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एक घटना के बाद अपना आपा खो बैठे थे मनोज कुमार, फिर खाने पड़े थे पुलिस के डंडे

मोनज कुमार को1994 में पद्मश्री और 2015 में दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

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Mumbai, First Published Jul 24, 2019, 12:18 PM IST
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मुंबई. 'है प्रीत जहां की रीत सदा...मैं गीत वहां के गाता हूं...भारत का रहने वाला हूं भारत की बात सुनाता हूं...' 'क्रांति' फिल्म का ये फेमस गाना आज भी लोगों की जुबान पर है। जब भी देशभक्ति फिल्मों की बात आती है तो सबसे पहले एक्टर मनोज कुमार की याद आती है। मनोज ने देशभक्ति से जुड़ी भावनाओं वाली कई मूवीज दीं। आज उनके जन्मदिन पर उनके जीवन में उतार-चढ़ाव के बारे में बातें बता रहे हैं। एक्टर का पूरा नाम हरि किशन गिरि गोस्वामी था। उनका जन्म 24 जुलाई,1937 को हुआ था। 

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खो बैठे थे अपना आपा

मनोज कुमार ने एक टीवी चैनल को इंटरव्यू देते समय अपने जीवन के कई उतार-चढ़ाव के बारे में बताया था। उन्होंने बताया था कि वे रिफ्यूजी कैंप में रहते थे। बहुत-सी मुश्किलों के बीच वे जीवन गुजारते थे। इसी दौरान उन्होंने कम उम्र में अपना छोटा भाई खो दिया था। जिसके वे अपना आपा खो बैठे थे। इस कारण एक्टर झगड़े करने लगे थे। जिसके चलते एक बार उन्हें पुलिस के डंडे भी खाने पड़े। इसके बाद उनके पिता उन्हें खूब समझाया और कसम दी कि वे लड़ाई नहीं करेंगे। 

'दादा साहेब फाल्के पुरस्कार' के नवाजे जा चुके हैं मनोज 

पिता जी के कसम दिलाने के बाद उन्होंने अपने कॅरियर पर फोकस किया और एक्टिंग की ओर चल पड़े। यहां पर भी उन्होंने काफी संघर्ष किया और 'क्रांति', 'रोटी कपड़ा मकान', 'पूरब और पश्चिम', 'उपकार' और 'सन्यासी' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं। इसके बाद उन्हें 1992 में पद्मश्री और 2015 में दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 

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