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बेटे की लाश का इंतजार कर रही मां बोली, अब घर का चूल्हा कैसे जलेगा, पहले पति गए, अब बेटा चला गया

दिल्ली अग्निकांड में मारे गए बिहार के रहने वाले अब्बास के घर सन्नाटा पसरा हुआ है। उसकी बूढ़ी मां सकीना बार-बार यह कहते हुए बेहोश हो जाती है, कि अब मेरे घर का चूल्हा कैसे चलेगा। 9 साल पहले मेरे पति मुझको छोड़कर चले गए। अब बेटा भी चला गया।

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Patna, First Published Dec 9, 2019, 7:56 PM IST
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दिल्ली. देश की राजधानी दिल्ली की एक अनाज मंडी स्थित अवैध फैक्ट्री में हुए अग्निकांड में 43 जिंदगियां मौत के मुंह में समा गईं। वहीं इस हादसे में बिहार के सबसे ज्यादा युवक मारे गए हैं। लेकिन सबसे ज्यादा इस बूढ़ी मां को है। वह बार-बार यही कह रही है, मेरा बेटा मर गया अब घर का चूल्हा कैसे जलेगा। ये खुदा मुझको भी उठा ले, मैं जिंदा रहकर क्या करूंगी।

पहले पति गए, अब बेटा भी चला गया
दरअसल, इस हादसे में बिहार के सीतामढ़ी जिले के 5 युवकों की मौत हुई है। इन्हीं में से एक था अब्बास, जो अपने घर का मुखिया था। उसकी कमाई से ही घर का खर्चा चलता था। जब से बूढ़ी मां सकीना ने बेटे की मौत की खबर सुनी है वह सदमे में है। वह बार-बार यही कह रही है। कोई तो मेरे बेटे को लौटा दो, अब इस घर का चूल्हा कैसे चलेगा। कोई नहीं बचा कमाने वाला। 9 साल पहले मेरे पति मुझको छोड़कर चले गए। अब बेटा भी चला गया। अभी मृतक अब्बास की लाश घर नहीं पहुंची है।

पत्नी और मां को देख हर किसी की आंखे हो रहीं नम
वहीं अब्बास की पत्नी अंगूरी का रो-रोकर बुरा हाल है। वह कभी अपनी बुजुर्ग सास को संभालती तो कभी दो छोटे-छोटे बच्चों को। पूरे गांव के लोग इस समय अब्वास के घर पर मां और पत्नी को दिलासा देने के लिए आ रहे हैं। उनका हाल देख हर किसी की आंखें नम हो जाती हैं।

मारे गए लोग अधिकतर बिहार के थे
इस अग्निकांड में मार गए 30 से ज्यादा लोग बिहार के रहने वाले थे। वह इस फैक्ट्री में दिन में मजदूरी करते थे और रात हो जाने पर यहीं सो जाते थे। लेकिन उन्हें क्या पता था रविवार का दिन उनका आखिरी होगा और वह जिस जगह रोजी-रोटी कमाने के लिए आए हैं, वह भूमि उनकी काल बन जाएगी।

पिता की मौत के बाद गया था दिल्ली
मृतक के भाई ने मुस्ताक ने बताया, अब्बास पिता की मौत के बाद करीब 9 साल पहले दिल्ली गया था। जहां कुछ दिन बाद वह इस फैक्ट्री में काम करने लगा था। फिर कुछ दिन बाद उसने मुझे दिल्ली बुला लिया और उसके जान पहचान से मेरी नौकरी लगी थी।

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