कोरोना और लॉकडाउन के साथ-साथ बेमौसम की बारिश बिहार के लोगों की कड़ी परीक्षा ले रही है। तेज आंधी और बारिश के बीच वज्रपात की चपेट में बिहार में 12 लोगों की मौत हो गई। जबकि 15 अन्य झुलस गए हैं। इसके साथ ही बेमौसम बारिशसे से किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। 

पटना। कोरोना के कहर के बीच बिहार में प्राकृतिक आपदा भी लोगों की कड़ी परीक्षा ले रही है। बेमौसम की बारिश से पहले ही किसानों की फसल कई दफे बर्बाद हो चुकी है। वहीं वज्रपात की चपेट में आने से कई परिवारों में मातम मचा हुआ है। आज राज्य के सारण, भोजपुर व अन्य जिलों में बारिश के साथ-साथ वज्रपात हुई। जिससे छपरा में वज्रपात की चपेट में आने से 9 लोगों की मौत हो गई। जबकि 15 अन्य झुलस गए।

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मिली जानकारी के अनुसार, सारण जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के खलपुरा गांव के कुछ लोग परवल के खेत में गए हुए थे। इसी दौरान तेज बारिश के साथ वज्रपात हुई। बारिश से बचने के लिए ये लोग जिस झोपड़ी में छिपे थे, उसी पर ठनका गिर पड़ा। जिससे 9 लोगों की मौत हो गयी जबकि अन्य घायल हो गए। इसके अलावा जमुई में 2 और सारण में एक के मौत की खबर है। बिहार में 12 मौतों पर आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर संवेदना प्रकट की है। 

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भोजपुर के बड़हरा में एक युवती की गई जान
सारण के असैनिक मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी सह सिविल सर्जन डॉ माधवेश्वर झा ने बताया कि छह लोगों का शव सदर अस्पताल लाया गया है। घटना में घायल छह लोगों का इलाज सदर अस्पताल में किया जा रहा है। वहीं आरा से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, भोजपुर जिले के बड़हरा थाना क्षेत्र के बखोरापुर गांव में आज वज्रपात से एक युवती की मौत हो गयी। बखोरापुर गांव निवासी पुष्पा कुमारी (18)अपने खेत में काम कर रही थी तभी वज्रपात हुआ। इस घटना में युवती की झुलस कर मौत हो गयी। शव को पोस्टमार्टम के लिये आरा सदर अस्पताल आरा भेज दिया गया है।

रबी की फसल के साथ-साथ आम-लीची को नुकसान
इस समय रबी के फसल की तैयारी का समय चल रहा है। ज्यादातर किसान रबी की कटाई कर चुके हैं। कई जगहों पर अभी गेहूं की फसल की दौनी बाकी है। ऐसे में हर दो-तीन दिन पर हो रही बारिश से गेहूं की फसल भींग जा रही है। जिससे फसल के बर्बाद होने की आशंका जताई जा रही है। साथ ही इस समय हो रही बारिश से आम और लीची के फसल पर भी बुरा प्रभाव पड़ रहा है। तेज आंधी के साथ हो रही बारिश में आम के टिकोले बड़ी मात्रा में झड़ जा रहे हैं। दूसरी ओर मक्के की फसल भी खेतों में गिर जा रही है। जिससे किसानों की कमर टूट गई है।