आयरलैंड की गॉलवे यूनिवर्सिटी के फूड बैंक की कतार में भारतीय छात्रों की तस्वीर पर विवाद हो रहा है। सोशल मीडिया पर आरोप है कि वे जरूरतमंदों की सुविधा का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि, रिपोर्ट में बढ़ती महंगाई को इसका कारण बताया गया है।
आयरलैंड की एक जानी-मानी यूनिवर्सिटी है, यूनिवर्सिटी ऑफ गॉलवे। वहां के फूड बैंक के बारे में 'द आयरिश टाइम्स' ने एक खबर छापी और साथ में एक फोटो भी लगाई, जिस पर अब बवाल मचा हुआ है। खबर ये थी कि खाने-पीने के सामान की कमी के चलते हर हफ्ते सैकड़ों छात्रों को फूड बैंक से खाली हाथ लौटाना पड़ रहा है। लेकिन विवाद इस बात पर शुरू हुआ कि फोटो में लाइन में लगे ज़्यादातर छात्र भारतीय थे।
21 फरवरी को छपी यह तस्वीर X (पहले ट्विटर) जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आग की तरह फैल गई। कई लोगों ने आरोप लगाया कि यह सुविधा तो आर्थिक रूप से कमज़ोर लोगों के लिए है, लेकिन अच्छी फाइनेंशियल बैकग्राउंड वाले विदेशी छात्र इसका गलत फायदा उठा रहे हैं। आलोचकों का सवाल है कि आयरलैंड में पढ़ने आने वाले विदेशी छात्रों को वीज़ा तभी मिलता है, जब वे यह साबित कर दें कि उनके पास रहने-खाने के लिए पर्याप्त पैसे हैं। तो फिर ये लोग मुफ्त के खाने के लिए लाइन में क्यों लगे हैं?
एक यूज़र ने X पर लिखा, 'लाइन में खड़े 90 फीसदी से ज़्यादा लोग भारतीय छात्र हैं। अगर ये लोग अपना खर्च नहीं उठा सकते तो आयरलैंड आते ही क्यों हैं, या फिर यह सिर्फ पैसे बचाने का कोई स्कैम है?' कुछ लोगों ने यह भी कहा कि इस तरह विदेशियों के फायदा उठाने से सिस्टम का भरोसा टूटता है और ज़रूरतमंद आयरिश छात्रों का हक़ मारा जाता है।
हालांकि, यह भी ध्यान देने वाली बात है कि 'द आयरिश टाइम्स' की खबर में कहीं भी भारतीय छात्रों को इस संकट का ज़िम्मेदार नहीं ठहराया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में बढ़ती महंगाई की वजह से हर तरह के छात्र आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। एक वजह यह भी हो सकती है कि गॉलवे यूनिवर्सिटी में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र पढ़ने आते हैं, इसलिए लाइन में उनकी मौजूदगी ज़्यादा दिख रही है।
