एक बार नीतीश को इस्तीफा देना पड़ा और मांझी, उनके "खड़ाऊ" मुख्यमंत्री बने। जैसे भरत ने प्रभु श्रीराम के वनवास के दौरान उनके खड़ाऊ से अयोध्या पर शासन किया। हालांकि न तो नीतीश राम हैं और न मांझी भरत। 

पटना। जीतनराम मांझी की राजनीतिक किस्मत का कोई जवाब नहीं। उन्होंने खुद नहीं सोचा था कि कभी वो बिहार के मुख्यमंत्री बन जाएंगे। मगर बीजेपी के साथ जेडीयू तनातनी में ऐसा मोड़ भी आया कि नीतीश को इस्तीफा देना पड़ा और मांझी, उनके "खड़ाऊ" मुख्यमंत्री बने। जैसे भरत ने प्रभु श्रीराम के वनवास के दौरान उनके खड़ाऊ से अयोध्या पर शासन किया। हालांकि न तो नीतीश राम हैं और न मांझी भरत। नीतीश की वापसी के बाद मांझी कुर्सी नहीं छोड़ना चाहते थे। इस चक्कर में उनके रिश्ते खराब हो गए और वो उन्होंने अलग होकर हिन्दुस्तानी अवामी मोर्चा बना लिया। 

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मांझी कुछ दिन एनडीए में रहे फिर वहां से महागठबंधन पहुंचे। किस्मत देखिए कि एक बार फिर जेडीयू का सहयोगी पार्टी एलजेपी के साथ झगड़ा सतह पर है और नीतीश के लिए मांझी की अहमियत बढ़ गई। उन्हें महागठबंधन से एनडीए में लेकर आए हैं। अभी तक महागठबंधन के दलों के बीच मांझी की हैसियत मामूली दिख रही थी, मगर चुनाव की घोषणा से ठीक पहले वो बिहार में राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बन चुके हैं। मांझी ने दल क्या बदला उनका दिल भी बदला-बदला नजर आ रहा है। 

दल बदलते ही नीतीश की वाहवाही 
मांझी के दिल की गवाही उनकी पार्टी के पोस्टर और बयानों में देखा जा सकता है। अब मांझी नीतीश की तारीफ़ों के पुल बांध रहे हैं तेजस्वी यादव को बुरा भला कह रहे हैं। मंगलवार को उनकी पार्टी का एक पोस्टर सामने आया है। इसमें नीतीश की घोषणा का विरोध करने वाले नेताओं पर तंज़ कसा गया है। पोस्टर पर लिखा है- सरकारी नौकरी है दलितों का अधिकार, मत विरोध करो जंगलराज के युवराज। पोस्टर में सरकारी गजट की तस्वीर भी है। तेजस्वी पर निशाना साधते हुए यह भी लिखा गया है- मैट्रिक फेल जंगलराज के युवराज को कोई समझा दे कि नीचे क्‍या लिखा है। मांझी के पोस्टर में एनडीए नेताओं की तस्वीर है मगर नीतीश का विरोध कर रहे एलजेपी नेता चिराग का फोटो नहीं। दरअसल, तेजस्वी ने नीतीश की घोषणा को चुनावी स्टंट बताते हुए एससी/एसटी समाज को गुमराह करने का आरोप लगाया था। चिराग ने भी नीतीश के फैसले पर निगेटिव बयान दिया था। 

बागी चिराग की वजह से एनडीए में गड़बड़ 
साफ जाहिर है कि बिहार एनडीए में सहयोगियों के बीच सबकुछ ठीक नहीं है। एलजेपी नेता चिराग, नीतीश के रवैये और मांझी के आने के बाद इतने नाराज हैं कि वो राज्य में जेडीयू के खिलाफ उम्मीदवार उतारने की योजना पर काम कर रहे हैं। एक दिन पहले ही संसदीय समिति की बैठक में पार्टी ने उन्हें बिहार की राजनीति से जुड़ा कोई भी फैसला लेने के लिए अधिकृत कर दिया है। एलजेपी के 143 सीटों पर प्रत्याशी उतारने की चर्चा है। नीतीश संग झगड़े को लेकर बीजेपी के दिग्गज नेता अमित शाह से भी बात की खबरें हैं। उधर, चिराग के रवैये से नाराज जेडीयू भी किसी कीमत पर झुकने को तैयार नहीं।

केसी त्यागी की चिराग को दो टूक 
पार्टी के सीनियर नेता केसी त्‍यागी ने साफ कहा कि एनडीए में शामिल दलों को नीतीश का नेतृत्व स्वीकार करना ही पड़ेगा। बीजेपी के दिग्गज नेता पहले ही नीतीश के नेतृत्व में चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं। लेकिन एनडीए में अपनी भूमिका को लेकर परेशान चिराग चाहते हैं कि मुख्यमंत्री का चेहरा बीजेपी का हो। चिराग ज्यादा सीटें भी मांग रहे हैं जिसे देने को लेकर नीतीश बिलकुल राजी नहीं हैं। ज्यादा दबाव बढ़ने के बाद ही उन्होंने लालू यादव के खेमे से मांझी को तोड़कर एनडीए में शामिल किया। वैसे हालत दूसरी तरफ भी ज्यादा ठीक नहीं है। सीटों के बंटवारे को लेकर महागठबंधन में भी तू-तू मैं-मैं साफ सुनी जा सकती है। इस बीच लालू फैमिली का अंदरूनी मसला भी राजनीतिक होते दिख रहा है। 

लालू की कमजोर नस पर हाथ विरोधियों का हाथ 
एक दिन पहले ही नीतीश ने लालू की बहू और चंद्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या के उत्पीड़न को लेकर लालू और उनके बेटों पर हमला किया था। इस बयान से साफ हो गया कि लालू के घर का झगड़ा इस बार चुनाव में भी मुद्दे के रूप में खड़ा होगा। ऐश्वर्या के पति तेजप्रताप को इस बात का अंदेशा पहले से था। यह भी कहा गया कि पति को हराने के लिए सारण से ऐश्वर्या चुनाव लड़ेंगी। यही वजह है कि तेजप्रताप सारण से अपनी सीट हसनपुर बदलना चाह रहे हैं। उन्होंने यहां जनसम्पर्क कर लोगों का मन भी टटोलने की कोशिश की है। 

बहू से कैसे निपटेगा लालू परिवार 
अब चर्चा यह है कि ऐश्वर्या भी जेडीयू के टिकट पर वहीं से चुनाव लड़ सकती हैं जहां से तेजप्रताप लड़ेंगे। ऐश्वर्या के पिता चंद्रिका के बयान से इसे बल मिल रहा है। उन्होंने संकेत दिया- बेटी अगर चाहेगी तो वो हसनपुर से भी तेजप्रताप को चुनौती देगी। उधर, बीजेपी ने तेजप्रताप के चुनाव क्षेत्र बदलने पर मजे लिए हैं। तंज़ कसा कि तेजप्रताप कहीं से भी लड़ें, उन्हें हारना ही पड़ेगा। तेजप्रताप की जिस तरह से अगंभीर राजनीतिक छवि बनी है उसे देखते हुए इतने बड़े चुनाव में ऐश्वर्या के सामने लालू फैमिली की परेशानी को आसानी से समझा जा सकता है।