदी अरब में 120 दिन बाद लागू होंगे कड़े सरिया नियम, क्या आप जानते हैं इसके बारे में?
Saudi Arabia Sharia Rules: सऊदी अरब ने पब्लिक जगहों के नामकरण पर शरिया आधारित सख्त नियम क्यों लागू किए? अल्लाह के नामों पर पाबंदी, नेताओं के नाम बैन, हर नाम पर निगरानी और सख्त शरिया नियम-क्या यह धार्मिक सुधार है या सत्ता की नई रणनीति?

Saudi Arabia Sharia Rules को लेकर सऊदी अरब ने ऐसा फैसला लिया है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। अब सऊदी अरब में स्कूल, अस्पताल, सड़क, सरकारी इमारत या किसी भी पब्लिक जगह का नाम रखना आसान नहीं होगा। सरकार ने नए नियम लागू किए हैं, जिनमें इस्लामिक शरिया के खिलाफ माने जाने वाले नामों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। ये नए नियम सऊदी कैबिनेट से मंज़ूर हो चुके हैं और आधिकारिक Umm Al-Qura Gazette में प्रकाशित भी किए जा चुके हैं। इन्हें प्रकाशित होने के 120 दिन बाद पूरे देश में लागू किया जाएगा।
किन-किन जगहों पर लागू होंगे ये नए नियम?
नए नियम सिर्फ़ सड़कों या इमारतों तक सीमित नहीं हैं। ये सभी पब्लिक प्लेसेज़ पर लागू होंगे, जैसे-
- म्युनिसिपल बिल्डिंग
- स्कूल और यूनिवर्सिटी
- हॉस्पिटल
- कल्चरल और स्पोर्ट्स सेंटर
- मस्जिद
- ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर
- अन्य सरकारी संपत्तियां
सरकार का कहना है कि यह कदम प्रशासनिक सुधार (Administrative Reforms) का हिस्सा है, ताकि पूरे देश में एक जैसी व्यवस्था और सांस्कृतिक पहचान बनाई जा सके।
अल्लाह के नामों पर पाबंदी क्यों लगाई गई?
इन नियमों का सबसे ज़्यादा चर्चा में रहने वाला हिस्सा यह है कि अब पब्लिक जगहों के नाम में अल्लाह के नामों का इस्तेमाल सीमित कर दिया गया है। अब सिर्फ़ 7 मंज़ूरशुदा नामों का ही इस्तेमाल किया जा सकेगा:
- अल-सलाम
- अल-अदल
- अल-अव्वल
- अल-नूर
- अल-हक़
- अल-शाहिद
- अल-मलिक
सरकार का मानना है कि इससे धार्मिक मर्यादा बनी रहेगी और नामों का गलत या अनावश्यक इस्तेमाल रोका जा सकेगा।
अगर किसी व्यक्ति के नाम पर जगह रखनी हो तो क्या होगा?
अगर किसी पब्लिक जगह का नाम किसी व्यक्ति के नाम पर रखना है, तो पहले उसकी ईमानदारी, क्रिमिनल रिकॉर्ड, सिक्योरिटी बैकग्राउंड और सामाजिक योगदान-सभी की संबंधित एजेंसियों से जांच कराई जाएगी। बिना पूरी जांच के नाम मंज़ूर नहीं होगा।
नाम रखने की मंज़ूरी कौन देगा?
नगरपालिका और आवास मंत्रालय नामों की आधिकारिक कैटेगरी तय करेगा। अंतिम मंज़ूरी संबंधित संस्था के प्रमुख के पास होगी। सभी संस्थानों को नामों का डिजिटल डेटाबेस भी तैयार करना होगा और उसे हर साल अपडेट करना अनिवार्य होगा।
क्या अब नाम रखने का डेटा भी ऑनलाइन होगा?
हर संस्था को अब पब्लिक जगहों के नामों का बड़ा डेटाबेस रखना होगा। इसे नियमित अपडेट करना होगा और सालाना रिकॉर्ड जनरल अथॉरिटी को देना होगा। नियम सड़कों और चौराहों के पुराने नियमों को रद्द कर देते हैं और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन को मॉडर्न और पारदर्शी बनाते हैं।
सऊदी सरकार का असली मकसद क्या है?
सरकार का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य है कि प्रशासन को मॉडर्न बनाना, निगरानी को मज़बूत करना, धार्मिक सिद्धांतों का सम्मान और सांस्कृतिक और राष्ट्रीय पहचान को एकरूप बनाना- इन नियमों के साथ पुराने सड़क और चौराहों से जुड़े सभी नियम भी रद्द कर दिए गए हैं।
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