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Mirzapur 2 Review: दमदार कहानी और डायलॉग्स के आगे कमजोर है क्लाइमेक्स, जानें कैसी है वेबसीरीज

 पंकज त्रिपाठी, श्वेता त्रिपाठी, दिव्येंदु शर्मा और अली फजल स्टारर 'मिर्जापुर 2' का दर्शकों को बेसब्री से इंतजार था। ऐसे में अब उनका इंतजार खत्म हो गया है। वेबसीरीज को समय से एक दिन पहले ही गुरुवार की देर रात को ही रिलीज कर दिया गया। इसे 23 अक्टूबर को रिलीज किया जाना था।

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Mumbai, First Published Oct 23, 2020, 4:13 PM IST
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मुंबई. पंकज त्रिपाठी, श्वेता त्रिपाठी, दिव्येंदु शर्मा और अली फजल स्टारर 'मिर्जापुर 2' का दर्शकों को बेसब्री से इंतजार था। ऐसे में अब उनका इंतजार खत्म हो गया है। वेबसीरीज को समय से एक दिन पहले ही गुरुवार की देर रात को ही रिलीज कर दिया गया। इसे 23 अक्टूबर को रिलीज किया जाना था। सीरीज के सीजन 2 को लेकर फैंस के बीच जबरदस्त क्रेज देखने के लिए मिल रहा है। सीजन 2 में भी हिंसा, बदले की भावना और कई तरह के ऐक्शन सीक्वेंस देखने को मिल रहा है। पहले सीजन की कहानी के अंत में कई परिवार उजड़ चुके...

मिर्जापुर के पहले सीजन की कहानी के अंत में कई परिवार उजड़ चुके थे, लेकिन सबसे ज्यादा जख्मी गुड्डू पंडित (अली फजल) थे। मुन्ना त्रिपाठी (दिव्येंदु शर्मा) ने गुड्डू की बीवी, बच्चे और भाई की हत्या कर दी। इस गोलीकांड के बाद अगर बचे तो सिर्फ गुड्डू पंडित, उनकी बहन डिंपी और बबलू की गर्लफ्रेंड गोलू। पहला सीजन खत्न होने के बाद दर्शक इस बारे में तो आश्वस्त थे कि दूसरा सीजन गुड्डू पंडित के बदले की कहानी है। हालांकि मेकर्स के लिए बड़ी चुनौती ये थी कि जिस चीज के बारे में दर्शक पहले से ही काफी कुछ अंदाजा करके बैठे हैं, उससे इतर उन्हें कुछ नया परोसा जाए।

कहानी

'मिर्जापुर' के दूसरे सीजन में गुड्डू पंडित उस जख्मी शेर की तरह हैं, जो इंतकाम की आग में जल रहा है। इसी तरह गोलू को भी अपना बदला चाहिए। हालांकि, दोनों के परिवारों ने किसी न किसी को खोया है और अब वो चाहते हैं कि उनके बच्चे वापस लौट आएं। लेकिन, गुड्डू पंडित को अब बदला और 'मिर्जापुर' की गद्दी दोनों चाहिए।

मुन्ना त्रिपाठी रतिशंकर शुक्ला के बेटे शरद के साथ हाथ मिला लेते हैं। अब शरद को अपने पिता का बदला गुड्डू से चाहिए और मुन्ना अपना अधूरा काम पूरा करना चाहते हैं। इस बीच अखंडा अपने धंधे को बेहतर करने के लिए यूपी सीएम के साथ साठ-गांठ कर लेते हैं और उन्हें चुनावी फायदा देने के बहाने उनके करीब आ जाते हैं। रैलियों में मुन्ना सीएम की बेटी से करीबियां बढ़ा लेते हैं, जिसका फायदा लेते हुए अखंडा मुन्ना की शादी सीएम की विधवा बेटी से कर देते हैं, जो बाद में खुद सीएम बन जाती है। 

जौनपुर और मिर्जापुर के अलावा इस बार बिहार के भी एक गैंग को कहानी में शामिल किया गया है, जिसकी मदद गुड्डू और अखंडा दोनों ही अपना धंधा बढ़ाने के लिए करना चाहते हैं। दद्दा त्यागी के किरदार में लिलिपुट फारुकी और उनके बेटों के किरदार में विजय शर्मा का डबल रोल कहानी में काफी नयापन लाता है। हालांकि, उन्हें मुख्य कहानी से थोड़ा अलग ही धारा में चलाने की कोशिश की गई है।

क्या रहा कमजोर?

पहले सीजन से दूसरे सीजन की तुलना की जाए तो इस सीजन का क्लाइमैक्स थोड़ा हल्का है, लेकिन फिर भी कहानी जिस मोड़ पर आपको इस सीजन में छोड़ती है वो आपको अगली कहानी का इंतजार करने को विवश करता है। जबरदस्त फाइट सीक्वेंस और बीच-बीच में आने वाले जोक्स कहानी में आपका रुझान बनाए रखते हैं लेकिन कहना होगा कि इस बार का सीजन पिछले से थोड़ा ज्यादा बड़ा है।

कैसा रहा डायरेक्शन और एक्टिंग

एक्टिंग और डायरेक्शन के मामले में 'मिर्जापुर-2' को पूरे मार्क्स दिए जा सकते हैं। अली फजल पहले से ज्यादा पावरफुल लगे हैं। दिव्येंदु अपने पुराने भौंकाली अंदाज में हैं। पंकज त्रिपाठी का किरदार इस बार पहले से थोड़ा कम दिखेगा लेकिन, नए किरदार कहानी में उनकी कमी को पूरा करते नजर आते हैं। बैकग्राउंड और थीम म्यूजिक पहले की ही तरह पावरफुल है।

क्या है सीजन 2 के नेगेटिव प्वॉइंट

इस सीजन में हर एपिसोड करीब एक घंटे के हैं और कुल 10 एपिसोड हैं तो संभव है कि कुछ लोगों को ये थोड़ा ज्यादा लंबा लगे। हालांकि, कहानी को इस तरह से बुना गया है कि दर्शक का रुझान इसमें बना रहता है। सीरीज में गाली गलौज, न्यूडिडी और वॉयलंस पहले से ज्यादा रखा गया है। तो अगर आप इस तरह का कंटेंट देखना पसंद नहीं करते हैं तो आप इसे अवॉइड कर सकते हैं।

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