India-Lanka Relations:चीन का नाम लिए बिना बोला श्रीलंका, 'तीसरे देश को अपनी जमीन का इस्तेमाल भारत की सुरक्षा को खतरे में डालने के लिए नहीं करने देंगे'

Published : Feb 23, 2024, 11:51 AM ISTUpdated : Feb 23, 2024, 12:14 PM IST
Tharaka Balasuriya

सार

श्रीलंका के विदेश राज्य मंत्री थरका बालासूर्या ने कहा कि वो अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी तीसरे देश द्वारा भारत की सुरक्षा चिंताओं को खतरे में डालने के लिए नहीं करने देंगे।

भारत-श्रीलंका। श्रीलंका के विदेश राज्य मंत्री थरका बालासूर्या दिल्ली में रायसीना डायलॉग के 9वें संस्करण में शामिल होने के लिए भारत आए हुए थे। उस दौरान उन्होंने एशियानेट न्यूज एबल से बात की। उन्होंने भारत और श्रीलंका के संबंधों पर बात की। श्रीलंका के विदेश राज्य मंत्री थरका बालासूर्या ने कहा कि वो अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी तीसरे देश द्वारा भारत की सुरक्षा चिंताओं को खतरे में डालने के लिए नहीं करने देंगे। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी सुरक्षा के बारे में चिंतित नहीं होना चाहिए। हम भारत के बढ़ते कद को जानते हैं और हम इसका इस्तेमाल नहीं करेंगे।

श्रीलंकाई मंत्री ने ये सारी ऐसे वक्त में की जब कुछ दिन पहले ही मालदीव ने चीनी जासूस जहाज को अपनी समुद्री इलाके में रुकने में मदद की थी। इसके अलावा बीते साल अक्टूबर में श्रीलंका ने चीन के जासूसी जहाज को अपने समुद्री क्षेत्र में रुकने की इजाजत दी थी। हालांकि, भारत ने उस वक्त इस पर आपत्ति जाहिर की थी, लेकिन श्रीलंका को मजबूरी में ऐसा करना पड़ा था। लेकिन इस साल जब चीन ने फिर से श्रीलंका से अपनी जासूसी जहाज रोकने की अनुमति मांगी तो श्रीलंका ने अपने जल क्षेत्र में चीनी अनुसंधान पोत के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस बार श्रीलंका ऐसा इसलिए कर पाया क्योंकि, भारत ने पड़ोसी देश को वित्तीय और भौतिक सहायता प्रदान की थी।

भारत हमारे बड़े भाई जैसा- थरका बालासूर्या

एशियानेट न्यूज एबल के संवाददाता ने श्रीलंका के विदेश राज्य मंत्री थरका बालासूर्या से पूछा कि क्या चीन का अभी भी श्रीलंका में प्रभाव है? इस पर उन्होंने कहा "दोनों देश हमारे मित्र हैं। लेकिन भारत के मामले में हमारे बीच एक विशेष संबंध है और यह एक सभ्यतागत कड़ी है। अगर आप महावंश पढ़ते हैं श्रीलंका के लोग भारत से आए थे। श्रीलंका एक बौद्ध देश है और बौद्ध धर्म भारत से आया है। यह दो देशों के बीच बड़े भाई और छोटे भाई के रिश्ते की तरह बहुत मजबूत है।" इसके अलावा उन्होंने कहा कि हमारा चीन के साथ अन्य देशों की तरह ही महत्वपूर्ण व्यापारिक भागीदारी है।

हालांकि, अगर आप हमारे अधिकांश निर्यातों को देखें तो वे यूरोप और अमेरिका से आते हैं। श्रीलंका एक बहुत छोटा देश है और हमारी कोई बड़ी अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं है। लेकिन हम देशों के साथ व्यापार करना चाहते हैं और यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि श्रीलंका के लोगों को फायदा हो।

भारत को श्रीलंका ने दिया भारोसा

श्रीलंकाई मंत्री ने भारत के संबंध में कहा कि हम आश्वस्त करते हैं कि हम किसी भी देश के साथ व्यापार के लिए तैयार हैं। लेकिन जब भारत की बात आती है तो हमारे आपस में विशेष संबंध हैं। मुझे लगता है कि भारत को चीन के साथ हमारे संबंधों के बारे में चिंतित नहीं होना चाहिए। ये केवल चीन के साथ नहीं है, बल्कि हमारे संबंध पश्चिमी देशों जैसे अमेरिका, रूस और मध्य पूर्व के साथ भी अच्छे हैं। इसी बीत उन्होंने भारत के पर्यटकों को श्रीलंका का दौरा करने के लिए आमंत्रित किया। ये उनके श्रीलंका के पर्यटन क्षेत्र को पुनर्जीवित करने की एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है। 

बता दें कि बीते साल दिसंबर 2023 में श्रीलंका ने पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए  भारत, चीन, रूस, जापान, थाईलैंड, इंडोनेशिया और मलेशिया के लोगों के लिए फ्री वीजा सेवा जारी करने की घोषणा की है।श्रीलंका प्राकृतिक वातावरण से घिरा हुआ देश है। ये अपनी खूबसूरत बीचों के लिए जाना जाता है। श्रीलंका दुनिया का एकमात्र देश है जहां आप दुनिया के सबसे बड़े जानवर देख सकते है, जैसे  ब्लू व्हेल और हाथी।

भारत की नेबरहुड फर्स्ट नीति से श्रीलंका को फायदा

पिछले साल श्रीलंका की आर्थिक स्थिति काफी खराब थी. उस वक्त भारत ने एक सच्चे मददगार की तरह श्रीलंका की आर्थिक मदद की थी. इस पर बालासूर्या ने कहा "भारत और श्रीलंका के बीच संबंध अब तक के उच्चतम स्तर पर हैं। मैं इसकी भी सराहना करता हूं कि भारत ने पिछले साल हमारे साथ क्या किया जब हम कठिन समय से गुजर रहे थे।" उन्होंने कहा कि हमारे पास फ्यूल नहीं था। हमारे पास ईंधन नहीं था, हमारे पास गैस और दवा नहीं थी। तब भारत ने 4.5 अरब अमेरिकी डॉलर का कर्ज देकर हमारी मदद की थी। 

उन्होंने इसके लिए पीएम नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को भी धन्यवाद दिया। IMF के संबंध में भारत ने जिस तरह से श्रीलंका की मदद की थी, उस पर भी श्रीलंकाई मंत्री ने काफी सरहाना की और कहा कि भारत ने केवल नेबरहुड फर्स्ट नीति की बात नहीं की, बल्कि उसे पूरा करके भी दिखाया।

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