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डेट, ड्रग्स, चुनाव और ड्रोन हमले: क्या वेनेजुएला में वही हुआ जो 1989 में पनामा में हुआ था?
Venezuela US Attack Deep Analysis: ड्रग्स के आरोप, विवादित चुनाव और सैन्य हमला-वेनेजुएला में मादुरो की गिरफ्तारी 1989 के पनामा ऑपरेशन जैसी क्यों दिखती है? जानिए कैसे अमेरिका ने इतिहास दोहराया। अंदर की पूरी कहानी…

अमेरिका-वेनेजुएला हमला आखिर किस पुराने फॉर्मूले पर हुआ?
Venezuela US Attack: अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला क्यों किया? क्या यह सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई थी या इसके पीछे 36 साल पुरानी कोई साजिश छिपी है? 3 जनवरी को जब अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने वेनेजुएला की राजधानी काराकास को दहला दिया, तब यह साफ हो गया कि मामला सिर्फ दबाव बनाने का नहीं है। अमेरिकी सैनिक सीधे वेनेजुएला में घुसे, राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लिया और देश से बाहर ले गए। यह पूरा घटनाक्रम 1989 में हुए पनामा ऑपरेशन जस्ट कॉज़ की याद दिलाता है, जब अमेरिका ने जनरल मैनुअल नोरिएगा को इसी तरह सत्ता से हटाया था।
क्या 2026 का वेनेजुएला हमला 1989 के पनामा ऑपरेशन की कॉपी है?
1989 में अमेरिका ने पनामा पर बड़ा सैन्य हमला किया था। तब करीब 27 हजार अमेरिकी सैनिकों ने पनामा में एंट्री की थी। मकसद था-जनरल मैनुअल नोरिएगा को सत्ता से हटाना। नोरिएगा कभी अमेरिका के भरोसेमंद सहयोगी और CIA एजेंट रह चुके थे, लेकिन बाद में उन पर ड्रग तस्करी और चुनावी धोखाधड़ी के आरोप लगे। अब वेनेजुएला में भी कहानी कुछ ऐसी ही दिखती है। मादुरो पर अमेरिका ने ड्रग्स, नारको-टेररिज्म और अंतरराष्ट्रीय अपराध सिंडिकेट चलाने के आरोप लगाए। क्या अमेरिका फिर से वही पुराना मॉडल अपना रहा है?
ड्रग्स का आरोप: क्या यही अमेरिका की सबसे बड़ी वजह है?
जैसे नोरिएगा को ड्रग रैकेटियर बताकर निशाना बनाया गया, वैसे ही मादुरो पर भी “कार्टेल डे लॉस सोल्स” चलाने का आरोप लगाया गया। अमेरिकी अभियोजकों का दावा है कि मादुरो ने हथियारबंद समूहों के साथ मिलकर अमेरिका में कोकीन की सप्लाई कराई। वॉशिंगटन ने मादुरो को सिर्फ तानाशाह नहीं, बल्कि एक क्रिमिनल गैंग लीडर के रूप में पेश किया। यही रणनीति पनामा में भी अपनाई गई थी।
चुनावी विवाद ने टकराव को कितना बढ़ाया?
वेनेजुएला के हालिया राष्ट्रपति चुनाव में मादुरो को 51% वोट मिलने का दावा किया गया, लेकिन विपक्ष ने नतीजों को फर्जी बताया। विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो ने दावा किया कि असल में जनता ने विपक्ष को भारी समर्थन दिया था। ठीक यही कहानी 1989 के पनामा चुनावों में भी देखने को मिली थी। तब विपक्षी उम्मीदवार गुइलेर्मो एंडारा को जीतता हुआ बताया गया, लेकिन नोरिएगा ने नतीजे रद्द कर दिए। इसके बाद अमेरिका का गुस्सा खुलकर सामने आया।
सत्ता परिवर्तन: क्या अमेरिका वही पुराना खेल खेल रहा है?
पनामा में नोरिएगा को हटाने के बाद अमेरिका ने अपने समर्थक नेता को राष्ट्रपति बनवाया। अब वेनेजुएला में भी यही सवाल उठ रहा है-मादुरो के बाद कौन? अभी तक यह साफ नहीं है कि अमेरिका विपक्षी नेता मचाडो को समर्थन देगा या किसी और चेहरे को आगे लाएगा। उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज की भूमिका भी इस पूरे खेल को और उलझा रही है।
क्या वेनेजुएला अगला पनामा बनेगा?
मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वेनेजुएला में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है। देश में सत्ता संघर्ष, विरोध प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय दबाव तेज होने की आशंका है। जिस तरह पनामा में सत्ता परिवर्तन के बाद हालात लंबे समय तक अस्थिर रहे, वैसा ही भविष्य वेनेजुएला का भी हो सकता है।
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