Asianet News Hindi

EXCLUSIVE: CAA राजनीतिक टूल, भाजपा इसका इस्तेमाल विभाजन के लिए कर रही: सुष्मिता देव

असम में विधानसभा चुनाव के लिए तीन चरणों में मतदान होना है। 27 मार्च को पहले चरण के लिए वोटिंग होगी। ऐसे में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के एक एक दौरे को छोड़ दें तो कांग्रेस आलाकमान चुनाव प्रचार में सक्रिय भूमिका में नजर नहीं रहा है। इसके बावजूद असम के स्थानीय नेता राज्य की सत्ता में आने को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं। 

assam assembly election sushmita dev exclusive-interview KPP
Author
New Delhi, First Published Mar 18, 2021, 4:15 PM IST
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp

गुवाहाटी. असम में विधानसभा चुनाव के लिए तीन चरणों में मतदान होना है। 27 मार्च को पहले चरण के लिए वोटिंग होगी। ऐसे में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के एक एक दौरे को छोड़ दें तो कांग्रेस आलाकमान चुनाव प्रचार में सक्रिय भूमिका में नजर नहीं रहा है। इसके बावजूद असम के स्थानीय नेता राज्य की सत्ता में आने को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं। 

कांग्रेस की राष्ट्रीय महिला अध्यक्ष और प्रवक्ता सुष्मिता देव से हमारे सहयोगी Asianet Newsable के याकूब ने खास बातचीत की और उनसे असम चुनाव और कांग्रेस की रणनीति के बार में जानने कोशिश की। 

सवाल: किन मुद्दों पर कांग्रेस असम में चुनाव लड़ रही है?
सुष्मिता देव ने कहा कि कांग्रेस असम में भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के मुद्दे पर चुनाव लड़ रही। उन्होंने कहा कि ये पूरे असम के मूल मुद्दे हैं। जिस तरीके से असम में बेरोजगारी है, खासकर के लॉकडाउन के बाद, आर्थिक समस्या है। आप जहां भी जाएं हर तरफ बेरोजगारी की बात हो रही है। मुझे लगता है कि भ्रष्टाचार संस्थागत हो गया है। इसलिए यह आपको नजर नहीं आएगा। यह आम सिस्टम के समानांतर चल रहा है। यह ऊपरी स्तर तक है। बंद दरवाजे के पीछे आपके हर कॉन्ट्रैक्टर और बिजनेस मैन आपको यह बता देगा। 

सवाल: इस चुनाव में कांग्रेस को पूर्व सीएम तरुण गोगोई की कितनी कमी महसूस हो रही है?

सुष्मिता देव: देखिए तरुण गोगोई ने असम को शांतिपूर्ण 15 साल दिए हैं। उनकी रणनीति कभी बांटकर राज्य करने की नहीं रही। मुझे लगता है कि गोगोई हॉलमार्क थे। लेकिन उनके साथ जाने के बाद मैं नहीं कहूंगी...प्रद्योत बरदोलोई, रिपुन बोरा और देबब्रत सैकिया जैसे अगली पीढ़ी के नेता हैं, ये सभी प्रख्यात चेहरे हैं। ये उन लोगों में विश्वास जगाते हैं जिन्होंने तरुण गोगोई की विरासत का समर्थन किया। यह कहना गलत है कि हम तरुण गोगोई को मिस नहीं कर रहे। 

मेरा मानना ​​है कि हमारे पास अगली पीढ़ी में पर्याप्त विश्वसनीय चेहरे हैं जो बहुत मेहनत कर रहे हैं। मुझे लगता है कि गौरव गोगोई और मुझसे पहले, प्रद्योत बोरदोलोई, रिपुन बोरा, देवव्रत सैकिया की पीढ़ी सबसे आगे है। 

सवाल:  AIUDF से गठबंधन को लेकर पार्टी और उसके बाहर कांग्रेस की आलोचना हो रही है। क्या कांग्रेस को अपने आप से जीतने पर भरोसा नहीं था?

सुष्मिता देव : देखिए इसका मतलब ये नहीं है कि बिना गठबंधन के कांग्रेस जीत नहीं पाती। यहां तक की भाजपा ने भी गठबंधन किया है। लेकिन कोई भाजपा के गठबंधन की बात नहीं कर रहा है। दोनों तरफ गठबंधन है। लेकिन फोकस हमेशा कांग्रेस की तरफ ही क्यों होता, मैं यह नहीं समझ पा रही। पहले भाजपा ने बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट के साथ गठबंधन किया। अब लेकिन वे कह रहे हैं कि बीपीएफ अचानक भ्रष्टाचारी हो गई। अब वे दूसरी पार्टी के साथ हैं। मुझे पार्टी का नाम याद नहीं है। वे एजीपी के साथ गठबंधन में हैं। 

सवाल:  CAA के खिलाफ कांग्रेस के अभियान पर असम के लोगों की क्या प्रतिक्रिया है?

सुष्मिता देव :  मैं आपको बताऊं,  CAA एक राजनीतिक टूल है। भाजपा हमेशा विभाजन के लिए राजनीतिक टूल्स का इस्तेमाल करती है। मैं पूछती हूं कि सीएए से किसे फायदा पहुंचा। लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा सीएबी लाई। अब यह एक्ट के तौर पर CAA हो गया। लेकिन यह कानून अभी भी लंबित है। मैंने कहीं पढ़ा है कि उन्होंने अभी इसे लेकर नियम नहीं बनाए हैं। यह क्या है? कोई नहीं जानता भाजपा इसे बंगाल में इस्तेमाल कर रही है। वे इस पर ऊपरी असम में शांत हैं। लेकिन जब बात बराक वैली की आती है, तो वे इसका फिर इस्तेमाल करते हैं। 

CAA राजनीतिक टूल्स के अलावा कुछ नहीं है। सीएए एक राजनीतिक हथियार है। इससे किसी को कोई फायदा नहीं होगा। मुझे लगता है कि सभी संप्रदाय को इस बारे में पता चल गया है। 

सवाल:  यह भी कहा जा रहा है कि आपने सिबसागर में Anti -CAA Gamosa पहनने से इंकार कर दिया, जबकि कांग्रेस खुले तौर पर इसका विरोध कर रही है, इस पर आपका क्या कहना है?

सुष्मिता देव :  जब मैं सिबसागर उस समय गई जब 21 फरवरी को होजाई में मीटिंग हुई, जो अल्पसंख्यकों और बंगालियों की बड़ी सभाओं में से एक थी। 21 फरवरी को भाजपा ने एक नैरेटिव सेट किया कि वोटर लिस्ट में जिसका नाम है, उसने पहले ही अपने दस्तावेज दिखा दिए हैं और अपना नाम वोटर लिस्ट में शामिल करवा लिया। जबकि कांग्रेस सरकार में वोटर लिस्ट कई बार रिव्यू की गई। एक बार उस वक्त रिव्यू की गई थी, जब एजीपी की सरकार थी। इसलिए कांग्रेस 21 फरवरी को मदर टंग डे पर साफ किया कि 2014 में वोटर लिस्ट रिव्यू की गई थी। कांग्रेस पार्टी के तौर पर इस मत के साथ है कि वे असम के नागरिक हैं। सिबसागर में मीटिंग 21 फरवरी से पहले हुई थी। 
  
सुष्मिता देव : मेरे लिए मैंने पहले अपने संमुदाय को कांग्रेस के स्टैंड के बारे में जानकारी दी। इसके बाद मैंने ये कदम उठाया। अन्यथा, भाजपा बंगाली इलाकों में इसका गलत फायदा उठाती। और मैंने लगातार यह सुनिश्चित किया है कि एक देश के रूप में भारत लोगों को बिना राज्य के नहीं छोड़ सकता। हमें अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के अनुसार एक संवैधानिक उपाय की आवश्यकता है। यही मेरा स्टैंड है।

मैंने हमेशा कहा है कि हमें एक ऐसा उपाय खोजना होगा जो भारत की अंतर्राष्ट्रीय नीतियों के अनुरूप हो, जिससे नागरिकता, शरणार्थी और जो भी हो, उसके बारे में बात हो सके। मेरे लिए एंटी सीएए और प्रो सीएए कहना बहुत कठिन है। मैं एक वकील हूं। मैं कानून को अच्छे से समझती हूं। 

सवाल: असम में कांग्रेस का मुख्यमंत्री चेहरा कौन होगा? गौरव गोगोई ने कहा कि अगर कांग्रेस जीतती है तब भी उन्हें मुख्यमंत्री चेहरा बनने में कोई दिलचस्पी नहीं है?

सुष्मिता देव :  हमारी पहली जंग चुनाव जीतना है। पहली बार आप अगर आफ 2016 का चुनाव प्रचार देखें तो तरुण गोगोई के नेतृत्व में हुआ था, वही चेहरा थे। होर्डिंग में भी अकेले उनका ही चेहरा दिखता था। यह कहते हुए कि गोगोई सरकार के गुड गवर्नेंस के 15 साल। इस समय चुनाव में कोई अकेला नाम नहीं है। यात्रा पोस्टर में सबके चेहरे हैं। हम सभी के चेहरे पोस्टर में हैं। पहले सभी का ध्यान चुनाव जीतने पर है। चुनाव जीतने के बाद क्या हाई कमान चाहता है, क्या विधायक चाहते हैं, यह सब देखकर मुख्यमंत्री चुना जाएगा। 

सवाल:  क्या क्या प्रियंका गांधी के असम आने से कांग्रेस को फायदा मिला है?

सुष्मिता देव : यह बिल्कुल सही है, इसमें कोई संदेह नहीं है। जब प्रियंका गांधी जैसा बड़ा नेता आता है और असम के लोगों को भरोसा दिलाता है कि वादे पूरे होंगे। जिसे उन्होंने गारंटी कहा है। इससे वजन पड़ता है। मुझे लगता है कि इससे पार्टी की क्रेडिबिल्टी बढ़ती है। उनके ऐलानों ने लोगों पर बड़ा प्रभाव डाला है।  

सवाल:  कांग्रेस नेतृत्व बंटा हुआ नजर आ रहा है, 23 नेताओं ने पार्टी के कामकाज पर सवाल उठाए हैं, आपको नहीं लगता है कि चुनाव के वक्त इससे पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचेगा?

सुष्मिता देव : अगर कोई कहता है कि पार्टी को आंतरिक तौर पर बेहतर तरीके से चलाने की जरूरत है। मुझे लगता है कि यह आवाज पार्टी के अंदर ही रहती चाहिए। यह सार्वजनिक तौर पर नहीं जानी चाहिए। सभी को पार्टी के अंदर मुद्दे उठाने का अधिकार है। लेकिन इससे साथ ये जिम्मेदारी होनी चाहिए कि यह बात बाहर नहीं जाए। यही मेरी राय है। मैं इस पर नहीं कहना चाहूंगी कि उन नेताओं ने क्या बयान दिए। मुझे लगता है कि ये नेता मुझसे ज्यादा सीनियर हैं। लेकिन मुझे लगता है कि जनता के बीच जाना पार्टी के हित में नहीं है। 

सवाल: इस चुनाव में कांग्रेस कितनी सीटों पर जीतती दिख रही?

सुष्मिता देव : हमें विश्वास है। हम मेहनत से लड़ रहे हैं। हमें विश्वास है कि हम अपने चुनाव से पूर्व किए गठबंधन के साथ सरकार बनाएंगे। लेकिन हमें अति आत्मविश्वास नहीं है। हम अपना बेहतर कर आघे बढ़ रहे हैं। वहीं चुनाव प्रबंधन भी अच्छा चल रहा है। हमें विश्वास है कि हम सरकार बनाएं। लेकिन कितनी सीटें जीतेंगे, अभी इस स्तर पर मैं ये बताने में असमर्थ हूं। हमारे आंतरिक सर्वे हमें 101 सीटें जीतता दिखा रहे हैं। ये कौन सी सीटें हैं, मैं आपको नहीं बता सकती। लेकिन हमें विश्वास है कि हम 101 सीटें जीतेंगे। 

इस खबर को इंग्लिश में पढ़ें - EXCLUSIVE: 'CAA is a political tool invoked by BJP to divide'

Follow Us:
Download App:
  • android
  • ios