केंद्र सरकार की ओर से गाइडलाइन जारी होने के बाद भी दूसरे राज्यों में फंसे बिहारी मजदूर आ सकेंगे इस पर संशय के बादल मंडरा रहे हैं।

पटना। बिहार सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के हिसाब से इस समय राज्य के करीब 26 लाख लोग दूसरे राज्यों में फंसे हैं। लॉकडाउन के कारण इनमें से ज्यादातर लोगों की रोजी-रोटी छिन गई है। जैसे-तैसे ये लोग दूसरे राज्यों में अपना दिन काट रहे हैं। 

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इस बीच अन्य राज्यों की तर्ज पर बिहार में भी दूसरे राज्यों में फंसे लोगों को वापस बुलाने की मांग तेज हुई थी। बुधवार को केंद्र सरकार ने लॉकडाउन में ढील देते हुए दूसरे राज्यों में फंसे लोगों को वापस बुलाने का रास्ता साफ भी कर दिया है। हालांकि केंद्र सरकार की ओर से गाइडलाइन जारी होने के बाद भी दूसरे राज्यों में फंसे बिहारी मजदूर आ सकेंगे इस पर संशय के बादल मंडरा रहे हैं। 

बिहार के पास संसाधन नहीं 
दरअसल, केंद्र सरकार के दिशा-निर्देश के बाद यह उम्मीद बंधी थी कि दूसरे राज्यों में फंसे लोग बिहार आ सकेंगे। लेकिन राज्य के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के ताजा बयान ने इस उम्मीद को तोड़ दिया है। सुशील कुमार मोदी का कहना है कि राज्य के पास इतने संसाधन नहीं है कि दूसरे राज्यों में फंसे मजदूरों को वापस बुलाया जा सके। सुशील कुमार मोदी ने दो-टूक कहा कि राज्य सरकार के पास इतनी बसें नहीं है कि दूसरे राज्यों में फंसे बिहारी मजदूरों को वापस बुलाया जा सके। 

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केंद्र सरकार से की स्पेशल ट्रेन की मांग
हालांकि सुशील मोदी ने यह भी कहा कि इस मामले में अधिकारियों से बातचीत की जा रही है। बातचीत के बाद कोई रणनीति बना ली जाएगी। दूसरी ओर राज्य के डिप्टी सीएम के इस बयान पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। लोग सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कह रहे हैं कि राज्य सरकार ही दूसरे राज्यों में फंसे बिहारियों को वापस नहीं बुलाना चाह रही है। हालांकि अपने इस बयान पर किरकिरी होता देख थोड़ी देर पहले सुशील कुमार मोदी ने भारत सरकार से मांग की है कि वो देश के अलग-अलग हिस्सों में फंसे प्रवासियों को बुलाने के लिए स्पेशल ट्रेन चलाए।