इकोनॉमिक सर्वे 2025 के अनुसार, 2017-18 से बेरोजगारी दर में लगातार गिरावट देखी जा रही है। EPFO में योगदान भी बढ़ा है, खासकर युवाओं की भागीदारी से। AI के प्रभाव और चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला गया है।

नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट से ठीक पहले यानी 31 जनवरी को इकोनॉमिक सर्वे 2025 पेश किया। इसमें अर्थव्यवस्था की स्थिति, मौद्रिक और वित्तीय क्षेत्र विकास, महंगाई, इन्वेस्टमेंट, इन्फ्रास्ट्रक्चर, इंडस्ट्रीज, सर्विसेज, एग्रीकल्चर और फूड प्रोसेसिंग, जलवायु, पर्यावरण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अलावा रोजगार एवं कौशल विकास संबंधी अनुमान और आंकड़े पेश किए गए। आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया कि कैसे 2017-18 से बेरोजगारी दर में लगातार कमी आ रही है।

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2017-18 से लगातार घट रही बेरोजगारी

2023-24 की सालाना आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) रिपोर्ट के मुताबिक, 15 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए बेरोजगारी दर 2017-18 में 6 प्रतिशत से लगातार कम होते हुए 2023-24 में 3.2 प्रतिशत हो गई है। वहीं, वित्त वर्ष 2024-2025 की दूसरी तिमाही में 15 साल और उससे अधिक आयु के लोगों के लिए शहरी बेरोजगारी दर वित्त वर्ष 2023-24 की दूसरी तिमाही में 6.6 प्रतिशत की तुलना में सुधरकर 6.4 प्रतिशत हो गई।

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5 साल में कितना बढ़ा EPFO का नेट कंट्रीब्यूशन

इसके अलावा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO के नेट कंट्रीब्यूशन वित्त वर्ष 2019 में 61 लाख से बढ़कर वित्त वर्ष 2024 में 1.31 करोड़ हो गए हैं। अप्रैल-नवंबर, 2024 में नेट ग्रोथ 95.6 लाख तक पहुंच गई, जो मुख्य रूप से युवाओं की वजह से थी। 18 से 25 साल की आयु वाले श्रमिकों ने नेट सैलरी ग्रोथ में 47% का योगदान दिया। ये रोजगार के बढ़ते रुझान को बताता है।

AI के चलते होने वाले बदलाव के असर को कम करने की जरूरत

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से हो रहे विकास ने भारत के श्रम बाजार पर गहर असर डाला है। इससे जहां एक तरफ ग्लोबल लेबर मार्केट में नए अवसरों का निर्माण हुआ है, वहीं दूसरी ओर कई चुनौतियां भी पैदा हुई हैं। भारत के लेबर मार्केट में एआई का एकीकरण प्रोडक्टिविटी बढ़ाने, वर्कफोर्स की क्वालिटी इम्प्रूव करने और रोजगार पैदा करने का काम कर रहा है, लेकिन शर्त ये है कि मजबूत फ्रेमवर्क के जरिये हमें आनेवाली चुनौतियों का प्रभावी ढंग से समाधान निकालना होगा।

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