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लॉकडाउन में अनोखी शादी, मात्र 5 बाराती वो भी पहुंचे पैदल, मंडप पर दिखा सोशल डिस्टेंसिंग

कोरोना से बचाव के लिए जारी लॉकडाउन के कारण कई परिवारों ने शादी-विवाह जैसे आयोजनों को आगे के लिए टाल दिया है। लेकिन कई परिवार ऐसे भी हैं, जो इस विपरीत परिस्थिति में भी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शादी संपन्न कर रहे हैं। हालांकि ऐसे विवाह आयोजन बड़े यादगार बन रहे हैं। 
  

unique marriage during lockdown in bettiah with social distancing pra
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Bettiah, First Published Apr 29, 2020, 3:57 PM IST
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बेतिया। शादी-विवाह के समय में नाते-रिश्तेदार के साथ-साथ पूरे गांव के लोगों का हुजूम जुटता है। लेकिन लॉकडाउन ने पुरानी परंपराओं को बदल दिया है। कोरोना और लॉकडाउन के भय से ज्यादातर परिवार शादी-विवाह जैसे आयोजनों को आगे के लिए टाल रहे हैं। लेकिन कई परिवार इसी विकट परिस्थिति में शादी संपन्न करा रहे हैं। ताजा मामला बिहार के बेतिया से सामने आया है। जहां मात्र पांच बाराती के साथ एक शादी संपन्न कराई गई। गंडक तट पर बसे मधुबनी प्रखंड में यह शादी हुई, जिसमें सभी बाराती पैदल पहुंचे। सिर्फ दूल्हा एक बोलेरो पर चालक के साथ आया। 

सोशल डिस्टेंसिंग के साथ हुई शादी
इस शादी में दूल्हे के पिता समेत कुल पांच लोग ही बारात में शामिल हुए। सोशल डिस्टेंसिंग के साथ रस्म निभाए गए। धनहा थाना क्षेत्र के दौनहा गांव में यह शादी संपन्न हुई। हालांकि लॉकडाउन के व्यवधानों को देखते हुए पहले तो इस शादी को स्थगित करने को लेकर माथापच्ची हुई थी, लेकिन अंततः वर व वधु पक्ष ने निर्धारित सभी प्रावधानों का पालन करते हुए पूरी सतर्कता के साथ शादी सम्पन्न कराने का निर्णय लिया। धनहा थानाक्षेत्र के खलवा पट्टी गांव से सुभाष यादव के 26 वर्षीय पुत्र संतोष यादव की बारात दौनहा गांव आई। दौनहा निवासी हरेन्द्र यादव की बेटी सोनी की शादी के लिए बिना बैंड-बाजे के ही बारात दरवाजे लगी, तो मांगलिक गीतों के साथ महिलाओं ने बारातियों का स्वागत किया।

लॉकडाउन ने अरमानों पर फेरा पानी 
दूल्हा संतोष ने बताया कि शादी से पहले मन में कई तरह के अरमान जागे थे कि काफी धूमधाम से शादी करेंगे। लेकिन लॉकडाउन की वजह से अरमानों पर पानी फिर गया। सिर्फ पांच सदस्यों के साथ शादी हुई। खलवापट्टी से दौनहा की दूरी महज 3 किलोमीटर है। दूल्हे के पिता, मामा, भाई व नाई ने यह दूरी पैदल ही तय की तथा सभी रस्मों को संपन्न कराया। इन चारों के अलावा कोई अन्य व्यक्ति बारात में सहभागी नहीं बना। दूल्हे के पिता सुभाष यादव एवं दुल्हन के पिता हरेंद्र यादव ने बताया कि दिसंबर माह में ही शादी के लिए 27 अप्रैल की तिथि निर्धारित कर दी गई थी। इसके बाद टेंट, समियाना, बैंड बाजा, बारात में जाने के लिए वाहन सहित अन्य साधनों के लिए एडवांस के रूप में रुपये का भुगतान कर दिया। इससे दोनों पक्ष को लाखों रुपए का नुकसान हुआ है। 

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