महामारी का रूप अख्तियार कर चुके कोरोना से बचाव के लिए पूरे देश में लॉकडाउन है। जिस कारण कोई सावर्जनिक वाहन की आवाजाही नहीं हो रही है। इस बीच घर से दूर काम करने वाले मजदूर और असंगठित क्षेत्र के लोग पैदल भी अपने घर पहुंच रहे हैं। 

बेतिया। कोरोना से बचाव के लिए बिहार में 22 मार्च से लॉकडाउन है। जबकि 24 मार्च से राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन है। ऐसे में पूरे देश में कहीं भी आने-जाने के लिए कोई सावर्जनिक वाहन नहीं चल रहा है। दूसरी ओर लॉकडाउन के चलते असंगठित क्षेत्र के कामगारों की रोजी-रोटी छिन गई है। अपने घर से कोसों दूर रह रहे ऐसे मजदूर काम छिन जाने के बाद घर लौटना चाहते हैं। लेकिन कोई साधन नहीं मिलने से उनकी परेशानी बढ़ी हुई है। इसी बीच देश के कई हिस्सों से मजदूरों का जत्था पैदल ही घर के लिए निकल गया है। बिहार के बेतिया में गुरुवार को पांच मजदूर पहुंचे, जो काम छिन जाने के बाद बुधवार को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से पैदल ही घर के लिए निकले थे। 

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कोल्ड स्टोर में काम करते थे पांचों
बेतिया पहुंचे इन युवकों ने बताया कि वे लोग गोरखपुर के एक कोल्ड स्टोर में काम करते थे। लेकिन लॉकडाउन के कारण उनका कोल्ड स्टोर बंद हो गया। ऐसे में उन लोगों क काम छिन गया। मालिक ने मजदूरी का भुगतान कर घर जाने को बोल दिया। अब जब काम ही नहीं बचा था तो वहां रहने का कोई मतलब नहीं था। हम लोगों के पास पैसे भी कम ही थे। ऐसे में हम लोगों ने घर जाने का फैसला लिया। लेकिन कोई साधन नहीं मिलता देख हमलोग गोरखपुर से रेलवे पटरी पर चलते हुए अपने घर जा रहे हैं। 

मंगलवार की सुबह गोरखपुर से चले
बता दें कि ये पांचों मजदूर अबतक 170 किलोमीटर की दूरी तय कर चुके हैं। ये पांचों युवक पश्चिमी चंपारण के चनपटिया के रहने वाले हैं। इन्होंने बताया कि मंगलवार की सुबह हमलोगों ने गोरखपुर से चलना शुरू किया था। बुधवार की सुबह ये लोग 110 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर बगहा पहुंचे थे। बता दें कि बगहा और यूपी के बीच करीब 15 किलोमीटर वाल्मिकीनगर के जंगल का इलाका है। इन मजदूरों ने उस जंगल को भी पार किया। बेतिया से इनलोगों का घर करीब 17 किलोमीटर दूर है। ऐसे में ये पांचों आज शाम तक अपने घर को पहुंच जाएंगे।